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Una News: चेक बाउंस मामले में कारोबारी की अपील खारिज, नहीं मानी सुरक्षा चेक देने की दलील

Wed, 02 Sep 2026 06:04 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Wed, 02 Sep 2026 06:04 PM IST
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Businessman's appeal in cheque bounce case dismissed; plea regarding submission of security cheque rejected.
दुलैहड़ (ऊना)। चेक बाउंस के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-एक की अदालत ने कारोबारी की आपराधिक अपील खारिज कर दी है। अदालत ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ऊना की ओर से 22 जनवरी 2026 को सुनाई गई दोषसिद्धि और 24 जनवरी 2026 को दिए गए सजा के आदेश को बरकरार रखा है। आरोपी को तीन माह की साधारण कैद और शिकायतकर्ता प्रदेश ग्रामीण बैंक को 11 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा सुनाई गई थी। मामला प्रदेश ग्रामीण बैंक की धुंधला शाखा से जुड़ा है। बैंक के अनुसार आरोपी ने अपने कारोबार के लिए नौ जून 2020 को सुविधा मंजूर होने पर ऋण सुविधा का लाभ उठाया लेकिन बाद में भुगतान में चूक हो गई। बकाया राशि की अदायगी के लिए आरोपी ने दो मार्च 2023 को 9,63,748 रुपये का चेक बैंक के पक्ष में जारी किया लेकिन नौ मार्च 2023 को पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण यह बाउंस हो गया। इसके बाद बैंक ने 14 मार्च 2023 को वैधानिक मांग नोटिस भेजकर चेक की राशि का भुगतान करने को कहा। भुगतान नहीं होने पर बैंक ने परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करवाई। ट्रायल कोर्ट में आरोपी ने चेक जारी करने और उस पर अपने हस्ताक्षर होने से इन्कार नहीं किया था। उसका कहना था कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था और उसने ऋण की आधे से अधिक राशि चुका दी थी। हालांकि, अपने बचाव के समर्थन में उसने न तो स्वयं गवाही दी और न ही कोई दस्तावेज या अन्य गवाह पेश किया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि चेक पर हस्ताक्षर और ऋण लेनदेन स्वीकार होने के बाद परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 118(ए) और 139 के तहत बैंक के पक्ष में वैधानिक धारणा बनती है। आरोपी को इस धारणा को संभावित बचाव के आधार पर रिबूट करना था लेकिन वह ऐसा करने के लिए पर्याप्त सामग्री अदालत के समक्ष नहीं ला सका। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी चेक को सुरक्षा चेक बताना अपने आप में आरोपी को धारा 138 के तहत दायित्व से मुक्त नहीं करता। इसके चलते अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अपील में कोई मेरिट न पाते हुए उसे खारिज कर दिया और आरोपी को ट्रायल कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर सजा भुगतने के निर्देश दिए। अनुपस्थित रहने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
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