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Una News: जिले में जन्मजात हृदय रोग से ग्रस्त निकल रहे बच्चे

Sun, 04 Oct 2026 10:55 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Sun, 04 Oct 2026 10:55 AM IST
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Children in the district are being diagnosed with congenital heart disease.
ऊना। बच्चे जन्मजात ही विभिन्न प्रकार की बीमारियों के संक्रमण से ग्रस्त पाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में ऊना जिला में पिछले सात महीने में ही 14 बच्चे जन्मजात हृदय रोग से ग्रस्त निकले हैं जबकि गत वर्ष यह आंकड़ा 33 पंजीकृत हुआ था और यह क्रम हर वर्ष बच्चों के विभिन्न प्रकार के बीमारियों के संक्रमण से ग्रस्त होने का बढ़ता ही जा रहा है। इस बात का खुलासा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की रिपोर्ट में हुआ है। जिला ऊना में इस कार्यक्रम के तहत 10 मोबाइल टेस्टिंग टीमें में स्थापित की गई हैं। जिले के प्रत्येक ब्लॉक में दो-दो मोबाइल टेस्टिंग टीम के माध्यम से इस कार्यक्रम का संचालन किया जाता है। जिसमें साल में एक बार हर सरकारी स्कूल में 18 साल तक के बच्चों का स्वास्थ्य जांचा जाता है और आंगनबाड़ी केंद्र में हर साल में दो बार बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जाती है और स्क्रीनिंग के दौरान अगर किसी भी प्रकार की बीमारी से ग्रस्त को बच्चा निकलता है तो ट्रीटमेंट के लिए संबंधित चिकित्सक से परामर्श करने के लिए मामला रेफर किया जाता है।
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अभी हाल ही में जिला के गगरेट विधानसभा क्षेत्र से भी 16 साल के बच्चे को जन्मजात से ही हृदय रोग से ग्रस्त पाए जाने की सूरत में उपचार के लिए पीजीआई रेफर किया गया है। बच्चे के दिल में छेद होने की सूरत में मामले की संवेदनशीलता को प्राथमिकता के आधार पर चिकित्सक की निगरानी में उपचार जारी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अधिकतर मामलों में परामर्श और दवा से ही बच्चों का उपचार संभवत हो पाता है। गंभीर स्थिति में ही बच्चों का ऑपरेशन के माध्यम से उपचार किया जाता है। वर्तमान में विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त बच्चों का क्षेत्रीय अस्पताल के अलावा सिविल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के रेफरल अस्पतालों में भी उपचार संभवत है। उसके बाद ही आगे प्राथमिक उपचार के बाद ऐसे मामले संबंधित चिकित्सकों की निगरानी और परामर्श के बाद ऊना जिला के पीजीआई के लिए रेफर किए जाते हैं। बाकायदा पीजीआई में इस तरह के मामलों की निगरानी के लिए नोडल ऑफिसर भी तैनात किए गए हैं। जोकि संबंधित जिलों के मसलों को शिमला मुख्यालय मंजूरी मिलने के बाद भेजते हैं ताकि संबंधित बीमारी का खर्चा समय रहते वहन हो सके और मरीज को भी समय पर उपचार मिल सके।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर एसके वर्मा का कहना है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्कूलों में स्क्रीनिंग के चलते 33 बच्चे गत वर्ष जन्मजात हृदय रोग से ग्रस्त निकले हैं और अभी हाल ही में सात महीने में 14 बच्चे भी स्क्रीनिंग में हृदय रोग से ग्रस्त पाए गए हैं। समय रहते रोगों से ग्रस्त बच्चों को उपचार मिल सके। इसके लिए चिकित्सकों की टीम के साथ परामर्श करने के बाद केस पीजीआई रैफर किए जाते हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल करना है।
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कार्यप्रणाली और जांच
आंगनबाड़ी और स्कूल स्तर पर जांच की जाती है। मोबाइल हेल्थ टीमें (एमएचटी) आंगनबाड़ी केंद्रों और सरकारी/सहायता प्राप्त स्कूलों में जाकर बच्चों की जांच करती हैं। जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (डीईआईसी) है। जहां पर गंभीर बीमारियों, जन्मजात दोषों या सर्जरी की आवश्यकता वाले बच्चों को उच्च चिकित्सा केंद्रों व डीईआईसी (डीईआईसी) में मुफ्त इलाज के लिए रेफर किया जाता है।
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