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Solan News: राजस्व अधिनियम को जबरन थोपा तो करेंगे आंदोलन
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संयुक्त पटवार एवं कानूनगो महासंघ ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। संयुक्त पटवार एवं कानूनगो महासंघ तहसील इकाई सोलन की ओर से उपमंडलाधिकारी सोलन कविता ठाकुर के माध्यम से मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को ज्ञापन भेजा गया। तहसील इकाई के अध्यक्ष प्रतीक शर्मा ने इसके माध्यम से बताया कि संशोधित राजस्व अधिनियम के माध्यम से राजस्व कार्यों को निपटाए जाने के लिए बनाई गई समय सीमा से महासंघ सहमत नही है।
उन्होंने कहा कि यह केवल कानून बनाने से नहीं होगा अपितु धरातल पर आवश्यक सुधार करने से होगा। वर्तमान समय में पटवारी, कानूनगो, नायब तहसीलदार व तहसीलदार स्तर तक के लगभग 25 से 70 फीसदी पद खाली चल रहे हैं। पटवारी, कानूनगो को अपने राजस्व कार्य करने का समय ही नहीं मिल पाता। हर रोज विभिन्न प्रमाण पत्रों की रिपोर्ट फोन द्वारा भिन्न-भिन्न सूचनाओं को तैयार करके भेजना, पीएम किसान, 1100 सीएम सकंल्प की शिकायतों के निपटारे, राहत कार्य, फसल गिरदावरी, संयुक्त निरीक्षण के अलावा इंतकाल दर्ज करना, उच्च अधिकारियों और मंत्रियों के भ्रमण में हाजिर होना जमाबंदी की नकलें सत्यापित करने समेत दर्जनों कार्य हैं।
उन्होंने कहा कि एक कानूनगो ज्यादा से ज्यादा 5-7 निशानदेही के मामले एक माह में निपटा सकता है जबकि उसके पास निशानदेही के प्रतिमाह 30 से 40 मामले आते हैं, ऐसी सूरत में आपके द्वारा तय की गई समय सीमा में काम कैसे होगा इस पर विचार किया जाए। महासंघ ने मांग उठाई कि संशोधित बिल को लागू करने से पहले एक बार राज्य कार्यकारिणी के साथ बैठक करें। महासंघ का यह भी कहना है कि यदि कार्यकारिणी के साथ बिना चर्चा किए इसे थोपने की कोशिश की गई तो महासंघ किसी भी प्रकार का आंदोलन करने पर विवश होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। संयुक्त पटवार एवं कानूनगो महासंघ तहसील इकाई सोलन की ओर से उपमंडलाधिकारी सोलन कविता ठाकुर के माध्यम से मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को ज्ञापन भेजा गया। तहसील इकाई के अध्यक्ष प्रतीक शर्मा ने इसके माध्यम से बताया कि संशोधित राजस्व अधिनियम के माध्यम से राजस्व कार्यों को निपटाए जाने के लिए बनाई गई समय सीमा से महासंघ सहमत नही है।
उन्होंने कहा कि यह केवल कानून बनाने से नहीं होगा अपितु धरातल पर आवश्यक सुधार करने से होगा। वर्तमान समय में पटवारी, कानूनगो, नायब तहसीलदार व तहसीलदार स्तर तक के लगभग 25 से 70 फीसदी पद खाली चल रहे हैं। पटवारी, कानूनगो को अपने राजस्व कार्य करने का समय ही नहीं मिल पाता। हर रोज विभिन्न प्रमाण पत्रों की रिपोर्ट फोन द्वारा भिन्न-भिन्न सूचनाओं को तैयार करके भेजना, पीएम किसान, 1100 सीएम सकंल्प की शिकायतों के निपटारे, राहत कार्य, फसल गिरदावरी, संयुक्त निरीक्षण के अलावा इंतकाल दर्ज करना, उच्च अधिकारियों और मंत्रियों के भ्रमण में हाजिर होना जमाबंदी की नकलें सत्यापित करने समेत दर्जनों कार्य हैं।
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उन्होंने कहा कि एक कानूनगो ज्यादा से ज्यादा 5-7 निशानदेही के मामले एक माह में निपटा सकता है जबकि उसके पास निशानदेही के प्रतिमाह 30 से 40 मामले आते हैं, ऐसी सूरत में आपके द्वारा तय की गई समय सीमा में काम कैसे होगा इस पर विचार किया जाए। महासंघ ने मांग उठाई कि संशोधित बिल को लागू करने से पहले एक बार राज्य कार्यकारिणी के साथ बैठक करें। महासंघ का यह भी कहना है कि यदि कार्यकारिणी के साथ बिना चर्चा किए इसे थोपने की कोशिश की गई तो महासंघ किसी भी प्रकार का आंदोलन करने पर विवश होगा।
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