Medicinal Mushrooms: औषधीय मशरूम की ओर बढ़ा रुझान, एक लाख रुपये किलो तक दाम; निदेशालय दे रहा प्रशिक्षण
युवाओं का औषधीय मशरूम उत्पादन की तरफ रुझान ज्यादा बढ़ा है। इसके लिए खुंब अनुसंधान निदेशालय की ओर से प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर...
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देश भर में बटन, ढींगरी के साथ औषधीय मशरूम की तरफ खुंभ उत्पादकों का रुझान बढ़ रहा है। औषधीय मशरूम का प्रयोग सिर्फ दवाओं के लिए ही किया जाता। जबकि बटन, ढींगरी मशरूम का भोजन के लिए प्रयोग होता है। युवाओं का औषधीय मशरूम उत्पादन की तरफ रुझान ज्यादा बढ़ा है। इसके लिए खुंब अनुसंधान निदेशालय की ओर से प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। कोर्डीसीपस, गेनोडोरमा, हेरेशियम, शिटाके समेत टर्कीटेल मशरूम को तैयार कर अब इसका प्रशिक्षण भी दे रही है। इसमें 500 से अधिक उत्पादकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसमें सबसे अधिक मांग कोर्डीसीपस (कीड़ा-जड़ी) मशरूम की है।
इसकी कीमत बाजार में एक लाख रुपये प्रतिकिलो तक है। इतनी महंगी मशरूम औषधीय गुणों से भरपूर है। स्टेमिना और इम्यून सिस्टम मजबूत रखने व दवाई के तौर पर इस्तेमाल होने वाली इस मशरूम का भारत के एकमात्र खुंब अनुसंधान केंद्र सोलन में शोध किया है। स्टेमिना एनहेंसर के रूप में इस्तेमाल होने वाली कॉर्डिसेप्स मिलिटेयर्स मशरूम का चीन में बहुतायत में उत्पादन होता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं समेत ओलंपिक आदि की तैयारी करने वाले चीन के एथलीट इसका सेवन करते हैं। इसके अलावा दिमागी नसों को ताकत देने वाली हिरेशियम मशरूम के सफल परीक्षण के बाद इसका प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। कैंसर से लड़ने वाली शिटाके मशरूम को दुनिया भर में भारत इस औषधीय मशरूम को तैयार करने में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। इसका अधिकर प्रयोग कॉफी समेत दवाओं में होता है। स्वाद में बेहद कड़वी होने से दवा में इसका प्रयोग कैप्सूल में किया जाता है। सूखी मशरूम के 5,000 रुपये प्रति किलो दाम मिलते हैं। मशरूम उगाने के बाद सीधे दवा कंपनियों को इसे सप्लाई किया जाता है।
गैनोडर्मा मशरूम रोग प्रतिरोधक गुणों से भरपूर है। यह हृदय रोग, हैपेटाइटिस, अर्थराइटस, थकान, रक्तचाप और रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने सहित कई रोगों के उपचार में सहायक होता है। स्तन, फेफड़े, प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल कैंसर को रोकने में सहायक टर्की टेल मशरूम को तैयार करने में भी डीएमआर ने हाल में सफल शोध किया है। इस मशरूम को लकड़ी के बुरादे पर भी तैयार किया गया है।
इससे पहले विशेषज्ञ यह मशरूम गेहूं के भूसे पर तैयार कर रहे थे। यह भी एक औषधीय मशरूम है। इसमें एंटी बैक्टीरियल के साथ साथ एंटी ऑक्सीडेंट भी हैं। इसके सेवन से कैंसर रोगी को कीमोथैरेपी के कारण होने वाली कमजोरी से निजात मिलेगी। इस मशरूम का प्रशिक्षण भी डीएमआर ने देना शुरू कर दिया है।
कोर्डिसेप समेत अन्य मशरूम पर दिया जा रहा प्रशिक्षण
मशरूम अनुसंधान एवं निदेशालय के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने बताया कि डीएमआर में समय-समय पर कोर्डिसेप सहित अन्य मशरूम के उत्पादन पर प्रशिक्षण दे रहा है। पिछले एक वर्ष में खाने वाली मशरूम के साथ औषधीय मशरूम की तरफ भी उत्पादकों का रुझान बढ़ा है, जिसमें अधिकतर युवा वर्ग है। डीएमआर मशरूम की नई किस्म तैयार कर उसके लिए किसानों को भी प्रशिक्षण दे रहा है। औषधीय मशरूम में करीब 500 को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिसमें कोर्डिसेप के अधिक ग्रोवर रहे हैं।