फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   Biogas will be produced from wet waste, and fuel for the cement industry will be prepared from dry waste.

Solan News: गीले कचरे से बायोगैस और सूखे कचरे से तैयार होगा सीमेंट उद्योगों के लिए ईंधन

Tue, 22 Sep 2026 12:13 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन Updated Tue, 22 Sep 2026 12:13 AM IST
विज्ञापन
सीमेंट प्लांट में जाएगा शहर से निकलने वाला प्लास्टिक व अन्य सूखा कचरा
विज्ञापन

कोयले की जगह सीमेंट प्लांट में ईंधन के लिए इस कचरे का किया जाएगा उपयोग
अभी तक सलोगड़ा में सीमेंट प्लांट में लगे कचरे के ढेर, लोग हो रहे हैं परेशान
सलोगड़ा कूड़ा संयंत्र में रोज पहुंच रहा 30 से 35 टन कचरा, होगा निस्तारण
पुष्पलता शांडिल्य
सोलन। शहर से निकलने वाला कचरा अब सीमेंट बनाने में काम आएगा। सलोगड़ा कूड़ा संयंत्र में रोजाना निकलने वाले कूड़े का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से हो रहा है। नगर निगम शहर से रोजाना 30 से 35 टन ताजा कूड़ा निकालता है। इस कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है उसके बाद गीले कचरे का उपयोग बायोगैस तैयार करने और सूखे और ज्वलनशील कचरे का इस्तेमाल आरडीएफ तैयार करने में किया जा रहा है। वहीं आरडीएफ का उपयोग सीमेंट उद्योग में ईंधन के तौर पर किया जाएगा।
कूड़ा संयंत्र में गीले कचरे का अलग निष्पादन किया जाएगा। इसमें घरों से निकलने वाले भोजन का बचा हुआ हिस्सा, सब्जियों-फलों आदि के छिलकों से बायोगैस तैयार की जाएगी। यह गीला कचरा पंचकूला बायो गैस प्लांट भेजा जाएगा। वहीं सूखे कचरे से आरडीएफ (कचरे से तैयार ईंधन) तैयार किया जाएगा। इसमें जलने योग्य सामग्री जैसे कपड़ा, प्लास्टिक, कागज आदि शामिल है। इस तरह के कचरे को अलग कर, प्रोसेसिंग और जरूरत के अनुसार छोटा करके आरडीएफ तैयार किया जाता है। सीमेंट बनाने के लिए भट्ठी को बहुत अधिक तापमान की जरूरत होती है। आरडीएफ को जलाकर सीमेंट तैयार किया जाता है। आमतौर पर इसके लिए कोयला या अन्य ईंधन का उपयोग किया जाता है लेकिन कोयला महंगा होने के कारण अब सूखे और दोबारा उपयोग में न आने वाले कचरे से सीमेंट की भट्ठी में तापमान के लिए उपयोग किया जाएगा। वहीं जो कचरा दोबारा उपयोग योग्य होता है उसका पुनर्चक्रण किया जाएगा है।
विज्ञापन

शहर की बढ़ती आबादी के कारण रोजाना निकलने वाले कचरे की मात्रा भी बढ़ रही है। इसमें घरों, दुकानों, बाजारों और अन्य स्थानों से निकलने वाला गीला और सूखा कूड़ा शामिल है। कचरे का सही से निपटारा न होने के कारण बहुत सा कचरा कूड़ा संयंत्र में जमा होता रहता है। इससे कचरे का ढेर बढ़ता है और आसपास के क्षेत्र में बदबू और प्रदूषण का खतरा बढ़ता है। सलोगड़ा कूड़ा संयंत्र से कचरा देश के अलग-अलग सीमेंट प्लांट में भेजा जा रहा है। सलोगड़ा कूड़ा संयंत्र में कूड़े की छंटनी के लिए दिन निर्धारित किए गए हैं इसमें मंगलवार और शुक्रवार को सूखे कचरे का निष्पादन और सोमवार, बुधवार, वीरवार, शनिवार को गीले कचरे का निष्पादन किया जाता है। सूखे कचरे के दिनों में एक दिन में लगभग 30 टन कचरे का निष्पादन किया जाता है और गीले कचरे वाले दिनों में 34 से 35 टन कचरे का निष्पादन किया जाता है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

कोट
शहर से निकलने वाले कचरे का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से करने पर जोर दिया जा रहा है। गीले और सूखे कूड़े को अलग-अलग करके उनका उपयोग बायोगैस ऊर्जा बनाने और आरडीएफ के लिए किया जा रहा है। इससे कूड़े की मात्रा कम होगी और उसके उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। - गौरव राजपूत, उपमहापौर नगर निगम सोलन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed