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Una News: सीबीएसई पैटर्न वाले सरकारी स्कूल बने निजी संस्थानों के लिए बड़ी चुनौती

Fri, 20 Mar 2026 12:22 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Fri, 20 Mar 2026 12:22 AM IST
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CBSE pattern government schools pose a big challenge for private institutions
ऊना। जिला में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब सरकारी स्कूल भी निजी स्कूलों को कड़ी टक्कर देने की स्थिति में आ गए हैं। शिक्षा विभाग द्वारा जिले के 10 सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू करने के निर्णय के बाद अभिभावकों का रुझान तेजी से इन स्कूलों की ओर बढ़ रहा है। सबसे खास बात यह है कि इन स्कूलों में निजी संस्थानों की तुलना में बेहद कम फीस में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाई जा रही है। यही कारण है कि कई अभिभावकों ने इस सत्र में अपने बच्चों का दाखिला सीबीएसई आधारित सरकारी स्कूलों में करवाने का मन बना लिया है।
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जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग ने जिन स्कूलों को इस योजना में शामिल किया है, उनमें राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला अंब, अंबोटा, हरोली, बढेड़ा, दुलैहड़, बंगाणा, ऊना (बाल), धर्मसाल महंता, टकोली और भरवाईं शामिल हैं। इन स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से सीबीएसई पैटर्न लागू किया जा रहा है। सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू होने से निजी स्कूल संचालकों की चिंता बढ़ गई है। अब तक सीबीएसई शिक्षा के लिए अभिभावकों के पास निजी स्कूल ही विकल्प होते थे लेकिन अब कम खर्च में वही सुविधा मिलने से प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। महंगी फीस, परिवहन शुल्क और अन्य खर्चों से परेशान अभिभावकों के लिए यह पहल राहत भरी साबित हो रही है। अभिभावकों में नीलम देवी, रितिका रानी, अशोक कुमार, राजेश कुमार का कहना है कि यदि सरकारी स्कूलों में भी बेहतर शिक्षा और सुविधाएं मिलती हैं तो निजी स्कूलों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं रहेगी।
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शिक्षा विभाग का दावा है कि इन स्कूलों में न केवल सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किया जा रहा है बल्कि शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ स्मार्ट क्लास, आधुनिक लैब और बेहतर शैक्षणिक माहौल पर भी फोकस किया जा रहा है ताकि विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा मिल सके।
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उपनिदेशक जिला उच्च शिक्षा विभाग अनिल कुमार ने बताया कि इस पहल से सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ने की पूरी संभावना है। आने वाले समय में यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो जिले के अन्य स्कूलों में भी इसे लागू किया जा सकता है।
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