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Una News: बेटे को शौचालय तक ले जाने के लिए पिता के कंधे बने सहारा
Sat, 20 Jun 2026 12:39 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sat, 20 Jun 2026 12:39 AM IST
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गगरेट (ऊना)। जिस उम्र में माता-पिता अपने बेटे के सिर पर सेहरा सजने के सपने देखते हैं, उसी उम्र में एक पिता अपने जवान बेटे को कंधों के सहारे शौचालय तक पहुंचाने को मजबूर है। बीमारी ने बेटे के दोनों कूल्हों और घुटनों को इस कदर जकड़ लिया है कि उसकी दुनिया घर में बिछी एक खाट तक सिमट कर रह गई है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के सामने अब बेटे के इलाज के लिए साढ़े चार लाख रुपये जुटाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
उपमंडल गगरेट की ग्राम पंचायत गगरेट अपर के वार्ड नंबर-पांच निवासी विक्रम सिंह (पुत्र तिलक राज) वर्ष 2007 में पैरों में दर्द और तकलीफ महसूस होने के बाद धीरे-धीरे चलने-फिरने में असमर्थ हो गए। परिवार ने कई जगह उपचार करवाया लेकिन बीमारी का सही कारण लंबे समय तक सामने नहीं आ पाया। समय के साथ उनकी स्थिति और बिगड़ती गई और अब वह पूरी तरह बिस्तर पर आश्रित हो चुके हैं। हाल ही में चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि विक्रम सिंह के दोनों घुटनों के साथ-साथ दोनों कूल्हे भी प्रभावित हो चुके हैं। उन्हें सामान्य जीवन के करीब लाने के लिए हिप ज्वाइंट रिप्लेसमेंट ही एकमात्र विकल्प बचा है। इसके लिए करीब साढ़े चार लाख रुपये का खर्च बताया गया है, जो परिवार की आर्थिक क्षमता से कहीं अधिक है।
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उपमंडल गगरेट की ग्राम पंचायत गगरेट अपर के वार्ड नंबर-पांच निवासी विक्रम सिंह (पुत्र तिलक राज) वर्ष 2007 में पैरों में दर्द और तकलीफ महसूस होने के बाद धीरे-धीरे चलने-फिरने में असमर्थ हो गए। परिवार ने कई जगह उपचार करवाया लेकिन बीमारी का सही कारण लंबे समय तक सामने नहीं आ पाया। समय के साथ उनकी स्थिति और बिगड़ती गई और अब वह पूरी तरह बिस्तर पर आश्रित हो चुके हैं। हाल ही में चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि विक्रम सिंह के दोनों घुटनों के साथ-साथ दोनों कूल्हे भी प्रभावित हो चुके हैं। उन्हें सामान्य जीवन के करीब लाने के लिए हिप ज्वाइंट रिप्लेसमेंट ही एकमात्र विकल्प बचा है। इसके लिए करीब साढ़े चार लाख रुपये का खर्च बताया गया है, जो परिवार की आर्थिक क्षमता से कहीं अधिक है।
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