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Solan News: सर्वे के ट्रैक पर ही दौड़ रही घोषणाओं की रेल
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प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए छह दशक में तीन बार हो चुके सर्वेक्षण
कभी जगाधरी, कभी देहरादून तो कभी घनोली से किया सर्वे
पांवटा साहिब, कालाअंब और बीबीएन को जोड़ने की है योजना
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। करीब छह दशक से सोलन और सिरमौर के औद्योगिक क्षेत्रों को रेलवे लाइन से जोड़ने का मुद्दा महज चुनाव तक ही सिमट गया है। हर लोकसभा चुनाव में यह मुद्दा जोरशोर से उठता है। दशकों पुराने रेलवे लाइन मुद्दा अब तक केवल सर्वेक्षण तक सिमट हुआ है। इसके चलते क्षेत्र में विकास की गति नहीं पकड़ पा रही है। रेलवे लाइन मुद्दा पूरा होने पर औद्योगिकीकरण, पर्यटन विकास और देश-विदेश से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में इजाफा हो सकता है।
सोलन और सिरमौर के औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब, पांवटा साहिब और बीबीएन को रेल लाइन से जोड़ने का प्रस्ताव है। वर्ष 1962 में पहली बार जगाधरी-पांवटा-राजबन रेल लाइन के लिए सर्वेक्षण किया गया। फिर 1972 में दोबारा से सर्वेक्षण किया गया। 1990 में पंजाब के घनोली-बद्दी-नालागढ़-कालाअंब-पांवटा साहिब देहरादून रेललाइन के लिए सर्वेक्षण करवाने के रेल मंत्रालय ने निर्देश दिए मगर बजट के अभाव में सर्वेक्षण अधूरा रहा। ममता बनर्जी रेलवे मंत्री रहने के दौरान 1999-2000 में सर्वेक्षण को बजट प्रावधान भी किया गया। फिर 2014 में जगाधरी-पांवटा साहिब 50 किलोमीटर लंबी रेललाइन के लिए सर्वेक्षण करवाया गया मगर यह भी सिरे नहीं चढ़ा। 2016 में बीबीएन-पांवटा-देहरादून रेललाइन के लिए तत्कालीन राज्य मंत्री ने फिर से सर्वेक्षण के निर्देश दिए, यह भी केवल घोषणा तक सीमित रहे।
इसके बाद मार्च 2021 में तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शिमला में पांवटा साहिब जगाधरी रेल लाइन के लिए सर्वेक्षण करवाने के निर्देश दिए। लेकिन अब तक मुद्दा अधर में ही लटका रहा है।
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हिमोत्कर्ष संस्था सिरमौर अध्यक्ष राजेंंद्र प्रसाद तिवारी ने कहा कि रेलवे लाइन पिछड़े जिले की विकास को गति दे सकती है। सिरमौर में औद्योगिकीकरण, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रेल कनेक्टिविटी जरूरी है।
व्यापार मंडल के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. मदन लाल खुराना ने कहा कि 1962 से केंद्र सरकार तथा प्रदेश के कई सांसदों ने इस मुद्दे को कई बार प्रधानमंत्री और रेल मंत्री से उठाया है। लेकिन मांग मात्र सर्वेक्षण तक ही सीमित रही। केंद्र सरकार ने न तो सिरमौर में रेल लाइन के लिए फाइनल सर्वे करवाया, न ही बजट का प्रावधान किया।
हिमाचल प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज पांवटा इकाई प्रधान सतीश गोयल ने कहा कि दशकों से रेलवे लाइन का मुद्दा उठाया जाता रहा है। कई लोगों का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय मंत्रियों से मिलता रहा है लेकिन केवल रेलवे लाइन सर्वेक्षण करवाने तक मुद्दा सिमट कर रह जाता है। मुद्दा सिरे चढ़ने पर ही औद्योगिकीकरण को तीव्र गति मिल सकती है।
रेलवे संघर्ष समिति अध्यक्ष अनिंद्रर सिंह नोटी ने कहा कि दशकों से संघर्ष जारी है। पिछड़े जिले के लिए रेलवे लाइन का मुद्दा प्रमुख रहा है। पांवटा साहिब औद्योगिक क्षेत्र के साथ धार्मिक पर्यटन का भी बहुत बड़ा केंद्र है। केंद्रीय बजट में सिरमौर जिले के लिए रेल लाइन के लिए बजट स्वीकृति में अब तक निराशा ही हाथ लगती रही है।
शिक्षा, धार्मिक स्थलों और पर्यटन को मिल सकती है गति
सिरमौर में पांवटा साहिब तथा कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र हैं। सोलन और सिरमौर में करीब पांच हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। दोनों जिलों के रेलवे लाइन से जुड़ने पर औद्योगिकीकरण को भी काफी बढ़ावा मिल सकता है। रेलवे से विकास को नए पंख लग सकते हैं। जिले में आईआईएम सिरमौर धौलाकुआं, मेडिकल कॉलेज नाहन, इटरनल विश्वविद्यालय बड़ू साहिब, सिरमौर के डेंटल कॉलेज पांवटा, नर्सिंग, इंजीनियरिंग कॉलेज तथा पर्यटन व आस्था के केंद्रों रेणुकाजी, हरिपुरधार, देश-विदेश में चर्चित पांवटा गुरुद्वारा साहिब हैं। इसके चलते क्षेत्र को रेलवे लाइन से जोड़ा जाना जरूरी है।
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कभी जगाधरी, कभी देहरादून तो कभी घनोली से किया सर्वे
पांवटा साहिब, कालाअंब और बीबीएन को जोड़ने की है योजना
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। करीब छह दशक से सोलन और सिरमौर के औद्योगिक क्षेत्रों को रेलवे लाइन से जोड़ने का मुद्दा महज चुनाव तक ही सिमट गया है। हर लोकसभा चुनाव में यह मुद्दा जोरशोर से उठता है। दशकों पुराने रेलवे लाइन मुद्दा अब तक केवल सर्वेक्षण तक सिमट हुआ है। इसके चलते क्षेत्र में विकास की गति नहीं पकड़ पा रही है। रेलवे लाइन मुद्दा पूरा होने पर औद्योगिकीकरण, पर्यटन विकास और देश-विदेश से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में इजाफा हो सकता है।
सोलन और सिरमौर के औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब, पांवटा साहिब और बीबीएन को रेल लाइन से जोड़ने का प्रस्ताव है। वर्ष 1962 में पहली बार जगाधरी-पांवटा-राजबन रेल लाइन के लिए सर्वेक्षण किया गया। फिर 1972 में दोबारा से सर्वेक्षण किया गया। 1990 में पंजाब के घनोली-बद्दी-नालागढ़-कालाअंब-पांवटा साहिब देहरादून रेललाइन के लिए सर्वेक्षण करवाने के रेल मंत्रालय ने निर्देश दिए मगर बजट के अभाव में सर्वेक्षण अधूरा रहा। ममता बनर्जी रेलवे मंत्री रहने के दौरान 1999-2000 में सर्वेक्षण को बजट प्रावधान भी किया गया। फिर 2014 में जगाधरी-पांवटा साहिब 50 किलोमीटर लंबी रेललाइन के लिए सर्वेक्षण करवाया गया मगर यह भी सिरे नहीं चढ़ा। 2016 में बीबीएन-पांवटा-देहरादून रेललाइन के लिए तत्कालीन राज्य मंत्री ने फिर से सर्वेक्षण के निर्देश दिए, यह भी केवल घोषणा तक सीमित रहे।
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इसके बाद मार्च 2021 में तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल ने शिमला में पांवटा साहिब जगाधरी रेल लाइन के लिए सर्वेक्षण करवाने के निर्देश दिए। लेकिन अब तक मुद्दा अधर में ही लटका रहा है।
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हिमोत्कर्ष संस्था सिरमौर अध्यक्ष राजेंंद्र प्रसाद तिवारी ने कहा कि रेलवे लाइन पिछड़े जिले की विकास को गति दे सकती है। सिरमौर में औद्योगिकीकरण, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रेल कनेक्टिविटी जरूरी है।
व्यापार मंडल के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. मदन लाल खुराना ने कहा कि 1962 से केंद्र सरकार तथा प्रदेश के कई सांसदों ने इस मुद्दे को कई बार प्रधानमंत्री और रेल मंत्री से उठाया है। लेकिन मांग मात्र सर्वेक्षण तक ही सीमित रही। केंद्र सरकार ने न तो सिरमौर में रेल लाइन के लिए फाइनल सर्वे करवाया, न ही बजट का प्रावधान किया।
हिमाचल प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज पांवटा इकाई प्रधान सतीश गोयल ने कहा कि दशकों से रेलवे लाइन का मुद्दा उठाया जाता रहा है। कई लोगों का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय मंत्रियों से मिलता रहा है लेकिन केवल रेलवे लाइन सर्वेक्षण करवाने तक मुद्दा सिमट कर रह जाता है। मुद्दा सिरे चढ़ने पर ही औद्योगिकीकरण को तीव्र गति मिल सकती है।
रेलवे संघर्ष समिति अध्यक्ष अनिंद्रर सिंह नोटी ने कहा कि दशकों से संघर्ष जारी है। पिछड़े जिले के लिए रेलवे लाइन का मुद्दा प्रमुख रहा है। पांवटा साहिब औद्योगिक क्षेत्र के साथ धार्मिक पर्यटन का भी बहुत बड़ा केंद्र है। केंद्रीय बजट में सिरमौर जिले के लिए रेल लाइन के लिए बजट स्वीकृति में अब तक निराशा ही हाथ लगती रही है।
शिक्षा, धार्मिक स्थलों और पर्यटन को मिल सकती है गति
सिरमौर में पांवटा साहिब तथा कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र हैं। सोलन और सिरमौर में करीब पांच हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। दोनों जिलों के रेलवे लाइन से जुड़ने पर औद्योगिकीकरण को भी काफी बढ़ावा मिल सकता है। रेलवे से विकास को नए पंख लग सकते हैं। जिले में आईआईएम सिरमौर धौलाकुआं, मेडिकल कॉलेज नाहन, इटरनल विश्वविद्यालय बड़ू साहिब, सिरमौर के डेंटल कॉलेज पांवटा, नर्सिंग, इंजीनियरिंग कॉलेज तथा पर्यटन व आस्था के केंद्रों रेणुकाजी, हरिपुरधार, देश-विदेश में चर्चित पांवटा गुरुद्वारा साहिब हैं। इसके चलते क्षेत्र को रेलवे लाइन से जोड़ा जाना जरूरी है।