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एसबीआई में सहयोगी बैंकों के विलय का विरोध

Fri, 20 May 2016 10:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन Updated Fri, 20 May 2016 10:17 PM IST
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strik of bank in solan
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सभी पांच सहयोगी बैंकों की बोर्ड बैठक में सहयोगी बैंकों को एसबीआई में विलय करने के खिलाफ शुक्रवार को धरना प्रदर्शन किया गया। - फोटो : Demo Pic

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सभी पांच सहयोगी बैंकों की बोर्ड बैठक में सहयोगी बैंकों को एसबीआई में विलय करने के खिलाफ शुक्रवार को धरना प्रदर्शन किया गया। इस दौरान स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बैंक बंद रखकर विरोध जताया। शहर के करीब आठ बैंकों में पूरी तरह से हड़ताल की गई और कामकाज बंद रखा।

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 स्टेट बैंक आफ पटियाला कर्मचारी यूनियन ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इस निर्णय को एसबीआई सहयोगी बैंकों के प्रबंधन वर्ग की मिलीभगत करार दिया है। कर्मचारी यूनियन के आयोजक सचिव राजेश शाक्या सहायक सचिव ने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक सहयोगी बैंक प्रबंधन वर्ग की मिलीभगत का स्टेट बैंक आफ पटियाला कर्मचारी यूनियन कड़े शब्दों में निंदा करती है।
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 उन्होंने बताया कि पिछले दिनों मुंबई में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सभी पांच सहयोगी बैंकों की बोर्ड बैठक में अचानक एसबीआई के सभी सहयोगी बैंकों को एसबीआई में विलय करने के एजेंडा की योजना पर सभी सहयोगी बैंकों ने अपनी सहमति व्यक्त की है।  बैंक के सहायक सचिव विजय वर्मा ने कहा कि यदि सहयोगी बैंक के कर्मचारियों की मांगों पर विचार नहीं किया जाता तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।
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100 करोड़ का कामकाज प्रभावित
स्टेट बैंक आफ पटियाला मालरोड, डिग्री कालेज, सलोगड़ा, डमरोग, देहूंघाट, ठोडो ग्रांउड और बरोट में बैंक बंद रहे। पूरा दिन हड़ताल रही। इस दौरान करीब 100 करोड़ की ट्रांसेक्शन बंद रही। इस दौरान उपभोक्ताओं को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।

वित्त मंत्री का आश्वासन झूठा
एसबीआई ने इस एजेंडे को स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को भेज दिया है। यूनियन ने आरोप लगाया कि यह सारा एजेंडा स्टेट बैंक आफ इंडिया की शह के चलते प्रस्तुत किया है। इसका स्टेट बैंक ऑफ पटियाला कर्मचारी यूनियन कड़े शब्दों में निंदा करती है। शाक्या ने बताया कि यह फैसला वित्त मंत्री अरुण जेतली के उस आश्वासन के खिलाफ है जो उन्होंने सहयोगी बैंकों की यूनियनों की बैठक में दिया था। आश्वासन दिया था कि सभी सहयोगी बैंकों को आपस में विलय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।


28 को फिर से हड़ताल
वक्ताओं ने कहा कि अगर मांगों को नहीं माना तो आने वाले दिनों में संघर्ष को और तेज किया जाएगा। साथ ही 28 जुलाई को भी एसबीआई ग्रुप द्वारा देश व्यापी हड़ताल को समर्थन दिया जाएगा।  सहयोगी बैंकों के कर्मचारियों की मांगों पर विचार नहीं किया तो भविष्य में यूनियन द्वारा हड़ताल पर रणनीति बनाने पर भी विचार किया जाएगा। इस दौरान परविंद्र सिंह, प्रवीन शर्मा, हेमंत, कुलदीप, राकेश, परमजीत कौर, सुनीता, आशा वलेचा, गिरी बहादुर, केतन, नीलम, दिलेश्वर, तारा चंद, शिवानी, अनुराग, अनिल, विनीत और सदानंद मौजूद रहे।

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