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फलों एवं पुष्पों की जलवायु अनुरूप किस्में तैयार करें वैज्ञानिक : महेंद्र
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सोलन। नौणी विवि में प्रेक्टिसिस ऑफ पैकेजिज फॉर फ्रूट एंड ओर्नामेंटल क्रॉप्स विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर जल शक्ति, बागवानी एवं सैनिक कल्याण मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। इस मौके पर उन्होंने कृषि एवं बागवानी वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे फलों एवं पुष्पों की ऐसी किस्में तैयार करें जो हिमाचल की जलवायु के अनुरूप हों और कीटरोधी हों। इससे पूर्व विश्वविद्यालय में 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित पुष्प खेती की क्षेत्रीय प्रयोगशाला एवं विक्रय केंद्र का लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक उष्मता के कारण खेती एवं बागवानी पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है और इस कारण वैज्ञानिकों का कार्य भी बढ़ गया है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे अपने अनुसंधान के माध्यम से किसानों एवं बागवानों की समस्याओं का समाधान उनके खेत एवं बागीचे में करें। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय को फलदार पौधों की ऐसी सदाबहार किस्में तैयार करनी चाहिए जो ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए सर्वथा अनुकूल हों।
सात जिलों में होंगे 70 करोड़ खर्च
प्रदेश में 1134 करोड़ रुपये की बागवानी विकास परियोजना कार्यान्वित की जा रही है। पायलट परियोजना के तहत प्रदेश सरकार ने सात जिलों के 17 पंचायत समूहों में 1688 करोड़ रुपये की शिवा परियोजना आरंभ की है। इसके तहत सात जिलों में 70 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इसमें किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। प्रदेश सरकार ने एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) की वित्तीय सहायता से यह परियोजना प्रदेश के उन जिलों में शुरू की है, जो 1134 करोड़ के बागवानी विकास मिशन के तहत नहीं हैं। शिवा प्रोजेक्ट के तहत एडीबी की वित्तीय मदद से कांगड़ा, मंडी, ऊना, हमीरपुर बिलासपुर, सोलन और सिरमौर जिले शामिल किए गए हैं।
समय पर हो किसनों की समस्या का निपटारा
मंत्री महेंद्र ने उपस्थित सभी बागवानी अधिकारियों से आग्रह किया कि क्षेत्रीय स्तर से कोई भी शिकायत आती है तो अधिकारी स्वयं उस स्थान पर जाकर समस्या का निपटारा करें। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. परविंद्र कौशल ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि यह कार्यशाला 7 वर्ष की अवधि के उपरान्त आयोजित की जा रही है। उन्होंने अनुसंधान गतिविधियों के लिए आर्थिक सहायता की मांग भी की। बागवानी विभाग के सचिव अमिताभ अवस्थी ने कहा कि विश्वविद्यालय का मुख्य कार्य उद्यान एवं वानिकी के क्षेत्र में नए शोध करना तथा इस विषय में किसान-बागवानों को जागरूक करना है।
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सात जिलों में होंगे 70 करोड़ खर्च
प्रदेश में 1134 करोड़ रुपये की बागवानी विकास परियोजना कार्यान्वित की जा रही है। पायलट परियोजना के तहत प्रदेश सरकार ने सात जिलों के 17 पंचायत समूहों में 1688 करोड़ रुपये की शिवा परियोजना आरंभ की है। इसके तहत सात जिलों में 70 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इसमें किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। प्रदेश सरकार ने एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) की वित्तीय सहायता से यह परियोजना प्रदेश के उन जिलों में शुरू की है, जो 1134 करोड़ के बागवानी विकास मिशन के तहत नहीं हैं। शिवा प्रोजेक्ट के तहत एडीबी की वित्तीय मदद से कांगड़ा, मंडी, ऊना, हमीरपुर बिलासपुर, सोलन और सिरमौर जिले शामिल किए गए हैं।
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समय पर हो किसनों की समस्या का निपटारा
मंत्री महेंद्र ने उपस्थित सभी बागवानी अधिकारियों से आग्रह किया कि क्षेत्रीय स्तर से कोई भी शिकायत आती है तो अधिकारी स्वयं उस स्थान पर जाकर समस्या का निपटारा करें। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. परविंद्र कौशल ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि यह कार्यशाला 7 वर्ष की अवधि के उपरान्त आयोजित की जा रही है। उन्होंने अनुसंधान गतिविधियों के लिए आर्थिक सहायता की मांग भी की। बागवानी विभाग के सचिव अमिताभ अवस्थी ने कहा कि विश्वविद्यालय का मुख्य कार्य उद्यान एवं वानिकी के क्षेत्र में नए शोध करना तथा इस विषय में किसान-बागवानों को जागरूक करना है।
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