टीचर्स डे : पवन की लिखीं रचनाएं पाठ्यक्रम में पढ़े रहे बच्चे, सुरेंद्र बाल बचत बैंक से लेकर ईमानदारी की दुकान
Teachers Day Special : शिक्षक दिवस पर मंडी के महादेव गांव के शिक्षक पवन चौहान और जनजातीय क्षेत्र पांगी स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला में 10 वर्षों से सेवारत शिक्षक सुरेंद्र कुमार शर्मा की कहानी विस्तार से जानें...
विस्तार
मंडी के महादेव गांव के शिक्षक पवन चौहान की लिखीं रचनाएं देश पढ़ रहा है। उनकी लिखी बाल कविताएं, बाल कहानियां पाठ्यक्रम में शामिल हुई हैं। उन्होंने पठन-पाठन और बच्चों की रचनात्मकता को मंच देने के लिए दीवार पत्रिका के रूप में अनोखा तरीका अपनाया है। दीवार पत्रिका बच्चों को अपनी अभिव्यक्ति का एक शानदार मंच प्रदान करती है। पवन चौहान कविता, कहानी, बाल कहानी, फीचर लेखन में सक्रिय हैं। उनके नाम कई उपलब्धियां हैं। हिमाचली बाल साहित्य में इनका कार्य उल्लेखनीय है। उनकी कई रचनाएं देश के विभिन्न स्कूली तथा विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। हिमाचल प्रदेश व महाराष्ट्र के सरकारी पाठ्यक्रम के अलावा वीवा एडुकेशन, न्यू सरस्वती हाउस के सीबीएसई और आईसीएसई संबद्ध निजी विद्यालयों के साथ लीड के पाठ्यक्रम में भी शामिल हुई है। महात्मा गांधी विश्वविद्यालय केरल तथा राष्ट्रसंत तुकाड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर के पाठ्यक्रम में यात्रा संस्मरण शामिल है।
बाल बचत बैंक से लेकर ईमानदारी की दुकान
जन्म के छह माह बाद पिता झांफर राम की मृत्यु होने पर मां टेकी देवी के सिर ही छह भाई-बहनों की परवरिश का जिम्मा आन पड़ा। घर संभालने के अलावा उन्होंने खेतीबाड़ी कर सभी भाई-बहनों को पढ़ाया लिखाया। उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि प्रदेश में पहली बार स्कूल प्रबंधन समिति के तहत जनजातीय क्षेत्र पांगी स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला में 10 वर्षों से सेवारत शिक्षक सुरेंद्र कुमार शर्मा को राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान मिलेगा। एसएमसी पर तैनात शिक्षक सुरेंद्र कुमार शर्मा ने विद्यालय में बहुत सारे नवाचार किए जैसे बाल बचत बैंक, बाल संसद का गठन, ईमानदारी की दुकान, बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा प्रदान करना, इसके अतिरिक्त बच्चों का नवोदय विद्यालय और आवासीय आदर्श एकलव्य विद्यालय के लिए चयन इत्यादि शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर उन्हें राज्यस्तरीय शिक्षक पुरस्कार से पीटर हाॅफ में शिक्षक दिवस पर राज्यपाल नवाजेंगे। इससे पूर्व राज्य स्तरीय जनजातीय दिवस के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।
विज्ञान शिक्षक उमेश कुमार शर्मा वर्तमान में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मोरला में सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। कोराना काल में उमेश कुमार ने छठी से आठवीं कक्षा के बच्चों के लिए विज्ञान की 500 वीडियो, 500 वर्कशीट और 90 व्हाट्सएप क्विज तैयार कर बच्चों को पढ़ाई के साथ जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाई। लाहौल और किन्नौर जिले के बच्चों के लिए विज्ञान की किताब भी तैयार की हैं। राष्ट्रीय स्तर की नेशनल मीन्स कम मेरिट स्काॅलरशिप के लिए बच्चों की निशुल्क ऑनलाइन कोचिंग करवाते है। चार बार बाल विज्ञान मेले में राज्य स्तर पर रिसोर्स पर्सन (को-आर्डिनेटर) के रूप में भूमिका भी निभाई है। सज्याओपिपलू में उनके कार्यकाल में एक साथ छह विद्यार्थियों का चयन एनएमएमएस स्काॅलरशिप के लिए हुआ है। शिक्षा में शून्य निवेश नवाचार के लिए 2019 में उमेश कुमार को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने सम्मानित भी किया है।