{"_id":"689ecf481b0614cc6f0d46d8","slug":"swatantrata-ke-prahari-netaji-took-health-benefits-in-dalhousie-stepwell-drink-water-still-present-2025-08-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वतंत्रता के प्रहरी: नेताजी ने डलहौजी में लिया था स्वास्थ्य लाभ; जहां से पीते थे पानी वो बावड़ी आज भी मौजूद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वतंत्रता के प्रहरी: नेताजी ने डलहौजी में लिया था स्वास्थ्य लाभ; जहां से पीते थे पानी वो बावड़ी आज भी मौजूद
Fri, 15 Aug 2025 11:40 AM IST
अंकेश डोगरा
विशाल आनंद, डलहौजी (चंबा)।
विशाल आनंद, डलहौजी (चंबा)।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Fri, 15 Aug 2025 11:40 AM IST
सार
वर्ष 1937 में आजादी के महानायक सुभाष चंद्र बोस ने डलहौजी में लगभग सात महीने का समय बिताया और स्वास्थ्य लाभ लिया था। जहां रोजाना सुभाष चंद्र बोस बावड़ी का पानी पीते थे वो आज भी मौजूद है।
विज्ञापन
डलहौजी में दोस्त डॉ. धर्मवीर के साथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस। फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पर्यटन नगरी डलहौजी से आजादी के महानायक सुभाष चंद्र बोस का गहरा नाता रहा है। वर्ष 1937 में उन्होंने डलहौजी में लगभग सात महीने का समय बिताया और स्वास्थ्य लाभ लिया था। यहां चौक का नाम सुभाष चौक रखा गया है। वहां पर उनकी प्रतिमा भी स्थापित है। वहीं, गांधी चौक के नजदीक सुभाष बावली नामक पर्यटन केंद्र स्थल है, जहां रोजाना सुभाष चंद्र बोस बावड़ी का पानी पीते थे।
विज्ञापन
नेता जी 1937 में जब ब्रिटिश हुकूमत से आजादी की लड़ाई के चलते जेल में बंद थे तो उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा था। उनके स्वास्थ्य को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने उन्हें पैरोल पर रिहा किया और वह स्वास्थ्य लाभ के लिए डलहौजी आ गए। जब यह बात उनके दोस्त डॉ. धर्मवीर को पता चली तो उन्होंने अपने बंगले कायनांस में ठहरने का उनसे आग्रह किया। जहां पर नेता जी पानी पीते थे, वह सुभाष बावड़ी के नाम पर गांधी चौक के पास जंदरीघाट रोड पर आज भी स्थित है।
विज्ञापन
डलहौजी के खुशनुमा मौसम में स्वास्थ्य लाभ लेकर नेता जी सात माह के बाद लौटे और फिर से आजादी की जंग में कूद पड़े। जहां पर वह ठहरे थे वह कायनांस बंगला आज भी मौजूद है, मगर निजी बंगला होने के कारण यहां कोई जा नहीं सकता। एक सरकारी स्कूल का नाम भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर रखा गया है।
विज्ञापन