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राधा नाम की लगाई फुलवारी पर झूमे श्रद्धालु
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अमर उजाला ब्यूरो
दौलतपुर चौक (ऊना)। क्षेत्र के डंगोह खुर्द (पिरथीपुर) में श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के दूसरे दिन कथावाचक आचार्य सुरेंद्र शास्त्री ने भक्तों को कथा का रसपान करवाया। उन्होंने राजा परीक्षित का जन्म, भगवान शुकदेव का जन्म, पांडवों एवं भीष्म पितामह के प्रसंग के अलावा भगवान शंकर द्वारा मां पार्वती को अमर कथा सुनाने का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि भगवान शंकर जब मां पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे, उस समय व्यास मंच के पीछे अंडे के रूप में शुकदेव जी विराजमान थे और कथा श्रवण कर रहे थे। भोले जी को पता लगने पर वे क्रोधित होकर उनके पीछे त्रिशूल लेकर भागे और कैलाश पर्वत के नीचे बद्रीनाथ धाम में वेदव्यास जी की धर्मपत्नी विटका देवी के गर्भ में प्रवेश कर गए। बारह वर्ष तक उनके गर्भ में ही रहे और बाहर आते ही संन्यास के लिए चले गए। अर्थात कथाव्यास के सन्मुख बैठकर कथा सुनने ही धर्मलाभ की प्राप्ति होती है।
उन्होंने कहा कि कभी भी कथाव्यास के पीछे बैठकर कथा नहीं सुननी चाहिए। इस दौरान कथावाचक ने लेेले लेले रे हरि का नाम.... राधा नाम की लगाई फुलवारी, पत्ते-पत्ते पर श्याम बोलता, राधे-राधे बोल आदि भजनों के साथ खूब समा बांधा। श्रद्धालु प्रभु भक्ति में जमकर नाचे। इस मौके पर रमा डोगरा, राजेश डोगरा, बृजेश डोगरा, गगन डोगरा, वरुण, कांता डोगरा, निशा, हिमानी, ममता, सीमा, प्रियंका, रितु, प्रवीण, अंजू, रुपाली के अलावा आस-पास क्षेत्र के धर्म प्रेमी सहित कई श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए उपस्थित रहे।
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दौलतपुर चौक (ऊना)। क्षेत्र के डंगोह खुर्द (पिरथीपुर) में श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के दूसरे दिन कथावाचक आचार्य सुरेंद्र शास्त्री ने भक्तों को कथा का रसपान करवाया। उन्होंने राजा परीक्षित का जन्म, भगवान शुकदेव का जन्म, पांडवों एवं भीष्म पितामह के प्रसंग के अलावा भगवान शंकर द्वारा मां पार्वती को अमर कथा सुनाने का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि भगवान शंकर जब मां पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे, उस समय व्यास मंच के पीछे अंडे के रूप में शुकदेव जी विराजमान थे और कथा श्रवण कर रहे थे। भोले जी को पता लगने पर वे क्रोधित होकर उनके पीछे त्रिशूल लेकर भागे और कैलाश पर्वत के नीचे बद्रीनाथ धाम में वेदव्यास जी की धर्मपत्नी विटका देवी के गर्भ में प्रवेश कर गए। बारह वर्ष तक उनके गर्भ में ही रहे और बाहर आते ही संन्यास के लिए चले गए। अर्थात कथाव्यास के सन्मुख बैठकर कथा सुनने ही धर्मलाभ की प्राप्ति होती है।
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उन्होंने कहा कि कभी भी कथाव्यास के पीछे बैठकर कथा नहीं सुननी चाहिए। इस दौरान कथावाचक ने लेेले लेले रे हरि का नाम.... राधा नाम की लगाई फुलवारी, पत्ते-पत्ते पर श्याम बोलता, राधे-राधे बोल आदि भजनों के साथ खूब समा बांधा। श्रद्धालु प्रभु भक्ति में जमकर नाचे। इस मौके पर रमा डोगरा, राजेश डोगरा, बृजेश डोगरा, गगन डोगरा, वरुण, कांता डोगरा, निशा, हिमानी, ममता, सीमा, प्रियंका, रितु, प्रवीण, अंजू, रुपाली के अलावा आस-पास क्षेत्र के धर्म प्रेमी सहित कई श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए उपस्थित रहे।
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