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Solan News: बंदियों को बदले गए तीन नए कानूनों के बारे में बताया
Mon, 01 Jul 2024 11:22 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Mon, 01 Jul 2024 11:22 PM IST
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किशनपुरा स्थित जेल में व्याख्यान में करते हुए वक्ता। संवाद
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किशनपुरा जेल में आयोजित किया गया विशेष व्याख्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव के साथ तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रावधानों पर विस्तार से विचार करने के लिए किशनपुरा जेल में व्याख्यान हुआ। आयोजन जेल प्रशासन और सहायक अधीक्षक भूपिंदर सिंह ने किया। इसमें अवस्थी कॉलेज ऑफ लॉ के प्रधानाचार्य डॉ. भूपिंदर जोधटा और सहायक प्रोफेसर अजय कुमार जसवाल ने प्रमुख भूमिका निभाई।
डॉ. भूपिंदर जोधटा ने इन नए कानूनों के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला और उनके प्रभावों पर गहन चर्चा की। उन्होंने बताया कि ये बदलाव न केवल न्यायिक प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाएंगे, बल्कि उन्हें न्याय प्राप्त करने में रुकावटों को कम करने में भी मदद करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ये नए कानून-भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में 1860 के भारतीय दंड सहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-1973 की आपराधिक प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेंगे।
डॉ. जोधटा ने व्याख्यान के दौरान साइबर अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते प्रचलन को ध्यान में रखते हुए पहचान और प्रामाणिकता से जुड़े अपराधों पर भी चर्चा की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ये अपराध न केवल नवीन तकनीकों के उपयोग से जुड़े हैं, बल्कि इन्हें प्रभावी तरीके से नियंत्रित करने के लिए नए कानूनों की आवश्यकता भी है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की जगह लेता है और मूल आपराधिक कानून में कई उल्लेखनीय बदलाव पेश करता है। सहायक प्रोफेसर अजय कुमार जसवाल ने भी इन नए कानूनों के प्रावधानों पर प्रकाश डाला।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव के साथ तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रावधानों पर विस्तार से विचार करने के लिए किशनपुरा जेल में व्याख्यान हुआ। आयोजन जेल प्रशासन और सहायक अधीक्षक भूपिंदर सिंह ने किया। इसमें अवस्थी कॉलेज ऑफ लॉ के प्रधानाचार्य डॉ. भूपिंदर जोधटा और सहायक प्रोफेसर अजय कुमार जसवाल ने प्रमुख भूमिका निभाई।
डॉ. भूपिंदर जोधटा ने इन नए कानूनों के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला और उनके प्रभावों पर गहन चर्चा की। उन्होंने बताया कि ये बदलाव न केवल न्यायिक प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाएंगे, बल्कि उन्हें न्याय प्राप्त करने में रुकावटों को कम करने में भी मदद करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ये नए कानून-भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में 1860 के भारतीय दंड सहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-1973 की आपराधिक प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेंगे।
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डॉ. जोधटा ने व्याख्यान के दौरान साइबर अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते प्रचलन को ध्यान में रखते हुए पहचान और प्रामाणिकता से जुड़े अपराधों पर भी चर्चा की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ये अपराध न केवल नवीन तकनीकों के उपयोग से जुड़े हैं, बल्कि इन्हें प्रभावी तरीके से नियंत्रित करने के लिए नए कानूनों की आवश्यकता भी है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की जगह लेता है और मूल आपराधिक कानून में कई उल्लेखनीय बदलाव पेश करता है। सहायक प्रोफेसर अजय कुमार जसवाल ने भी इन नए कानूनों के प्रावधानों पर प्रकाश डाला।
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