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Una News: लोक विद्या गतिविधियां करवाने में 12% सरकारी स्कूल फेल
Mon, 27 Jul 2026 11:01 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Mon, 27 Jul 2026 11:01 AM IST
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ऊना। सरकारी स्कूलों में केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि कौशल विकास और लोक विद्या गतिविधियों के संचालन में भी कई कमियां सामने आई हैं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की सोशल ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिले के 12 फीसदी स्कूलों में लोक विद्या गतिविधियां नहीं चल रहीं, 15 फीसदी में प्लेसमेंट नहीं हुई और 17 फीसदी स्कूलों के विद्यार्थी स्वरोजगार से नहीं जुड़ पाए।
समग्र शिक्षा एवं शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के प्रावधानों के तहत हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) की सोशल ऑडिट टीम ने सोशल ऑडिट कर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
सोशल ऑडिट के प्रधान अन्वेषक डॉ. रणधीर सिंह रांटा ने बताया कि कुल 752 सरकारी विद्यालयों में से 20 प्रतिशत विद्यालयों का यादृच्छिक चयन कर मूल्यांकन किया गया। यह ऑडिट छह प्रमुख मानकों के आधार पर किया गया, जिनमें आधारभूत संरचना, शिक्षक व्यवस्था, विद्यार्थी सुविधाएं, प्रशासन एवं वित्त, सुरक्षा एवं संरक्षा तथा व्यावसायिक शिक्षा शामिल रहे।
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10 प्रतिशत विद्यालयों में आईटीआई डिप्लोमा के लिए विद्यार्थी उपलब्ध नहीं
10 प्रतिशत विद्यालयों में आईटीआई डिप्लोमा के लिए विद्यार्थी उपलब्ध नहीं हैं, जबकि 14 प्रतिशत विद्यालयों में कक्षा 12 के बाद वी-वॉक विकल्प के लिए विद्यार्थी उपलब्ध नहीं हैं। जनसुनवाई के दौरान सोशल ऑडिट टीम ने स्पष्ट किया कि सोशल ऑडिट का उद्देश्य केवल कमियों को उजागर करना नहीं बल्कि विद्यालयों में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुधार के अवसर उपलब्ध करवाना है।
हर महीने के अंतिम शनिवार को बैग फ्री डे घोषित किया गया है। इस दिवस स्कूल अपने आपने स्तर पर किसी भी तरह की गतिविधियों को कर सकते हैं। अगर कहीं पर कोई स्कूल लोक विद्या गतिविधियों का संचालन नहीं कर रहे हैं तो विभाग निरीक्षण के दौरान ऐसे स्कूल मुखियों से जबाव तलब करेगा। सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि हर गतिविधि का स्कूलों में समय समय पर संचालन करवाने सुनिश्चित करे। सोम लाल धीमान, शिक्षा विभाग ऊना उपनिदेशक
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समग्र शिक्षा एवं शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के प्रावधानों के तहत हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) की सोशल ऑडिट टीम ने सोशल ऑडिट कर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
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सोशल ऑडिट के प्रधान अन्वेषक डॉ. रणधीर सिंह रांटा ने बताया कि कुल 752 सरकारी विद्यालयों में से 20 प्रतिशत विद्यालयों का यादृच्छिक चयन कर मूल्यांकन किया गया। यह ऑडिट छह प्रमुख मानकों के आधार पर किया गया, जिनमें आधारभूत संरचना, शिक्षक व्यवस्था, विद्यार्थी सुविधाएं, प्रशासन एवं वित्त, सुरक्षा एवं संरक्षा तथा व्यावसायिक शिक्षा शामिल रहे।
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10 प्रतिशत विद्यालयों में आईटीआई डिप्लोमा के लिए विद्यार्थी उपलब्ध नहीं
10 प्रतिशत विद्यालयों में आईटीआई डिप्लोमा के लिए विद्यार्थी उपलब्ध नहीं हैं, जबकि 14 प्रतिशत विद्यालयों में कक्षा 12 के बाद वी-वॉक विकल्प के लिए विद्यार्थी उपलब्ध नहीं हैं। जनसुनवाई के दौरान सोशल ऑडिट टीम ने स्पष्ट किया कि सोशल ऑडिट का उद्देश्य केवल कमियों को उजागर करना नहीं बल्कि विद्यालयों में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुधार के अवसर उपलब्ध करवाना है।
हर महीने के अंतिम शनिवार को बैग फ्री डे घोषित किया गया है। इस दिवस स्कूल अपने आपने स्तर पर किसी भी तरह की गतिविधियों को कर सकते हैं। अगर कहीं पर कोई स्कूल लोक विद्या गतिविधियों का संचालन नहीं कर रहे हैं तो विभाग निरीक्षण के दौरान ऐसे स्कूल मुखियों से जबाव तलब करेगा। सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि हर गतिविधि का स्कूलों में समय समय पर संचालन करवाने सुनिश्चित करे। सोम लाल धीमान, शिक्षा विभाग ऊना उपनिदेशक