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एसएमसी अध्यापकों लिए बने विशेष पॉलिसी -यूनियन
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एसएमसी अध्यापकों लिए बनाई जाए विशेष पॉलिसी
शिक्षकों को अनुबंध पॉलिसी तहत नियमित करे सरकार : यूनियन
पंजीबी-उर्दू अध्यापकों की तर्ज पर दिया जाए लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
टाहलीवाल (ऊना)। जिला की एसएमसी टीचर यूनियन ने पंजाबी और उर्दू अध्यापकों की की तरह एसएमसी अध्यापकों को भी अनुबंध नीति में लाने की मांग उठाई है, ताकि एसएमसी अध्यापकों को भी राहत मिल सके।
जिला एसएमसी यूनियन के अध्यक्ष अनवर खान, उपप्रधान नवदीप कुमार, महासचिव चंद्र मोहन, कैशियर प्रवेश कुमारी, एडवाइजर मोनिका द्विवेदी, पंकज कुमार, सतीश कुमार, दिनेश कुमार, सुरिंद्र, मुकेश, सीमा, शिवानी, अंजना कुमारी और ज्योति समेत सभी अध्यापकों ने कहा की सरकार ने जिस तरह पंजाबी और उर्दू अध्यापकों के लिए कांट्रेक्ट पॉलिसी बनाई है। उसी तरह एसएमसी अध्यापकों के लिए भी पॉलिसी बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाबी और उर्दू अध्यापक 2012 में पीरियड आधार पर स्कूलों में रखे गए थे। उसी तरह 2012 में एसएमसी अध्यापक भी पीरियड आधार पर स्कूलों में रखे गए हैं। जब सरकार ने पंजाबी और उर्दू अध्यापकों के लिए अनुबंध पॉलिसी बना दी है तो सरकार एसएमसी अध्यापकों को भी इसी तर्ज पर पॉलिसी बनाएं। इससे एसएमसी अध्यापकों का भविष्य सुरक्षित हो सके। संघ ने बताया कि प्रदेश में 2630 एसएमसी शिक्षक सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। सभी एसएमसी अध्यापक आरएंडपी नियमानुसार आरटीई के लिए जरूरी सभी शैक्षणिक योग्यता को पूरा करते हैं। साथ ही सभी एसएमसी शिक्षकों की नियुक्तियां शिक्षा उपनिदेशकों की अनुमति पर उपमंडल अधिकारियों की अध्यक्षता में नियुक्त कमेेटी ने की हैं। उन्होंने बताया कि एसएमसी शिक्षक प्रदेश के दुर्गम स्कूलों में भेजे गए, जहां पर दो वर्ष से अध्यापकों के पद खाली थे। एसएमसी अध्यापक पिछले छह वर्षों से लगातार प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में कम वेतन और बिना किसी अवकाश के सेवाएं दे रहे हैं और कई स्कूल तो एसएमसी अध्यापकों के सहारे ही चल रहे हैं। एसएमसी अध्यापक स्थायी नीति बनाने की मांग को लेकर कई बार मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मिल चुके हैं, लेकिन नीति नहीं बनी है। हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला है। संघ ने सरकार से मांग की है कि सभी एसएमसी शिक्षकों को उनकी ज्वाइनिंग तिथि से सेवाकाल को जोड़कर अनुबंध पॉलिसी के तहत लाया जाए, ताकि एसएमसी अध्यापकों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
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शिक्षकों को अनुबंध पॉलिसी तहत नियमित करे सरकार : यूनियन
पंजीबी-उर्दू अध्यापकों की तर्ज पर दिया जाए लाभ
अमर उजाला ब्यूरो
टाहलीवाल (ऊना)। जिला की एसएमसी टीचर यूनियन ने पंजाबी और उर्दू अध्यापकों की की तरह एसएमसी अध्यापकों को भी अनुबंध नीति में लाने की मांग उठाई है, ताकि एसएमसी अध्यापकों को भी राहत मिल सके।
जिला एसएमसी यूनियन के अध्यक्ष अनवर खान, उपप्रधान नवदीप कुमार, महासचिव चंद्र मोहन, कैशियर प्रवेश कुमारी, एडवाइजर मोनिका द्विवेदी, पंकज कुमार, सतीश कुमार, दिनेश कुमार, सुरिंद्र, मुकेश, सीमा, शिवानी, अंजना कुमारी और ज्योति समेत सभी अध्यापकों ने कहा की सरकार ने जिस तरह पंजाबी और उर्दू अध्यापकों के लिए कांट्रेक्ट पॉलिसी बनाई है। उसी तरह एसएमसी अध्यापकों के लिए भी पॉलिसी बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाबी और उर्दू अध्यापक 2012 में पीरियड आधार पर स्कूलों में रखे गए थे। उसी तरह 2012 में एसएमसी अध्यापक भी पीरियड आधार पर स्कूलों में रखे गए हैं। जब सरकार ने पंजाबी और उर्दू अध्यापकों के लिए अनुबंध पॉलिसी बना दी है तो सरकार एसएमसी अध्यापकों को भी इसी तर्ज पर पॉलिसी बनाएं। इससे एसएमसी अध्यापकों का भविष्य सुरक्षित हो सके। संघ ने बताया कि प्रदेश में 2630 एसएमसी शिक्षक सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। सभी एसएमसी अध्यापक आरएंडपी नियमानुसार आरटीई के लिए जरूरी सभी शैक्षणिक योग्यता को पूरा करते हैं। साथ ही सभी एसएमसी शिक्षकों की नियुक्तियां शिक्षा उपनिदेशकों की अनुमति पर उपमंडल अधिकारियों की अध्यक्षता में नियुक्त कमेेटी ने की हैं। उन्होंने बताया कि एसएमसी शिक्षक प्रदेश के दुर्गम स्कूलों में भेजे गए, जहां पर दो वर्ष से अध्यापकों के पद खाली थे। एसएमसी अध्यापक पिछले छह वर्षों से लगातार प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में कम वेतन और बिना किसी अवकाश के सेवाएं दे रहे हैं और कई स्कूल तो एसएमसी अध्यापकों के सहारे ही चल रहे हैं। एसएमसी अध्यापक स्थायी नीति बनाने की मांग को लेकर कई बार मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मिल चुके हैं, लेकिन नीति नहीं बनी है। हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला है। संघ ने सरकार से मांग की है कि सभी एसएमसी शिक्षकों को उनकी ज्वाइनिंग तिथि से सेवाकाल को जोड़कर अनुबंध पॉलिसी के तहत लाया जाए, ताकि एसएमसी अध्यापकों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
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