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Una News: नजदीकी मुकाबले में हारे चेहरों पर भाजपा-कांग्रेस की नजर

Tue, 30 Jun 2026 12:48 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Tue, 30 Jun 2026 12:48 AM IST
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BJP and Congress keep a close watch on candidates who lost in tight contests.
ऊना। हरोली विधानसभा क्षेत्र में पंचायत चुनावों के नतीजे आने के साथ ही अगले विधानसभा चुनाव की राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। पंचायत, बीडीसी और जिला परिषद चुनावों में जीत हासिल करने वाले जनप्रतिनिधियों के साथ कम अंतर से चुनाव हारने वाले प्रभावशाली चेहरों की राजनीतिक अहमियत भी अचानक बढ़ गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल ऐसे नेताओं और उम्मीदवारों को अपने पाले में मजबूत करने के लिए संपर्क साध रहे हैं।
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सूत्रों के अनुसार चुनाव जीतने वाले प्रतिनिधियों में अधिकांश का किसी दल से जुड़ना जगजाहिर हो चुका है जबकि उन्हें कड़ी टक्कर देने वाले कई चेहरों का किसी दल से जुड़ाव अभी खुलकर सामने नहीं आया। दूसरी ओर पंचायत चुनावों ने एक बार फिर यह साबित किया है कि हरोली में जमीनी स्तर पर दोनों दलों का मजबूत आधार मौजूद है। यही कारण है कि पंचायत स्तर पर अच्छा वोट बैंक रखने वाले उम्मीदवारों को साधने की कवायद तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार बैठकों, कार्यक्रमों और निजी मुलाकातों के लिए निमंत्रण दिए जा रहे हैं। वहीं पंचायतों के विकास कार्यों को प्राथमिकता देने और प्रशासनिक सहयोग का भरोसा भी दिया जा रहा है।
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हरोली विधानसभा क्षेत्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। वर्ष 2003 से लगातार कांग्रेस यहां जीत दर्ज करती आ रही है। पिछले करीब 25 वर्षों में भाजपा हरोली का अभेद किला नहीं भेद पाई है। हालांकि हर चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत उल्लेखनीय रहा है, लेकिन जीत की दूरी पार नहीं हो सकी। ऐसे में पंचायत चुनावों के नतीजों को भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अवसर के रूप में देख रही है। पार्टी संगठन का मानना है कि पंचायत स्तर पर सक्रिय और प्रभावशाली चेहरों को साथ जोड़कर कांग्रेस की बढ़त को चुनौती दी जा सकती है।
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हारने वाले उम्मीदवार भी बने किंगमेकर
इस बार कई पंचायतों में मुकाबले बेहद रोचक और कांटे के रहे। कई उम्मीदवार मामूली मतों के अंतर से चुनाव हार गए लेकिन उनके साथ सैकड़ों समर्थकों का वोट बैंक जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि दोनों दलों की नजर ऐसे चेहरों पर टिकी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनावों में अक्सर यही स्थानीय प्रभावशाली नेता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यदि किसी दल को इनका समर्थन मिलता है तो बूथ स्तर पर उसका सीधा लाभ मिल सकता है।


विकास और संगठन दोनों होंगे अहम
हरोली की राजनीति में विकास कार्य हमेशा बड़ा मुद्दा रहे हैं। उपमुख्यमंत्री का क्षेत्र होने के कारण यहां विकास परियोजनाओं की लंबी सूची है। दूसरी ओर भाजपा संगठनात्मक मजबूती और स्थानीय असंतोष को आधार बनाकर अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। आने वाले महीनों में पंचायत प्रतिनिधियों, बीडीसी सदस्यों और जिला परिषद सदस्यों की राजनीतिक सक्रियता बढ़ने की संभावना है। यही प्रतिनिधि भविष्य में विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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