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Una News: बजट के विरोध में सीटू ने किया प्रदर्शन, प्रधानमंत्री का पुतला फूंका
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केंद्र ने बजट में मजदूरों और आम लोगों को किया दरकिनार : सुरेंद्र
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। सीटू ऊना ने केंद्रीय ट्रेड यूनियन के आह्वान पर मंगलवार को केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए बजट के विरोध में प्रदर्शन किया और देश के प्रधानमंत्री का पुतला फूंक कड़े शब्दों में इसकी भर्त्सना की। ऊना मुख्यालय पर किए गए विरोध प्रदर्शन की अगुवाई सीटू के जिला प्रधान सुरेंद्र कुमार ने की। सुरेंद्र कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने बजट में मजदूरों और आम लोगों के हितों को नहीं देखा है। केवल पूंजीपति वर्ग को राहत दी गई है। केंद्र सरकार ने पूंजीपतियों के आगे घुटने टेक दिए हैं तथा देश के संसाधनों का दुरुपयोग करके बजट में बैंक, बीमा, रेलवे, एयरपोर्ट बंदरगाहों, ट्रांसपोर्ट, गैस पाइप लाइन, बिजली, सरकारी कंपनियों के गोदाम, खाली जमीन, सड़क, स्टेडियम इत्यादि ज्यादातर सार्वजनिक क्षेत्र को निजीकरण करके बेचने का रास्ता खोल दिया है। 12 घंटे की ड्यूटी कर दी गई है। मजदूरों पर चार लेबर कोर्ट थोपे गए हैं। 44 श्रम कानूनों को खत्म किया जा रहा है। यह बजट पूर्ण तौर पर पूंजीपतियों, उद्योगपतियों को सीधा फायदा पहुंचाने वाला है। 26 हजार न्यूनतम वेतन देने की कोई बात नहीं कही गई है। आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, आशा वर्कर, मनरेगा वर्कर तथा मजदूर जमात को बजट में कुछ नहीं दिया गया। हाईकोर्ट शिमला के फैसले के मुताबिक मिड-डे मील वर्कर को 12 महीने का वेतन देना है, जबकि भाजपा सरकार 10 महीने का ही वेतन दे रही है। जब तक कांग्रेस और भाजपा की सरकारें 1990 में लाई गई नव उदारवाद की नीतियों को नहीं छोड़ती, तब तक मजदूरों, किसानों का भला नहीं हो सकता। मोदी सरकार ने किसानों के साथ वादा करते हुए जो कानून वापस लिए हुए थे, उनको लागू नहीं किया जा रहा है। आने वाले समय में सीटू तथा केंद्रीय ट्रेड यूनियन के आह्वान पर उग्र प्रदर्शन करने से भी गुरेज नहीं किया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। सीटू ऊना ने केंद्रीय ट्रेड यूनियन के आह्वान पर मंगलवार को केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए बजट के विरोध में प्रदर्शन किया और देश के प्रधानमंत्री का पुतला फूंक कड़े शब्दों में इसकी भर्त्सना की। ऊना मुख्यालय पर किए गए विरोध प्रदर्शन की अगुवाई सीटू के जिला प्रधान सुरेंद्र कुमार ने की। सुरेंद्र कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने बजट में मजदूरों और आम लोगों के हितों को नहीं देखा है। केवल पूंजीपति वर्ग को राहत दी गई है। केंद्र सरकार ने पूंजीपतियों के आगे घुटने टेक दिए हैं तथा देश के संसाधनों का दुरुपयोग करके बजट में बैंक, बीमा, रेलवे, एयरपोर्ट बंदरगाहों, ट्रांसपोर्ट, गैस पाइप लाइन, बिजली, सरकारी कंपनियों के गोदाम, खाली जमीन, सड़क, स्टेडियम इत्यादि ज्यादातर सार्वजनिक क्षेत्र को निजीकरण करके बेचने का रास्ता खोल दिया है। 12 घंटे की ड्यूटी कर दी गई है। मजदूरों पर चार लेबर कोर्ट थोपे गए हैं। 44 श्रम कानूनों को खत्म किया जा रहा है। यह बजट पूर्ण तौर पर पूंजीपतियों, उद्योगपतियों को सीधा फायदा पहुंचाने वाला है। 26 हजार न्यूनतम वेतन देने की कोई बात नहीं कही गई है। आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, आशा वर्कर, मनरेगा वर्कर तथा मजदूर जमात को बजट में कुछ नहीं दिया गया। हाईकोर्ट शिमला के फैसले के मुताबिक मिड-डे मील वर्कर को 12 महीने का वेतन देना है, जबकि भाजपा सरकार 10 महीने का ही वेतन दे रही है। जब तक कांग्रेस और भाजपा की सरकारें 1990 में लाई गई नव उदारवाद की नीतियों को नहीं छोड़ती, तब तक मजदूरों, किसानों का भला नहीं हो सकता। मोदी सरकार ने किसानों के साथ वादा करते हुए जो कानून वापस लिए हुए थे, उनको लागू नहीं किया जा रहा है। आने वाले समय में सीटू तथा केंद्रीय ट्रेड यूनियन के आह्वान पर उग्र प्रदर्शन करने से भी गुरेज नहीं किया जाएगा।