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ओलावृष्टि के बाद अब टमाटर पर छेदक रोग का कहर

Tue, 17 May 2016 11:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन Updated Tue, 17 May 2016 11:05 PM IST
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tamto under chedk rog
हाल ही में हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि सोलन की मुख्य टमाटर की पैदावार पर कहर बनकर बरपी थी। - फोटो : अमर उजाला

हाल ही में हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि सोलन की मुख्य टमाटर की पैदावार पर कहर बनकर बरपी थी। अब रही सही कसर सफेद मक्खी ने निकाल दी है। बारिश और तेज धूप के बीच टमाटर की पैदावार पर सफेद मक्खी ने हमला बोल दिया है। इससे फल छेदक रोग का खतरा बढ़ गया है। लिहाजा नौणी विवि के वैज्ञानिकों ने किसानों से इस मौसम में सफेद मक्खी और छेदक रोग से सावधान रहने की हिदायत जारी की है।

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सोलन में प्रतिवर्ष करीब 10 लाख टमाटर के कैरेट की पैदावार होती है जबकि 36 करोड़ का सालाना कारोबार किया जाता है। मौसम के मिजाज को देखते हुए सैकड़ों किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि टमाटर में सफेद मक्खी, फल छेदक रोगों के आक्रमण के लिए मौसम का मिजाज प्रतिकूल है।
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इससे किसानों और बागवानों को सतर्क रहने की जरूरत है। सोलन में बसाल, धरोट, जौणाजी, आंजी, डांगरी, पाटी, कोठी देवरा, चंबाघाट, सेरी, कंडाघाट, चायल, सुबाथू, अर्की, कुनिहार, गंभरपुल, साधुपुल, वाकनाघाट, डुमैहर और ममलीग क्षेत्रों में टमाटर की पैदावार काफी होती है। कुछ स्थानों में टमाटर की पैदावार प्रारंभिक चरण में है तो कुछ स्थानों में पैदावार तैयार हो रही है।
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बचाव के लिए यह करें
विश्वविद्यालय के संयुक्त निदेशक संचार डॉ. एसके गुप्ता के अनुसार मुताबिक रोकथाम के लिए इंडोक्साकार्बस (14.5 ईसी 11 मिली लीटर) या लैम्डा साइहेलोथ्रिी का घोल (15 लीटर पानी) में मिलाकर पौधों में छिड़काव करने से इस रोग से फसलों को बचाया जा सकता है। इसके साथ ही सफेद मक्खी की रोकथाम के लिए पीले स्टीकी ट्रैप का प्रयोग करना चाहिए। नौणी विवि के कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को इस मौसम में कृषि कार्यसूची पर अमल करने की हिदायत दी है।

पशुपालक रहें सावधान
विवि द्वारा जारी पशु धन संबंधित कार्य के अनुसार इस मौसम में पशुओं के लिए पीने का पानी हर 2 घंटों में देते रहें। पशुपालकों को क्षमता से अधिक पशुओं को बांधने से बचना चाहिए। साथ ही उचित वेंटिलेशन का प्रावधान रखना चाहिए।


स्ट्राबैरी के पत्तों में बीमारी का खतरा
इस मौसम में स्ट्राबैरी के पत्तों में बीमारियों का खतरा सबसे अधिक होता है। इसकी रोकथाम के लिए हैक्साकोनाजोल (100 मिली) या कार्बंडाजिम का प्रयोग उपयोगी होता है। किसानों को सेब के पौधे में नत्रजन की आधी मात्रा डालनी चाहिए। सूक्ष्म तत्वों की कमी के लिए सेब के बागीचों में मल्टीपलैक्स, ट्रेसल या एग्रोमिन का छिड़काव करने की वैज्ञानिकों ने सलाह दी है। इसके साथ ही गुठलीदार फलों में मैंकोजेब/कैप्टन (600 ग्राम) को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। इससे इन पौधों को भी लगने वाले कीड़ों और रोगों से बचाया जा सकता है।

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