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गो अभ्यारण केंद्र थानाखास में एक शेड में तंगहालत में बांधा 265 गोवंश
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बंगाणा (ऊना)। दिन मंगलवार, दोपहर 12.20 बजे। स्थान गो अभ्यारण केंद्र थाना खास। केंद्र में पशु चिकित्सकों की टीम गोवंश की जांच कर रही है। इस टीम में 7 से 8 लोग हैं। गो अभ्यारण के अंदर एक शेड में करीब 265 गोवंश को दोनों तरफ तंग हालत में बांधा गया है।
गायों को खाने के लिए सूखी तूड़ी डाली हुई थी। गायों को पीने के पानी की व्यवस्था शेड के समीप ही आयताकार हौदी में है। शेड के पास ही एक और शेड के निर्माण के लिए खुदाई चल रही है। गो अभ्यारण में कई पशु बेहद कमजोर दिखे। इसमें वृद्ध हो चुके गोवंश भी शामिल है। कमजोर और बूढ़े पशुओं के बारे में जब कमेटी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि विभाग की टीम सड़कों से बेसहारा पशुओं को उठाकर यहां लाती। इसीलिए गाशाला में करीब 50 फीसदी गोवंश बूढ़े हैं। कमजोर और बूढ़े पशुओं की हालत सुधारने के लिए पशुपालन विभाग और कमेटी द्वारा दो टाइम पशुओं को आटे के पेड़े दिए जाते हैं। पशुओं को हरा चारा उपलब्ध होने के बारे में पूछा गया तो विभाग ने तर्क दिया कि सुबह-शाम पशुओं को हरा चारा उपलब्ध करवाया जाता है।
कमजोर गायों पर रखी जा रही नजर
गो अभ्यारण कमेटी के सदस्य डॉ. सतेंद्र और अभिनव सोनी ने बताया कि गोशाला में कमजोर गायों के गले में पीली पट्टी बांधी गई है। इससे विभाग और गोशाला में कार्यरत कर्मचारी कमजोर पशुओं की भलीभांति देखभाल कर सकें। गोशाला में एकत्रित किए 70 पशुओं को कृमिनाशक दवाई पिलाई गई।
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1.32 लाख की सरकारी मदद तो चार लाख खर्च
गो अभ्यारण कमेटी ने बताया कि गो अभ्यारण केंद्र में विभाग ने 10 पशुओं को गोद लिया है। प्रदेश सरकार द्वारा इस गो अभ्यारण केंद्र के लिए 1.35 लाख की राशि प्रतिमाह भेजी जाती है। जबकि अभ्यारण केंद्र में चार लाख प्रतिमाह खर्च आता है, जो डोनेशन के तौर पर एकत्रित किया जा रहा है।
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गायों को खाने के लिए सूखी तूड़ी डाली हुई थी। गायों को पीने के पानी की व्यवस्था शेड के समीप ही आयताकार हौदी में है। शेड के पास ही एक और शेड के निर्माण के लिए खुदाई चल रही है। गो अभ्यारण में कई पशु बेहद कमजोर दिखे। इसमें वृद्ध हो चुके गोवंश भी शामिल है। कमजोर और बूढ़े पशुओं के बारे में जब कमेटी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि विभाग की टीम सड़कों से बेसहारा पशुओं को उठाकर यहां लाती। इसीलिए गाशाला में करीब 50 फीसदी गोवंश बूढ़े हैं। कमजोर और बूढ़े पशुओं की हालत सुधारने के लिए पशुपालन विभाग और कमेटी द्वारा दो टाइम पशुओं को आटे के पेड़े दिए जाते हैं। पशुओं को हरा चारा उपलब्ध होने के बारे में पूछा गया तो विभाग ने तर्क दिया कि सुबह-शाम पशुओं को हरा चारा उपलब्ध करवाया जाता है।
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कमजोर गायों पर रखी जा रही नजर
गो अभ्यारण कमेटी के सदस्य डॉ. सतेंद्र और अभिनव सोनी ने बताया कि गोशाला में कमजोर गायों के गले में पीली पट्टी बांधी गई है। इससे विभाग और गोशाला में कार्यरत कर्मचारी कमजोर पशुओं की भलीभांति देखभाल कर सकें। गोशाला में एकत्रित किए 70 पशुओं को कृमिनाशक दवाई पिलाई गई।
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1.32 लाख की सरकारी मदद तो चार लाख खर्च
गो अभ्यारण कमेटी ने बताया कि गो अभ्यारण केंद्र में विभाग ने 10 पशुओं को गोद लिया है। प्रदेश सरकार द्वारा इस गो अभ्यारण केंद्र के लिए 1.35 लाख की राशि प्रतिमाह भेजी जाती है। जबकि अभ्यारण केंद्र में चार लाख प्रतिमाह खर्च आता है, जो डोनेशन के तौर पर एकत्रित किया जा रहा है।