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नालागढ़ कॉलेज में प्राध्यापकों का टोटा, पढ़ाई हो रही चौपट
ब्यूरो, नालागढ़, सोलन
Updated Fri, 23 Sep 2016 10:05 PM IST
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नैक की ए ग्रेडिंग से चूके नालागढ़ कॉलेज में प्रवक्ताओं का टोटा है।
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नैक की ए ग्रेडिंग से चूके नालागढ़ कॉलेज में प्रवक्ताओं का टोटा है। प्रदेश के कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के प्रयास में लागू रूसा भी विद्यार्थियों को मूल सुविधाएं प्रदान नहीं कर पा रहा है। कॉलेजों में अध्यापकों और बेसिक ढांचे की कमी आज भी सरकार के दावों को खोखला साबित कर रहा है।
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नालागढ़ डिग्री कॉलेज भी इसी तरह की मूलभूत सुविधाओं के प्रयास में विश्वविद्यालय प्रबंधन को लगातार विद्यार्थियों के ज्ञापनों से आगाह करने का प्रयास करता रहता है। नालागढ़ कॉलेज में मौजूदा समय में करीब 2326 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। कॉलेज में हालांकि सभी कोर्स की करीब 3000 से अधिक सीटें हैं। रूसा के तहत कॉलेज के लिए प्रवक्ताओं की स्वीकृत संख्या 40 होने के बावजूद कॉलेज में नियमित 28 प्रवक्ता ही सेवाएं दे रहे हैं। पांच प्रवक्ताओं को कॉलेज प्रबंधन की ओर से पढ़ाई के लिए बाहर से बुलाया जाता है। प्रवक्ता के सात पद अभी भी रिक्त चल रहे हैं।
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कॉलेज प्राचार्य केएस मेहता ने कहा कि सुविधाओं में विस्तार के प्रयास हो रहे हैं। कॉलेज में इंडोर स्पोर्ट्स सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। प्रवक्ताओं को लेकर विवि प्रबंधन से मांग की गई है। कहा कि रूसा लागू होने से कॉलेज में शैक्षणिक माहौल पहले से बेहतर हुआ है।
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कॉलेज में लागू नहीं रूसा की शर्तें
नालागढ़ कॉलेज को जिन परिस्थितियों चलाया जा रहा है, वह रूसा की शर्तों को पूरा नहीं कर पा रहा। रूसा के तहत कॉलेज में 40 प्रवक्ताओं का होना अनिवार्य है। कॉलेज में केवल 28 रेगुलर प्रवक्ता मौजूद हैं। कॉलेज में प्रयोगशाला और स्पोर्ट्स कैंपस का होना अनिवार्य है। कॉलेज में यह सुविधाएं भी विद्यार्थियों को सही से नहीं मिल रहीं।
ट्यूशन का अतिरिक्त खर्चा
कॉलेज में जिन विषय के पद रिक्त पड़े हैं उनके लिए विद्यार्थियों को ट्यूशन का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। सरकारी कॉलेज होते हुए भी अभिभावकों को निजी कॉलेजों की तरह ट्यूशन और स्पोर्ट्स प्रैक्टिस के अतिरिक्त खर्च का भार पड़ रहा है। एबीवीपी इकाई अध्यक्ष महावीर सिंह ने कहा कि प्रदेश में सरकार और विवि प्रशासन को रूसा लागू करने के साथ इसकी नियमावली पर चलाने के लिए सुविधा देनी चाहिए। विद्यार्थियों के भविष्य को इस प्रकार दावों तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए।
इन विषयों के नहीं हैं प्रवक्ता
फिजिक्स -1
पॉलिटिकल साइंस -2
फिलॉसिफी -1
केमिस्ट्री -2
संस्कृत -1