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ां का आंचल मिलने से पहले उठा साया
Updated Fri, 07 Jul 2017 09:59 PM IST
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ऊना। क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में शुक्रवार को प्रसूता की मौत ने दो परिवारों गहरा घाव दे दिया। एक परिवार वह जिसके घर आंगन में वह खेल कर बड़ी हुई और दूसरा परिवार वह जहां डोली में बैठ कर आई उसे ही अपना घर संसार बनाया। इससे भी बढ़ कर गहरा घाव मिला उस नवजात को जिसके दुनिया में पैर रखते ही सिर से मां का साया उठ गया। उस नन्हीं सी जान को मां का आंचल नसीब होने से पहले ही कथित लापरवाही ने मां को छीन लिया। जिस शिशु को नौ माह तक अपनी कोख में रखा और हर दिन, हर घड़ी उसे सुरक्षित रखने के लिए सब कुछ भुला दिया। उस शिशु को सोनिका अपने दूध की एक बूंद तक न पिला सकी। क्षेत्रीय अस्पताल ऊना या जिला के अन्य सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई माओं और उनकी कोख में पल रहे शिशुओं की जान ली है। करीब तीन साल पहले भद्रकाली की एक गर्भवती महिला भी कुछ इसी तरह की लापरवाही का शिकार हुई थी। जब उसने बेटे को जन्म देते ही दुनिया को अलविदा कह दिया था। प्रसव ऐसे सरकारी अस्पताल में करवाया गया था जहां स्त्री रोग विशेषज्ञ की सुविधा ही नहीं थी। लेकिन शुक्रवार को हुए घटना क्रम में सोनिका विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में थी। लेकिन करीब दो माह पूर्व हरोली के पोलियां बीत की गर्भवती और उसका अजन्मा शिशु वशिेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में ही मौत का शिकार हो गए। गर्भवती को भी समय पर गंभीरता से नहीं लिया गया। जिसके चलते उसने अपने अजन्मे बच्चे के साथ इस दुनिया को अलविदा कह दिया। शुक्रवार को लापरवाही की बलि चढ़ी सोनिका की मां संदेश कुमारी की मानें तो ऑपरेशन थिएटर में दर्द से तड़प रही सोनिका को विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भी समय रहते नहीं देखा। कई बार मदद मांगने के बाद भी उसे नहीं देखा गया। सोनिका तो इस दुनिया को छोड़ कर चली गई, लेकिन क्या अब भी स्वास्थ्य विभाग इसी लापरवाही से काम करेगा। समाज के कई वर्गों में लंबे अरसे से स्वास्थ्य विभाग की बदहाली चर्चाओं का विषय बनी हुई है। लेकिन अब धड़ाधड़ हो रहे ऐसे मामलों से समाज में स्वास्थ्य विभाग के प्रति विश्वास टूट रहा है। बेटी की मौत पर जहां मां का बुरा हाल था, वहीं मां को खो चुके बच्चे को देख कर मौके खड़े हर किसी इंसान का दिल पसीज गया।
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