World Mental Health Day: कार्यालयों में काम के बोझ से लोगों में बढ़ रहा तनाव, IGMC में रोजाना आ रहे 30 मरीज
आईजीएमसी शिमला के मनोचिकित्सा विभाग की ओपीडी में आने वाले मरीजों की जांच में पाया गया है कि सरकारी और निजी क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों पर काम का बोझ बढ़ गया है। इसका असर उनकी मानसिक स्थिति पर भी पड़ रहा है।
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सरकारी और निजी क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों पर काम का बोझ बढ़ गया है। इसका असर उनकी मानसिक स्थिति पर भी पड़ रहा है। यही वजह है कि वह अवसाद का शिकार हो रहे हैं। आईजीएमसी शिमला के मनोचिकित्सा विभाग की ओपीडी में आने वाले मरीजों की जांच में यह तथ्य सामने आए हैं। चिकित्सकों के मुताबिक कार्यालय में काम का बोझ और नौकरी को लेकर असुरक्षा कर्मचारियों को मानसिक तनाव की ओर धकेल रही हैं।
आईजीएमसी के मनोचिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. देवेश शर्मा ने यह जानकारी दी। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में रोजाना औसतन 100 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें 25 से 30 मरीज ऐसे होते हैं जोकि कार्यालयों में काम करते हैं। दफ्तरों में में होने वाली पॉलिटिक्स के कारण या ऊंचे ओहदों पर बैठे बॉस के इन कर्मियों के साथ सामान्य व्यवहार न होने से वह मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं। इसमें 20 से 40 साल के लोगों की संख्या अधिक है। चिकित्सकों का कहना है कि कार्यस्थल पर कर्मचारियों को बेहतर वातावरण उपलब्ध करवाकर उनके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।
काम पर भी पड़ता है प्रभाव
डॉक्टरों का कहना है कि अगर कार्यालयों में काम करने वाले पेशेवर मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं रहेंगे तो उनके काम पर भी प्रभाव पड़ेगा। डॉक्टरों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति इस तरह की परिस्थिति से गुजरता है तो उसे इस बारे में अन्य साथियों से चर्चा करनी चाहिए। लिहाजा एक स्वस्थ बातचीत के जरिये इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। इससे होने वाले दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है।
कैसे करें बचाव
आईजीएमसी के मनोचिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. देवेश शर्मा ने बताया कि कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों की मानसिक स्वास्थ्य को लेकर स्क्रीनिंग करवानी चाहिए। इसके अलावा एक कमेटी भी बनाई जानी चाहिए जोकि ऐसे कर्मचारियों पर नजर रखें जोकि इस तरह की समस्या के बारे में बातचीत करते हैं। कार्यालयों में माहौल सही होगा तो काम भी सही होगा।