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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   The racket of counterfeit medicines operates in BBN under the guise of the pharmaceutical industry.

Solan News: दवा उद्योगों की आड़ में चलता है बीबीएन में नकली दवाओं का खेल

Fri, 28 Aug 2026 12:19 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन Updated Fri, 28 Aug 2026 12:19 AM IST
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-साइड स्टोरी-
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पांच साल में सामने आ चुके हैं 11 मामले, हर बार बड़ा जखीरा पकड़ा
सभी मामले बद्दी क्षेत्र में स्प्यूरियस दवाओं के निर्माण से जुड़े सामने आए
चार वर्ष में 19 आरोपियों को किया जा चुका है गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी(सोलन)। एशिया के सबसे बड़े फार्मा हब बद्दी में नकली दवाओं का अवैध कारोबार चल रहा है। नामी कंपनियां जहां देश की सेहत सुधारती हैं, वहीं कुछ शातिर नकली व नशीली दवाएं बना रहे हैं। वर्ष 2022 से 2026 के बीच 11 स्प्यूरियस मैन्युफैक्चरिंग मामले सामने आए। इनमें 19 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
यह गंभीर चिंता का विषय है। आरोपी जमानत पर छूटकर फिर से इसी काम में लग जाते हैं। वर्ष 2022 में तीन मामले दर्ज हुए। इनमें मैसर्स आर्या फार्मा, मैसर्स एक्लाइम फॉर्मूलेशन और मोहित बंसल से जुड़े प्रकरण थे। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, बद्दी में बड़ी मात्रा में स्प्यूरियस दवाएं, कच्चा माल और मशीनरी बरामद हुई थी। वर्ष 2023 में सबसे अधिक मामले सामने आए। इनमें साइपर फार्मा, केसी ओवरसीज और ग्लेनमार्स हेल्थकेयर जैसे नाम शामिल थे। मैग्नाटेक एंटरप्राइजेज के आरोपी ने 22 मार्च 2024 को हाईकोर्ट में सरेंडर किया। वर्ष 2024 में कोई नया मामला दर्ज नहीं हुआ, पर 2023 के मामलों की कानूनी कार्रवाई जारी रही। वर्ष 2025 में वाईएल फार्मा से जुड़ा एक मामला सामने आया, जिसमें एक व्यक्ति गिरफ्तार हुआ। वर्ष 2026 में दो मामले दर्ज हुए। मैसर्स जैना विजन से जुड़े ईशान बोहरा को एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया।
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सप्लाई चेन की चुनौती
नकली दवाओं का नेटवर्क केवल एक कमरे या गोदाम तक सीमित नहीं है। अदालत के रिकॉर्ड पैकेजिंग सामग्री, कच्चे माल, लेबलिंग और भंडारण तक फैली गतिविधियों की जांच की ओर इशारा करते हैं। यह जानना महत्वपूर्ण है कि कच्चा माल कहां से आता है और बाजार में कैसे पहुंचता है। पूरी सप्लाई चेन की जांच करना अब एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
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फार्मा हब की साख पर सवाल
बद्दी देश के बड़े फार्मास्युटिकल उत्पादन केंद्र के रूप में जाना जाता है। स्प्यूरियस दवाओं के मामले इस औद्योगिक क्षेत्र की साख को नुकसान पहुंचा रहे हैं। आम लोगों की दवा सुरक्षा भी इससे प्रभावित होती है। नियामक निगरानी, लाइसेंस सत्यापन और कच्चे माल की ट्रेसिंग को मजबूत करना आवश्यक है। कार्रवाई को केवल छापेमारी और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रखना चाहिए।
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