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Una News: 45,965 किसान मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना से लाभान्वित
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योजना से 3.08 करोड़ रुपये का किया गया प्रावधान
बोले- जिले में बीजों और खाद पर विभाग की ओर से निर्धारित दरों पर मिलता है अनुदान
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। हिमाचल सरकार कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसमें मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना बहुत महत्वपूर्ण साबित हो रही है। सरकार इस योजना के जरिए किसानों को उन्नत खेती के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित कर रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में कृषि उत्पादकता में वृद्धि करना, किसानों का उच्च किस्म की गुणवत्ता वाले बीज, पौध संरक्षण सामग्री और खाद उपलब्ध करवाना है। उप निदेशक कृषि डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि मुख्यमंत्री सुक्खू का किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर है। उनके निर्देशानुसार मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना के अंतर्गत ऊना जिला में बीजों व खाद पर विभाग की ओर से निर्धारित दरों पर अनुदान दिया जा रहा है। इसी कड़ी में पेखुबेला के सरकारी फार्म और मृदा प्रशिक्षण प्रयोगशाला के लिए बजट का प्रावधान किया जाता है। वर्ष 2024-25 में योजना के तहत 3.08 करोड़ का प्रावधान किया गया था। 3.02 करोड़ खर्च करके 45 हज़ार 965 किसानों को लाभान्वित किया गया है। जिले में अब तक बीज वितरण के लिए 2.5 करोड़ रुपये और खाद वितरण में 40 लाख, सरकारी फार्म पेखुबेला में 5.07 लाख और मृदा प्रशिक्षण प्रयोगशाला के लिए 7.20 लाख खर्च करके किसानों को लाभन्वित किया गया है।
बाक्स
फसलों की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए सभी वर्गों के किसानों को अनाजों, दालों, तिलहन व चारा फसलों के बीजों पर 50 प्रतिशत अनुदान जबकि आलू, अदरक व हल्दी के बीज पर 25 प्रतिशत अनुदान देकर प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा कीट ट्रैप, ल्योर, जैव नियंत्रक, जैविक कीटनाशकों व वानस्पतिक नियंत्रक इत्यादि पर सभी वर्गों के किसानों को 50 प्रतिशत प्रोत्साहन प्रदान करने का प्रस्ताव रखा है।
बाक्स
प्रयोगशालाओं का सशक्तिकरण
कृषि विभाग प्रदेश में 11 मृदा परीक्षण, 3 उर्वरक परीक्षण, 3 बीज परीक्षण, 2 जैव नियंत्रण, एक राज्य कीटनाशक परीक्षण और एक जैव उर्वरक उत्पादन व गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला संचालित कर रहा है। मृदा स्वास्थ्य मूल्यांकन के लिए कृषि विभाग किसानों को मृदा जांच निशुल्क उपलब्ध करा रहा है। कीट नियंत्रण की गैर रसायनिक विधियों को बढ़ावा देने के लिए जिला कांगड़ा और मंडी में दो जैव नियंत्रण प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं।
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बोले- जिले में बीजों और खाद पर विभाग की ओर से निर्धारित दरों पर मिलता है अनुदान
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। हिमाचल सरकार कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसमें मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना बहुत महत्वपूर्ण साबित हो रही है। सरकार इस योजना के जरिए किसानों को उन्नत खेती के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित कर रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में कृषि उत्पादकता में वृद्धि करना, किसानों का उच्च किस्म की गुणवत्ता वाले बीज, पौध संरक्षण सामग्री और खाद उपलब्ध करवाना है। उप निदेशक कृषि डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि मुख्यमंत्री सुक्खू का किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर है। उनके निर्देशानुसार मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना के अंतर्गत ऊना जिला में बीजों व खाद पर विभाग की ओर से निर्धारित दरों पर अनुदान दिया जा रहा है। इसी कड़ी में पेखुबेला के सरकारी फार्म और मृदा प्रशिक्षण प्रयोगशाला के लिए बजट का प्रावधान किया जाता है। वर्ष 2024-25 में योजना के तहत 3.08 करोड़ का प्रावधान किया गया था। 3.02 करोड़ खर्च करके 45 हज़ार 965 किसानों को लाभान्वित किया गया है। जिले में अब तक बीज वितरण के लिए 2.5 करोड़ रुपये और खाद वितरण में 40 लाख, सरकारी फार्म पेखुबेला में 5.07 लाख और मृदा प्रशिक्षण प्रयोगशाला के लिए 7.20 लाख खर्च करके किसानों को लाभन्वित किया गया है।
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फसलों की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए सभी वर्गों के किसानों को अनाजों, दालों, तिलहन व चारा फसलों के बीजों पर 50 प्रतिशत अनुदान जबकि आलू, अदरक व हल्दी के बीज पर 25 प्रतिशत अनुदान देकर प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा कीट ट्रैप, ल्योर, जैव नियंत्रक, जैविक कीटनाशकों व वानस्पतिक नियंत्रक इत्यादि पर सभी वर्गों के किसानों को 50 प्रतिशत प्रोत्साहन प्रदान करने का प्रस्ताव रखा है।
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प्रयोगशालाओं का सशक्तिकरण
कृषि विभाग प्रदेश में 11 मृदा परीक्षण, 3 उर्वरक परीक्षण, 3 बीज परीक्षण, 2 जैव नियंत्रण, एक राज्य कीटनाशक परीक्षण और एक जैव उर्वरक उत्पादन व गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला संचालित कर रहा है। मृदा स्वास्थ्य मूल्यांकन के लिए कृषि विभाग किसानों को मृदा जांच निशुल्क उपलब्ध करा रहा है। कीट नियंत्रण की गैर रसायनिक विधियों को बढ़ावा देने के लिए जिला कांगड़ा और मंडी में दो जैव नियंत्रण प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं।
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