{"_id":"5b152ee44f1c1b694d8b49db","slug":"161528114916-una-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रदुराचार के दोषी को 10 साल का कठोर कारावास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रदुराचार के दोषी को 10 साल का कठोर कारावास
Updated Mon, 04 Jun 2018 05:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दुराचार के दोषी को 10 साल कठोर कारावास
न्यायाधीश डीआर ठाकुर की अदालत ने सुनाया फैसला
सौतेले पिता ने बनाया था बच्ची को हवस का शिकार
जुर्माना अदा न करने पर 2 साल का अतिरिक्त कारावास
अमर उजाला ब्यूरो
ऊना।
विशेष न्यायाधीश डीआर ठाकुर की अदालत ने नाबालिग से दुराचार के आरोप में सौतेले पिता को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी को विभिन्न धाराओं के तहत 10-10 साल कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को दो साल का साधारण कारावास भुगतना होगा। मामले की पैरवी जिला न्यायवादी अशोक कुमार धीमान ने की। उन्होंने बताया कि 4 फरवरी 2017 को ऊना में रह रही 15 वर्षीय प्रवासी पीड़िता की माता ने अपनी बेटी के साथ दुराचार करने का आरोप जड़ते हुए अपने ही पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। उसने बताया कि उसकी पहली शादी से उसके चार बच्चे हैं। करीब 20 साल बाद उसने अपने पति को छोड़ कर दोषी के साथ शादी कर ली। पीड़िता की बहन और एक भाई अपने नाना-नानी के साथ रहते थे। जबकि खुद पीड़िता और उसका एक भाई अपनी माता और सौतेले पिता के साथ ऊना जिला में रह रहे थे। उनसे बताया कि साल 2016 में वह नवरात्रि पूजन के लिए यूपी स्थित अपने पैतृक गांव गई हुई थी। इस दौरान पीड़िता के सौतेले पिता ने उसे हवस का शिकार बना डाला। मां के वापस आने पर पीड़िता ने पेट में दर्द होने की शिकायत की। बेटी को उपचार दिलाने के लिए मां उसे अस्पताल ले आई। जहां मेडिकल में उसके साथ दुराचार होने की बात सामने आई। नाबालिगा की माता ने ऊना थाना पहुंच घटना के संबंध में एफआईआर दर्ज करवाई। एएसआई गुरदीप सिंह ने मामले की जांच की। डीए अशोक कुमार धीमान ने बताया कि स्पेशल जज डीआर ठाकुर ने मामले में सभी गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को अपनी सौतेली बेटी के साथ दुराचार करने का दोषी करार देते हुए धारा 376 और पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 10-10 साल का कठोर कारावास भुगतने, 2-2 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दो साल का साधारण कारावास भुगतना होगा।
विज्ञापन
न्यायाधीश डीआर ठाकुर की अदालत ने सुनाया फैसला
सौतेले पिता ने बनाया था बच्ची को हवस का शिकार
जुर्माना अदा न करने पर 2 साल का अतिरिक्त कारावास
अमर उजाला ब्यूरो
ऊना।
विशेष न्यायाधीश डीआर ठाकुर की अदालत ने नाबालिग से दुराचार के आरोप में सौतेले पिता को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी को विभिन्न धाराओं के तहत 10-10 साल कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दोषी को दो साल का साधारण कारावास भुगतना होगा। मामले की पैरवी जिला न्यायवादी अशोक कुमार धीमान ने की। उन्होंने बताया कि 4 फरवरी 2017 को ऊना में रह रही 15 वर्षीय प्रवासी पीड़िता की माता ने अपनी बेटी के साथ दुराचार करने का आरोप जड़ते हुए अपने ही पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। उसने बताया कि उसकी पहली शादी से उसके चार बच्चे हैं। करीब 20 साल बाद उसने अपने पति को छोड़ कर दोषी के साथ शादी कर ली। पीड़िता की बहन और एक भाई अपने नाना-नानी के साथ रहते थे। जबकि खुद पीड़िता और उसका एक भाई अपनी माता और सौतेले पिता के साथ ऊना जिला में रह रहे थे। उनसे बताया कि साल 2016 में वह नवरात्रि पूजन के लिए यूपी स्थित अपने पैतृक गांव गई हुई थी। इस दौरान पीड़िता के सौतेले पिता ने उसे हवस का शिकार बना डाला। मां के वापस आने पर पीड़िता ने पेट में दर्द होने की शिकायत की। बेटी को उपचार दिलाने के लिए मां उसे अस्पताल ले आई। जहां मेडिकल में उसके साथ दुराचार होने की बात सामने आई। नाबालिगा की माता ने ऊना थाना पहुंच घटना के संबंध में एफआईआर दर्ज करवाई। एएसआई गुरदीप सिंह ने मामले की जांच की। डीए अशोक कुमार धीमान ने बताया कि स्पेशल जज डीआर ठाकुर ने मामले में सभी गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को अपनी सौतेली बेटी के साथ दुराचार करने का दोषी करार देते हुए धारा 376 और पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 10-10 साल का कठोर कारावास भुगतने, 2-2 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने की सूरत में दो साल का साधारण कारावास भुगतना होगा।