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जीएसटी को लेकर कपड़ा व्यापारियों में रोष
Updated Thu, 06 Jul 2017 10:55 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
ऊना। कपड़े पर जीएसटी लगने एवं सूरत में व्यापारियों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर जिला ऊना के कपड़ा व्यापारियों में भारी आक्रोश है। वीरवार को कपड़ा व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रख विरोध जताया। वहीं एमसी पार्क ऊना के बाहर धरना दिया। एक दिवसीय सांकेतिक विरोध प्रदर्शन के दौरान कपड़ा व्यापारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर जीएसटी प्रक्रिया को आसान करने की मांग उठाई। कपड़ा व्यापारी संघ के जिला प्रधान इकबाल सिंह का कहना है कि जीएसटी से कपड़ा व्यापारियों की परेशानी बढ़ जाएगी, क्योंकि अत्यधिक व्यापारी वर्ग शिक्षित नहीं है। जीएसटी की प्रक्रिया एक अशिक्षित व्यापारी से संभव नहीं है। उसको न तो कंप्यूटर का ज्ञान है और न ही उसकी दुकान में कंप्यूटर लगाने की जगह है। उन्होंने कहा कि कपड़ा व्यवसाय एक स्वरोजगार का माध्यम है और इसके द्वारा करोड़ों की संख्या में रोजगार का सृजन होता है। इसमें कपड़ा व्यापारी छोटी पूंजी से अपने व्यापार करता है और अपने परिवार और कर्मचारियों का जीवन यापन करता है। जीएसटी से कपड़ा क्षेत्र में भारी गिरावट आएगी और बेरोजगारी फैलेगी, इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी एवं जवाबदेही कपड़ा मंत्रालय और भारत सरकार की होगी। इस कानून को वापस लिया जाए नहीं तो इससे बेरोजगारी की समस्या और बढ़ जाएगी इस मौके पर सोमनाथ कौशल, केके धवन, इंदरजीत सिंह, चंदर सहगल, सुभाष भाटिया, सुभाष चौधरी, हर्ष दीप, संजीव, सोनू मक्कड़, विक्की, सतनाम सिंह, अशोक कुमार, दीपक मनोचा, सुशील, संजीव, रोहित नागपाल, सहित जिला ऊना के कपड़ा व्यापारी शामिल रहे।
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ऊना। कपड़े पर जीएसटी लगने एवं सूरत में व्यापारियों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर जिला ऊना के कपड़ा व्यापारियों में भारी आक्रोश है। वीरवार को कपड़ा व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रख विरोध जताया। वहीं एमसी पार्क ऊना के बाहर धरना दिया। एक दिवसीय सांकेतिक विरोध प्रदर्शन के दौरान कपड़ा व्यापारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर जीएसटी प्रक्रिया को आसान करने की मांग उठाई। कपड़ा व्यापारी संघ के जिला प्रधान इकबाल सिंह का कहना है कि जीएसटी से कपड़ा व्यापारियों की परेशानी बढ़ जाएगी, क्योंकि अत्यधिक व्यापारी वर्ग शिक्षित नहीं है। जीएसटी की प्रक्रिया एक अशिक्षित व्यापारी से संभव नहीं है। उसको न तो कंप्यूटर का ज्ञान है और न ही उसकी दुकान में कंप्यूटर लगाने की जगह है। उन्होंने कहा कि कपड़ा व्यवसाय एक स्वरोजगार का माध्यम है और इसके द्वारा करोड़ों की संख्या में रोजगार का सृजन होता है। इसमें कपड़ा व्यापारी छोटी पूंजी से अपने व्यापार करता है और अपने परिवार और कर्मचारियों का जीवन यापन करता है। जीएसटी से कपड़ा क्षेत्र में भारी गिरावट आएगी और बेरोजगारी फैलेगी, इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी एवं जवाबदेही कपड़ा मंत्रालय और भारत सरकार की होगी। इस कानून को वापस लिया जाए नहीं तो इससे बेरोजगारी की समस्या और बढ़ जाएगी इस मौके पर सोमनाथ कौशल, केके धवन, इंदरजीत सिंह, चंदर सहगल, सुभाष भाटिया, सुभाष चौधरी, हर्ष दीप, संजीव, सोनू मक्कड़, विक्की, सतनाम सिंह, अशोक कुमार, दीपक मनोचा, सुशील, संजीव, रोहित नागपाल, सहित जिला ऊना के कपड़ा व्यापारी शामिल रहे।