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Una News: बचपन को घेर रहा मोटापा, हर पांचवां बच्चा शिकार
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अमर उजाला एक्सक्लूसिव
स्कूलों में बच्चों को बताए जाएंगे चीनी और तेल के हानिकारक प्रभाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा- बच्चों को परोसे जा रहे मोटापा बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ
यही स्थिति रही तो 2050 तक 44.9 करोड़ लोग हो जाएंगे मोटापे का शिकार
विकास चौधरी
ऊना। गलत खानपान और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण स्कूली विद्यार्थी तेजी से मोटापे का शिकार हो रहे हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार देश में हर पांच में से एक बच्चा मोटापे से ग्रस्त है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बच्चों में अत्यधिक मीठे और तेलयुक्त खाद्य पदार्थों के सेवन का चलन बढ़ गया है। फास्ट फूड, स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक और प्रोसेस्ड फूड इसका प्रमुख कारण हैं। यही नहीं 2025 तक जारी आंकड़ों में बताया गया है कि देश में 18 करोड़ वयस्क मोटापे से ग्रस्त हैं। यदि स्थिति ऐसी ही रही तो 2050 तक मोटापे के शिकार लोगों की संख्या 44.9 करोड़ तक पहुंच सकती है।
इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए स्कूल स्तर पर योजनाएं तैयार की गई हैं। शिक्षा मंत्रालय ने निर्देश जारी किए हैं कि बच्चों को तेल और चीनी के अधिक सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक किया जाए। इसके लिए स्कूलों में शुगर बोर्ड लगाने के आदेश दिए गए हैं। इन बोर्डों के माध्यम से बच्चों को बताया जाएगा कि अत्यधिक मीठे वाले हानिकारक पदार्थ कौन-कौन से हैं और वे किन बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसके साथ ही बच्चों को शारीरिक गतिविधियों के लाभ समझाए जाएंगे और उन्हें खेलों और व्यायाम के लिए प्रेरित किया जाएगा। स्कूलों में वर्कशॉप और अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को भी संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधियों के महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी।
तेजी से घट रहा खेलों की ओर रुझान, मैदान सूने
जिले के अधिकांश गांवों और कस्बों में बच्चों का खेलों की ओर रुझान तेजी से घट रहा है। इसका मुख्य कारण अभिभावकों की ओर से पढ़ाई पर अत्यधिक जोर देना है। परिणामस्वरूप कई स्थानों पर खेल मैदान खाली और सूने पड़े हैं। दूसरी ओर बाजार में उपलब्ध सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ बच्चों को दिए जा रहे हैं। बिना इस पर ध्यान दिए कि उनका स्वास्थ्य पर क्या असर होगा।
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जिला उच्च शिक्षा विभाग के उपनिदेशक अनिल कुमार तक्खी ने बताया कि सभी स्कूलों को बच्चों को मोटापे के प्रति जागरूक करने के निर्देश जारी किए गए हैं। विशेषकर निजी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले बच्चों में मोटापे के मामले अधिक देखने को मिलते हैं। इसकी रोकथाम के लिए शुगर बोर्ड सहित अन्य व्यवस्थाएं लागू करने को कहा गया है।
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स्कूलों में बच्चों को बताए जाएंगे चीनी और तेल के हानिकारक प्रभाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा- बच्चों को परोसे जा रहे मोटापा बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ
यही स्थिति रही तो 2050 तक 44.9 करोड़ लोग हो जाएंगे मोटापे का शिकार
विकास चौधरी
ऊना। गलत खानपान और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण स्कूली विद्यार्थी तेजी से मोटापे का शिकार हो रहे हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार देश में हर पांच में से एक बच्चा मोटापे से ग्रस्त है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बच्चों में अत्यधिक मीठे और तेलयुक्त खाद्य पदार्थों के सेवन का चलन बढ़ गया है। फास्ट फूड, स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक और प्रोसेस्ड फूड इसका प्रमुख कारण हैं। यही नहीं 2025 तक जारी आंकड़ों में बताया गया है कि देश में 18 करोड़ वयस्क मोटापे से ग्रस्त हैं। यदि स्थिति ऐसी ही रही तो 2050 तक मोटापे के शिकार लोगों की संख्या 44.9 करोड़ तक पहुंच सकती है।
इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए स्कूल स्तर पर योजनाएं तैयार की गई हैं। शिक्षा मंत्रालय ने निर्देश जारी किए हैं कि बच्चों को तेल और चीनी के अधिक सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक किया जाए। इसके लिए स्कूलों में शुगर बोर्ड लगाने के आदेश दिए गए हैं। इन बोर्डों के माध्यम से बच्चों को बताया जाएगा कि अत्यधिक मीठे वाले हानिकारक पदार्थ कौन-कौन से हैं और वे किन बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसके साथ ही बच्चों को शारीरिक गतिविधियों के लाभ समझाए जाएंगे और उन्हें खेलों और व्यायाम के लिए प्रेरित किया जाएगा। स्कूलों में वर्कशॉप और अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को भी संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधियों के महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी।
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तेजी से घट रहा खेलों की ओर रुझान, मैदान सूने
जिले के अधिकांश गांवों और कस्बों में बच्चों का खेलों की ओर रुझान तेजी से घट रहा है। इसका मुख्य कारण अभिभावकों की ओर से पढ़ाई पर अत्यधिक जोर देना है। परिणामस्वरूप कई स्थानों पर खेल मैदान खाली और सूने पड़े हैं। दूसरी ओर बाजार में उपलब्ध सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ बच्चों को दिए जा रहे हैं। बिना इस पर ध्यान दिए कि उनका स्वास्थ्य पर क्या असर होगा।
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जिला उच्च शिक्षा विभाग के उपनिदेशक अनिल कुमार तक्खी ने बताया कि सभी स्कूलों को बच्चों को मोटापे के प्रति जागरूक करने के निर्देश जारी किए गए हैं। विशेषकर निजी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले बच्चों में मोटापे के मामले अधिक देखने को मिलते हैं। इसकी रोकथाम के लिए शुगर बोर्ड सहित अन्य व्यवस्थाएं लागू करने को कहा गया है।