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स्कूल लेक्चरर की दौड़ से हजारों शिक्षक बाहर
अमर उजाला चंडीगढ़
Updated Sun, 10 Nov 2013 12:49 PM IST
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हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में तैनात हजारों टीजीटी स्कूल लेक्चरर पदोन्नति की दौड़ से बाहर हो गए हैं।
उच्च शिक्षा विभाग ने लेक्चरर पद पर पदोन्नति के लिए स्नातकोत्तर डिग्री और बीएड में 45 फीसदी न्यूनतम अंकों की शर्त लगा दी है।
प्रदेश में पदोन्नतियों से रोक हटने के बाद प्रमोशन के लिए वरिष्ठता सूची तैयारी होने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
इसमें स्कूलों और जिलों से उन्हीं टीजीटी का ब्योरा मांगा जा रहा है, जिनके न्यूनतम अंक 45 फीसदी से ज्यादा हैं।
बीएड और पीजी में इससे कम अंक हासिल करने वाले शिक्षकों का नाम वरिष्ठता सूची से बाहर किया जा सकता है। विभाग की इस कसरत का शिक्षक यूनियनों ने विरोध तो शुरू किया है, लेकिन राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।
सूत्र बताते हैं कि शिक्षा विभाग में 45 फीसदी से कम अंकों में पीजी डिग्री और बीएड करने वाले शिक्षकों को स्कूल लेक्चरर की पदोन्नति से महरूम रखा जाएगा।
विभाग ने 2010 में पदोन्नति नियमों में संशोधन कर न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को 45 फीसदी किया था।
इसके बाद 2011 में फिर से संशोधन कर 50 फीसदी कर दिया था।
2012 में विभाग ने 19 अगस्त 2011 से पहले लगे शिक्षकों को बिना शर्त पदोन्नत करने का फैसला लिया था।
इसके बावजूद अब विभाग ने 2010 के नियमों के आधार पर पदोन्नति देने के फैसले से हजारों शिक्षकों के सपने टूटने की कगार पर हैं।
प्रदेश में बीस हजार से ज्यादा टीजीटी शिक्षक हैं, इनमें से 500 से ज्यादा को पदोन्नत कर पीजीटी बनाया जाना है।
लेकिन नए नियमों के चलते हजारों शिक्षकों का स्कूल लेक्चरर बनने का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है।
यूनियन ने प्रधान सचिव के समक्ष उठाया मामला
हिमाचल राजकीय शिक्षक यूनियन के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने विभाग के इस फैसले का विरोध किया है।
उन्होंने कहा कि इस फैसले को पुराने शिक्षकों पर लागू करना गलत है। उन्होंने बताया कि इस मांग को प्रधान सचिव शिक्षा आरडी धीमान के समक्ष रखा गया है।
इसमें इस शर्त को हटाकर पुराने शिक्षकों को बिना किसी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के प्रमोशन देने की मांग की गई है।
भर्ती एवं पदोन्नति नियमों का मामला सरकार के समक्ष उठाया गया है। वर्तमान में 45 फीसदी अंक की शर्त के आधार पर पैनल तैयार किया जा रहा है।
- दिनकर बुराथोकी, निदेशक, उच्च शिक्षा
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उच्च शिक्षा विभाग ने लेक्चरर पद पर पदोन्नति के लिए स्नातकोत्तर डिग्री और बीएड में 45 फीसदी न्यूनतम अंकों की शर्त लगा दी है।
प्रदेश में पदोन्नतियों से रोक हटने के बाद प्रमोशन के लिए वरिष्ठता सूची तैयारी होने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
इसमें स्कूलों और जिलों से उन्हीं टीजीटी का ब्योरा मांगा जा रहा है, जिनके न्यूनतम अंक 45 फीसदी से ज्यादा हैं।
बीएड और पीजी में इससे कम अंक हासिल करने वाले शिक्षकों का नाम वरिष्ठता सूची से बाहर किया जा सकता है। विभाग की इस कसरत का शिक्षक यूनियनों ने विरोध तो शुरू किया है, लेकिन राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।
सूत्र बताते हैं कि शिक्षा विभाग में 45 फीसदी से कम अंकों में पीजी डिग्री और बीएड करने वाले शिक्षकों को स्कूल लेक्चरर की पदोन्नति से महरूम रखा जाएगा।
विभाग ने 2010 में पदोन्नति नियमों में संशोधन कर न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को 45 फीसदी किया था।
इसके बाद 2011 में फिर से संशोधन कर 50 फीसदी कर दिया था।
2012 में विभाग ने 19 अगस्त 2011 से पहले लगे शिक्षकों को बिना शर्त पदोन्नत करने का फैसला लिया था।
इसके बावजूद अब विभाग ने 2010 के नियमों के आधार पर पदोन्नति देने के फैसले से हजारों शिक्षकों के सपने टूटने की कगार पर हैं।
प्रदेश में बीस हजार से ज्यादा टीजीटी शिक्षक हैं, इनमें से 500 से ज्यादा को पदोन्नत कर पीजीटी बनाया जाना है।
लेकिन नए नियमों के चलते हजारों शिक्षकों का स्कूल लेक्चरर बनने का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है।
यूनियन ने प्रधान सचिव के समक्ष उठाया मामला
हिमाचल राजकीय शिक्षक यूनियन के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने विभाग के इस फैसले का विरोध किया है।
उन्होंने कहा कि इस फैसले को पुराने शिक्षकों पर लागू करना गलत है। उन्होंने बताया कि इस मांग को प्रधान सचिव शिक्षा आरडी धीमान के समक्ष रखा गया है।
इसमें इस शर्त को हटाकर पुराने शिक्षकों को बिना किसी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के प्रमोशन देने की मांग की गई है।
भर्ती एवं पदोन्नति नियमों का मामला सरकार के समक्ष उठाया गया है। वर्तमान में 45 फीसदी अंक की शर्त के आधार पर पैनल तैयार किया जा रहा है।
- दिनकर बुराथोकी, निदेशक, उच्च शिक्षा