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Solan News: गुच्छी मशरूम उगाने में शोध विशेषज्ञों को नहीं मिली पूरी सफलता
Sat, 05 Sep 2026 12:57 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sat, 05 Sep 2026 12:57 AM IST
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पॉली हाऊस मे तैयार की गई गुच्छी मशरूम। स्रोत : विभाग
खुंब अनुसंधान में बंद कमरे में पिनिंग और ग्रोथ तो हुई, लेकिन नहीं बन सकी फ्रूटबॉडी
दोबारा से डीएमआर के वैज्ञानिक शुरू करने जा रहे इस पर शोध कार्य
अभी तक चीन के बाद भारत में डीएमआर ने ही तैयार की है गुच्छी मशरूम
ललित कश्यप
सोलन। भारत में गुच्छी के कृत्रिम उत्पादन को लेकर चल रहे शोध में डीएमआर के भावी प्रयासों को एक नया मोड़ मिला है। लेकिन सोलन में बंद कमरे (इनडोर कंट्रोल्ड एनवायरनमेंट) में चल रहे गुच्छी मशरूम शोध में वैज्ञानिकों को आंशिक सफलता ही हासिल हो सकी है। प्रयोगशाला में गुच्छी की पिनिंग और वृद्धि तो दर्ज की गई, लेकिन यह पूरी तरह से फ्रूटबॉडी का रूप नहीं ले सकी।
पूर्ण फ्रूटबॉडी न बन पाने के चलते अब डीएमआर के वैज्ञानिक नए सिरे से इस इनडोर शोध कार्य को शुरू करने जा रहे हैं। वैज्ञानिकों का मुख्य फोकस बंद कमरे के तापमान, नमी और गैसों के संतुलन में सुधार कर फ्रूटबॉडी के सही विकास की परिस्थितियों को समझना है। बता दें कि चीन के बाद दुनिया में भारत ही ऐसा देश है, जहां डीएमआर सोलन ने वैज्ञानिक तरीके से गुच्छी मशरूम उगाने में कामयाबी दर्ज की है। इससे पूर्व डीएमआर सोलन के वैज्ञानिकों ने पॉलीहाउस में गुच्छी मशरूम उगाने का सफल प्रयोग किया था। उस दौरान पॉलीहाउस के प्राकृतिक वातावरण में मिट्टी, नमी और तापमान का सही संयोजन मिलने से गुच्छी की पूर्ण फ्रूटबॉडी सफलता से तैयार की गई थी। उस ऐतिहासिक सफलता के बाद ही वैज्ञानिकों ने इसे पूरे वर्ष उगाने के उद्देश्य से बंद कमरे में उगाने का प्रयोग शुरू किया था।
कोट
इनडोर परिस्थितियों में गुच्छी की पिनिंग और शुरुआती वृद्धि तो बेहतर मिली है, लेकिन पूर्ण फ्रूटबॉडी नहीं बन पाई। इस कमी के कारणों को चिह्नित किया जा रहा है और जल्द ही नए सिरे से इस पर शोध कार्य शुरू किया जाएगा ताकि भविष्य में इनडोर कल्टीवेशन को भी पूरी तरह सफल बनाया जा सके।
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डॉ. ब्रिज लाल अत्री, कार्यकारी निदेशक, खुंब अनुसंधान निदेशालय
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दोबारा से डीएमआर के वैज्ञानिक शुरू करने जा रहे इस पर शोध कार्य
अभी तक चीन के बाद भारत में डीएमआर ने ही तैयार की है गुच्छी मशरूम
ललित कश्यप
सोलन। भारत में गुच्छी के कृत्रिम उत्पादन को लेकर चल रहे शोध में डीएमआर के भावी प्रयासों को एक नया मोड़ मिला है। लेकिन सोलन में बंद कमरे (इनडोर कंट्रोल्ड एनवायरनमेंट) में चल रहे गुच्छी मशरूम शोध में वैज्ञानिकों को आंशिक सफलता ही हासिल हो सकी है। प्रयोगशाला में गुच्छी की पिनिंग और वृद्धि तो दर्ज की गई, लेकिन यह पूरी तरह से फ्रूटबॉडी का रूप नहीं ले सकी।
पूर्ण फ्रूटबॉडी न बन पाने के चलते अब डीएमआर के वैज्ञानिक नए सिरे से इस इनडोर शोध कार्य को शुरू करने जा रहे हैं। वैज्ञानिकों का मुख्य फोकस बंद कमरे के तापमान, नमी और गैसों के संतुलन में सुधार कर फ्रूटबॉडी के सही विकास की परिस्थितियों को समझना है। बता दें कि चीन के बाद दुनिया में भारत ही ऐसा देश है, जहां डीएमआर सोलन ने वैज्ञानिक तरीके से गुच्छी मशरूम उगाने में कामयाबी दर्ज की है। इससे पूर्व डीएमआर सोलन के वैज्ञानिकों ने पॉलीहाउस में गुच्छी मशरूम उगाने का सफल प्रयोग किया था। उस दौरान पॉलीहाउस के प्राकृतिक वातावरण में मिट्टी, नमी और तापमान का सही संयोजन मिलने से गुच्छी की पूर्ण फ्रूटबॉडी सफलता से तैयार की गई थी। उस ऐतिहासिक सफलता के बाद ही वैज्ञानिकों ने इसे पूरे वर्ष उगाने के उद्देश्य से बंद कमरे में उगाने का प्रयोग शुरू किया था।
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इनडोर परिस्थितियों में गुच्छी की पिनिंग और शुरुआती वृद्धि तो बेहतर मिली है, लेकिन पूर्ण फ्रूटबॉडी नहीं बन पाई। इस कमी के कारणों को चिह्नित किया जा रहा है और जल्द ही नए सिरे से इस पर शोध कार्य शुरू किया जाएगा ताकि भविष्य में इनडोर कल्टीवेशन को भी पूरी तरह सफल बनाया जा सके।
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डॉ. ब्रिज लाल अत्री, कार्यकारी निदेशक, खुंब अनुसंधान निदेशालय