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बागा में कंपनी गेट के 200 मीटर दायरे में धरने पर कोर्ट ने लगाया प्रतिबंध
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दाड़लाघाट (सोलन)। बागा में ट्रक ऑपरेटरों और अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी के बीच गतिरोध उग्र हो गया है। लगातार नारेबाजी और धरने के खिलाफ कंपनी ने मुख्य गेट के पास 200 मीटर परिधि में किसी भी तरह के प्रदर्शन पर रोक की कोर्ट के आदेश चस्पां कर दिए हैं। इससे जुड़े पोस्टर गेट और अन्य जगहों पर चिपकाए गए हैं। इसके बावजूद ट्रक ऑपरेटरों का आक्रोश मंगलवार को नहीं थमा।
एक बार फिर उन्होंने शालूघाट से कंपनी गेट तक रैली निकाली। गेट के सामने ऑपरेटरों ने जमकर नारेबाजी की। इस बीच कंपनी प्रबंधन ने संघर्ष पर उतारू ट्रक ऑपरेटरों से कोई बात नहीं की। ट्रक ऑपरेटर उम्मीद में थे कि कंपनी प्रबंधन संघर्ष समिति से बातचीत करेगा लेकिन प्रबंधन ने समिति को नहीं बुलाया। मांगल लैंड लूजर और प्रभावित परिवहन सहकारी सभा सदस्य बबलू, सुरजीत, तरसेम, अजीत सिंह सेन, अप्पू, दीपक ठाकुर, हेमचंद शर्मा, सुरेंद्र वर्मा और रविकांत पाठक ने बताया कि वो न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हैं।
कारखाने की 200 मीटर की परिधि मेन गेट से लगभग एक किलोमीटर तक बनती है। कंपनी का मेन गेट सरकारी भूमि पर बनाया गया है। जहां गेट बना है, वह जंगल बागा के लोगों की बरतने बाशिंदगान है। उस जंगल में गांव के लोगों के हक हकूक हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पर कंपनी ने अवैध रूप से कब्जा किया हुआ है। इसे लेकर एसडीएम कार्यालय अर्की से नोटिस जारी हो चुका है।
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सरकारी भूमि पर कंपनी का मेन गेट बना है। वहां से गांव धार, डगोयन, सहनाली के लोगों को पैदल आने जाने का एक मात्र रास्ता है। इस पर कंपनी ने अपना एकाधिकार जमा रखा है। इसके चलते गांव के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। झूठे मुकद्दमे बनवाकर ऑपरेटरों का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न किया जा रहा है।
उधर, कंपनी प्रबंधन ने इस संबंध में किसी भी तरह की बात करने से इंकार कर दिया है। कंपनी प्रवक्ता का कहना है कि जल्द ही मामला सुलझा लिया जाएगा।
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एक बार फिर उन्होंने शालूघाट से कंपनी गेट तक रैली निकाली। गेट के सामने ऑपरेटरों ने जमकर नारेबाजी की। इस बीच कंपनी प्रबंधन ने संघर्ष पर उतारू ट्रक ऑपरेटरों से कोई बात नहीं की। ट्रक ऑपरेटर उम्मीद में थे कि कंपनी प्रबंधन संघर्ष समिति से बातचीत करेगा लेकिन प्रबंधन ने समिति को नहीं बुलाया। मांगल लैंड लूजर और प्रभावित परिवहन सहकारी सभा सदस्य बबलू, सुरजीत, तरसेम, अजीत सिंह सेन, अप्पू, दीपक ठाकुर, हेमचंद शर्मा, सुरेंद्र वर्मा और रविकांत पाठक ने बताया कि वो न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हैं।
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कारखाने की 200 मीटर की परिधि मेन गेट से लगभग एक किलोमीटर तक बनती है। कंपनी का मेन गेट सरकारी भूमि पर बनाया गया है। जहां गेट बना है, वह जंगल बागा के लोगों की बरतने बाशिंदगान है। उस जंगल में गांव के लोगों के हक हकूक हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पर कंपनी ने अवैध रूप से कब्जा किया हुआ है। इसे लेकर एसडीएम कार्यालय अर्की से नोटिस जारी हो चुका है।
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सरकारी भूमि पर कंपनी का मेन गेट बना है। वहां से गांव धार, डगोयन, सहनाली के लोगों को पैदल आने जाने का एक मात्र रास्ता है। इस पर कंपनी ने अपना एकाधिकार जमा रखा है। इसके चलते गांव के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। झूठे मुकद्दमे बनवाकर ऑपरेटरों का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न किया जा रहा है।
उधर, कंपनी प्रबंधन ने इस संबंध में किसी भी तरह की बात करने से इंकार कर दिया है। कंपनी प्रवक्ता का कहना है कि जल्द ही मामला सुलझा लिया जाएगा।