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Una News: जिला में देर रात हुई बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता
Wed, 16 Sep 2026 12:48 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Wed, 16 Sep 2026 12:48 AM IST
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चकसराय (ऊना)। जिला ऊना में देर रात हुई बारिश से एक ओर जहां किसानों को गर्मी और सिंचाई कार्य से राहत मिली है, वहीं कुछ किसानों के खेतों में आलू की मेड़ों में पानी भरने से फसल के सड़ने का खतरा बढ़ गया है। बारिश के बाद अब खेतों में पर्याप्त नमी होने के कारण फिलहाल किसानों को आलू की फसल की सिंचाई करने की जरूरत नहीं है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में अधिक बारिश के कारण आलू की मेड़ों में पानी जमा हो गया। ऐसे में मंगलवार को कई किसान खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी करते नजर आए। किसानों का कहना है कि बारिश होने से आलू की फसल की सिंचाई के लिए पानी देने के मजदूरी और बिजली खर्च करने से राहत मिलती है। यदि हर दस से 15 दिन के अंतराल में बारिश होती रहे तो किसानों को बढ़ते आर्थिक बोझ से कुछ हद तक राहत मिलेगी।
कृषि प्रसार अधिकारी चंदन कुमार शर्मा ने बताया कि खेत में लंबे समय तक जलभराव रहने से आलू के कंद प्रभावित हो सकते हैं और फसल में रोग लगने की संभावना बढ़ सकती है। बारिश के बाद किसानों को अपने खेतों का निरीक्षण करना चाहिए और जहां मेड़ों में पानी जमा हो गया है, वहां उचित तरीके से अतिरिक्त पानी की निकासी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को मौसम साफ होने के बाद खेत में नमी की स्थिति देखकर ही अगली सिंचाई करनी चाहिए। फसल में रोग के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विभाग के विशेषज्ञों से सलाह लेने की भी अपील की गई है।
मेड़ों में अधिक समय तक पानी जमा रहने से आलू की फसल को नुकसान पहुंच सकता है। जलभराव के कारण आलू के सड़ने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए बारिश के बाद मेड़ों से अतिरिक्त पानी की निकासी करना जरूरी है।
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-गुरमेल सिंह, किसान बैरियां
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पहले ही ट्रैक्टर से जुताई और बिजाई महंगी होने के कारण किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। यदि समय-समय पर हल्की बारिश होती रहे तो किसानों को सिंचाई, बिजली और मजदूरी के खर्च से राहत मिलेगी।
-बलवान सिंह, किसान बैरियां
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कृषि प्रसार अधिकारी चंदन कुमार शर्मा ने बताया कि खेत में लंबे समय तक जलभराव रहने से आलू के कंद प्रभावित हो सकते हैं और फसल में रोग लगने की संभावना बढ़ सकती है। बारिश के बाद किसानों को अपने खेतों का निरीक्षण करना चाहिए और जहां मेड़ों में पानी जमा हो गया है, वहां उचित तरीके से अतिरिक्त पानी की निकासी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को मौसम साफ होने के बाद खेत में नमी की स्थिति देखकर ही अगली सिंचाई करनी चाहिए। फसल में रोग के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विभाग के विशेषज्ञों से सलाह लेने की भी अपील की गई है।
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मेड़ों में अधिक समय तक पानी जमा रहने से आलू की फसल को नुकसान पहुंच सकता है। जलभराव के कारण आलू के सड़ने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए बारिश के बाद मेड़ों से अतिरिक्त पानी की निकासी करना जरूरी है।
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-गुरमेल सिंह, किसान बैरियां
पहले ही ट्रैक्टर से जुताई और बिजाई महंगी होने के कारण किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। यदि समय-समय पर हल्की बारिश होती रहे तो किसानों को सिंचाई, बिजली और मजदूरी के खर्च से राहत मिलेगी।
-बलवान सिंह, किसान बैरियां