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Solan News: चक्कीमोड़ व जाबली के समीप बनी वर्षा शालिकाओं की हालत खस्ता, लोग परेशान
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चक्कीमोड़ में क्षतिग्रस्त वर्षा शालिका। संवाद
लोगों ने ठेकेदार परर लगाया घटिया सामग्री का इस्तेमाल करने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (सोलन)। परवाणू-शिमला फोरलेन पर बनाई गई वर्षाशालिकाओं की हालत खस्ता हो गई है। चक्कीमोड़ और जाबली के बीच लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित दोनों वर्षाशालिकाएं पूरी तरह से टूट चुकी हैं। अब इन स्थानों पर बैठने के लिए कोई जगह नहीं बची है और वहां पड़े मिट्टी और पत्थरों के ढेर ने स्थिति को और भी खराब कर दिया है। वर्ष 2023 में आई आपदा के दौरान पहाड़ी से पत्थर गिरने से इन वर्षाशालिकाओं को नुकसान हुआ था, जिसके कारण इनकी संरचना पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। कुर्सियां तक टूट कर गिर गई हैं और फर्श भी टूट चुका है। बावजूद इसके, एनएचएआई ने इन्हें ठीक करने की कोई ठोस पहल नहीं की गई है। लोगों का आरोप है कि वर्षाशालिकाओं के फर्श में इस्तेमाल की गई सामग्री घटिया गुणवत्ता की है, जिससे फर्श में लगी टाइलें टूटने लगी हैं। अब लोगों को खुले में खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में खुले में खड़े रहना और भी मुश्किल होगा। जानकारी के अनुसार ग्रील कंपनी ने वर्षाशालिका में फर्श डालने का काम एक निजी ठेकेदार को सौंपा था। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार ने लापरवाही बरतते हुए घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार को जांच बिठानी चाहिए और जिम्मेदार ठेकेदार तथा कंपनी पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। धर्मपुर पंचायत के पूर्व उप प्रधान अजय गरचा ने कहा कि अगर ग्रील कंपनी ने जल्द ही वर्षाशालिकाओं के फर्श को ठीक नहीं किया, तो एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर से इसकी शिकायत की जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (सोलन)। परवाणू-शिमला फोरलेन पर बनाई गई वर्षाशालिकाओं की हालत खस्ता हो गई है। चक्कीमोड़ और जाबली के बीच लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित दोनों वर्षाशालिकाएं पूरी तरह से टूट चुकी हैं। अब इन स्थानों पर बैठने के लिए कोई जगह नहीं बची है और वहां पड़े मिट्टी और पत्थरों के ढेर ने स्थिति को और भी खराब कर दिया है। वर्ष 2023 में आई आपदा के दौरान पहाड़ी से पत्थर गिरने से इन वर्षाशालिकाओं को नुकसान हुआ था, जिसके कारण इनकी संरचना पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। कुर्सियां तक टूट कर गिर गई हैं और फर्श भी टूट चुका है। बावजूद इसके, एनएचएआई ने इन्हें ठीक करने की कोई ठोस पहल नहीं की गई है। लोगों का आरोप है कि वर्षाशालिकाओं के फर्श में इस्तेमाल की गई सामग्री घटिया गुणवत्ता की है, जिससे फर्श में लगी टाइलें टूटने लगी हैं। अब लोगों को खुले में खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में खुले में खड़े रहना और भी मुश्किल होगा। जानकारी के अनुसार ग्रील कंपनी ने वर्षाशालिका में फर्श डालने का काम एक निजी ठेकेदार को सौंपा था। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार ने लापरवाही बरतते हुए घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार को जांच बिठानी चाहिए और जिम्मेदार ठेकेदार तथा कंपनी पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। धर्मपुर पंचायत के पूर्व उप प्रधान अजय गरचा ने कहा कि अगर ग्रील कंपनी ने जल्द ही वर्षाशालिकाओं के फर्श को ठीक नहीं किया, तो एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर से इसकी शिकायत की जाएगी।