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Solan News: भागवत कथा में सुनाया कंस वध व रुक्मिणी विवाह के प्रसंग
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माजरू गांव में कथा के साथ झांकी और भजन-संगीत से माहौल भक्तिमय
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। बद्दी उपमंडल के माजरू गांव में श्रीमद्भागवत पुराण कथा का आयोजन किया गया, जिसमें कंस वध और रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया गया। व्यास पंडित प्रकाश चंद गर्गाचार्य ने बताया कि कंस ने श्रीकृष्ण और बलराम को मारने के लिए कुटिल योजना बनाई और उन्हें धनुष यज्ञ के बहाने मथुरा बुलाया। मथुरा पहुँचते ही श्रीकृष्ण ने कुवलयापीड़ हाथी, पहलवान चाणूर और मुष्टिक का वध किया। अंततः श्रीकृष्ण ने सिंहासन पर बैठे कंस को नीचे गिराकर उसका वध किया और अपने माता-पिता देवकी-वसुदेव को मुक्त किया। कथा में रुक्मिणी और श्रीकृष्ण के विवाह की कथा भी सुनाई गई। बताया गया कि रुक्मिणी विदर्भ देश के राजा भीष्मक की सुंदर और बुद्धिमान पुत्री थीं। उनके भाई रुक्म ने उन्हें शिशुपाल से विवाह कराने की योजना बनाई थी, लेकिन रुक्मिणी श्रीकृष्ण से प्रेम करती थीं। उन्होंने श्रीकृष्ण को संदेश भेजा और कृष्ण विदर्भ पहुंचे। विवाह से पहले रुक्म और श्रीकृष्ण के बीच युद्ध हुआ, जिसमें श्रीकृष्ण विजयी हुए और रुक्मिणी को द्वारिका ले गए। इस अवसर पर आयोजक मंडली की ओर से श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह की झांकी प्रस्तुत की गई। कथा के साथ-साथ भजन-संगीत ने भी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। बद्दी उपमंडल के माजरू गांव में श्रीमद्भागवत पुराण कथा का आयोजन किया गया, जिसमें कंस वध और रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया गया। व्यास पंडित प्रकाश चंद गर्गाचार्य ने बताया कि कंस ने श्रीकृष्ण और बलराम को मारने के लिए कुटिल योजना बनाई और उन्हें धनुष यज्ञ के बहाने मथुरा बुलाया। मथुरा पहुँचते ही श्रीकृष्ण ने कुवलयापीड़ हाथी, पहलवान चाणूर और मुष्टिक का वध किया। अंततः श्रीकृष्ण ने सिंहासन पर बैठे कंस को नीचे गिराकर उसका वध किया और अपने माता-पिता देवकी-वसुदेव को मुक्त किया। कथा में रुक्मिणी और श्रीकृष्ण के विवाह की कथा भी सुनाई गई। बताया गया कि रुक्मिणी विदर्भ देश के राजा भीष्मक की सुंदर और बुद्धिमान पुत्री थीं। उनके भाई रुक्म ने उन्हें शिशुपाल से विवाह कराने की योजना बनाई थी, लेकिन रुक्मिणी श्रीकृष्ण से प्रेम करती थीं। उन्होंने श्रीकृष्ण को संदेश भेजा और कृष्ण विदर्भ पहुंचे। विवाह से पहले रुक्म और श्रीकृष्ण के बीच युद्ध हुआ, जिसमें श्रीकृष्ण विजयी हुए और रुक्मिणी को द्वारिका ले गए। इस अवसर पर आयोजक मंडली की ओर से श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह की झांकी प्रस्तुत की गई। कथा के साथ-साथ भजन-संगीत ने भी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।