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Una News: चताड़ा की अनीता घर पर ही डिटर्जेंट पाउडर बनाकर हुई आत्मनिर्भर

Tue, 07 Apr 2026 12:18 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Tue, 07 Apr 2026 12:18 AM IST
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Anita of Chatada became self-reliant by making detergent powder at home.
नारी में सर्फ तैयार करती महिलाएं।संवाद
नारी (ऊना)। गांव चताड़ा की महिलाओं ने स्वरोजगार की ऐसी राह चुनी है जिससे वे न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनकर उभरी हैं। गांव चताड़ा की अनीता ने दो स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को डिटर्जेंट पाउडर बनाने का प्रशिक्षण देकर उन्हें घर बैठे रोजगार उपलब्ध कराया है।
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अनीता का कहना है कि यह ऐसा काम है जिसे बिना किसी मशीन के आसानी से किया जा सकता है। इस रोजगार पर मौसम या ऋतु का भी कोई असर नहीं पड़ता और यह पूरे साल चलने वाला कार्य है। खास बात यह है कि डिटर्जेंट पाउडर हर घर में उपयोग होता है इसलिए इसकी बिक्री भी स्थानीय स्तर पर आसानी से हो जाती है। अनीता हर माह 12 से 15000 रुपये कमा रही हैं।
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जानकारी के अनुसार 200 किलोग्राम डिटर्जेंट पाउडर तैयार करने के लिए 70 किलो नमक, 40 किलो सोडा, 4 किलो कास्टिक, 50 किलो डोलामाइट, पांच किलो एबीएस पाउडर और अन्य सामग्री का उपयोग किया जाता है। इन सभी पदार्थों को एक बड़े तिरपाल पर डालकर हाथों से अच्छी तरह मिलाया जाता है। महिलाओं के अनुसार इस काम में सबसे अधिक मेहनत मिश्रण को मुलायम और बारीक बनाने में लगती है। मिश्रण तैयार होने के बाद इसमें खुशबू के लिए परफ्यूम मिलाया जाता है। इसके बाद इसे बड़ी छलनी से छाना जाता है। जो कण मोटे रह जाते हैं उन्हें दोबारा से हाथों से मसलकर बारीक किया जाता है और फिर मिश्रण में मिला दिया जाता है। इसके बाद तैयार डिटर्जेंट पाउडर को आधा किलो और एक किलो के पैकेट में भरकर बिक्री के लिए तैयार कर लिया जाता है।
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प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं कंचन, पूनम, रमा कुमारी और सुमन का कहना है कि डिटर्जेंट पाउडर बनाना ज्यादा कठिन नहीं है। इसमें केवल मेहनत और थोड़ा समय लगता है। उन्होंने कहा कि यदि थोड़ी मेहनत से घर बैठे रोजगार मिल रहा है तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। महिलाओं ने बताया कि उन्हें यह प्रशिक्षण अनीता ने दिया है जिसकी बदौलत वे आत्मनिर्भर बन पाई हैं।

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मुख्य प्रशिक्षक अनीता का कहना है कि केंद्र सरकार की कई योजनाएं गांवों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पातीं जबकि महिलाओं के लिए ये योजनाएं वरदान साबित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि बैंक से छोटा ऋण लेकर महिलाएं घर पर ही डिटर्जेंट पाउडर तैयार कर सकती हैं। इसके लिए किसी महंगी मशीन या विशेष पैकिंग की जरूरत नहीं पड़ती। साधारण लिफाफों में ही इसकी पैकिंग कर स्थानीय बाजार में बेचा जा सकता है। अनीता के अनुसार घर पर तैयार किया गया डिटर्जेंट पाउडर स्थानीय बाजार में 70 से 100 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है। इससे महिलाओं को अच्छा मुनाफा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार के अवसरों के प्रति जागरूक किया जाए तो जिले में कोई भी महिला बेरोजगार नहीं रहेगी। महिलाओं में काम करने की इच्छा पहले से ही है, जरूरत केवल उन्हें सही दिशा और जानकारी देने की है।
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