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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   No land settlement in Barotiwala's Musabi and Latha villages since 1992-93; residents facing difficulties.

Solan News: बरोटीवाला के मुसाबी और लठा गांवों में 1992-93 से भूमि बंदोबस्त नहीं, लोग परेशान

Tue, 22 Sep 2026 12:12 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन Updated Tue, 22 Sep 2026 12:12 AM IST
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मुसाबी और लठा गांवों में भूमि की निशानदेही के मामलों में आ रही दिक्कत
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लोगों ने उठाई पटवार वृत में प्रशासन से बंदोबस्त कर्मी लगाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी(सोलन)। बरोटीवाला के औद्योगिक विकास के बीच आसपास के गांवों में जमीन से जुड़े पुराने अभिलेख लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। बरोटीवाला और मंधाला पटवार वृत्त के तहत आने वाले मुसाबी और लठा गांवों में वर्ष 1992-93 से भूमि बंदोबस्त नहीं हुआ है। पुराने और बदहाल अभिलेखों के कारण जमीन की निशानदेही, बंटवारे और अन्य भूमि संबंधी मामलों के निपटारे में दिक्कतें आ रही हैं।
सोशल वेलफेयर यंग स्टार क्लब बरोटीवाला के संस्थापक अध्यक्ष राजिंदर सिंह राणा ने प्रशासन को एक पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि इन गांवों के भूमि अभिलेख लंबे समय से पुरानी स्थिति में हैं। इससे भूमि मालिकों को अपनी जमीन की निशानदेही और हिस्सों से जुड़े मामले सुलझाने में कठिनाई हो रही है। अभिलेख स्पष्ट न होने के कारण कई भूमि संबंधी मामलों का निपटारा समय पर नहीं हो पा रहा है। भूमि मालिकों को अपने मामलों के लिए राजस्व अधिकारियों के पास जाना पड़ रहा है। कुछ विवाद न्यायालय तक भी पहुंच गए हैं। बरोटीवाला क्षेत्र में पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर औद्योगिक और आवासीय विकास हुआ है। इससे जमीन की खरीद-फरोख्त और उपयोग में भी बदलाव आया है। पुराने भूमि अभिलेख और मौके की स्थिति में अंतर से जमीन मालिकों को परेशानी हो रही है।
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बंदोबस्त स्टाफ की मांग
राजिंदर सिंह राणा ने मुख्यमंत्री, उपायुक्त सोलन और एसडीएम बद्दी को पत्र भेजा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से बरोटीवाला और मंधाला पटवार वृत्त के गांवों के राजस्व अभिलेखों के बंदोबस्त के लिए स्टाफ तैनात करने की मांग की है। राणा ने मामले में जल्द कार्रवाई की अपील की है। इससे लंबे समय से भूमि संबंधी मामलों का सामना कर रहे लोगों को राहत मिल सकेगी।
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समस्याओं का मूल कारण
मुसाबी और लठा गांवों में 1992-93 से बंदोबस्त न होना मुख्य समस्या है। औद्योगिक विकास के कारण जमीन के उपयोग में तेजी से बदलाव आया है। पुराने अभिलेख इस बदलाव के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं। स्पष्ट अभिलेखों के अभाव में भूमि विवाद बढ़ रहे हैं और न्याय मिलने में देरी हो रही है।
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