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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   Steel thread plastic price hike due to AGT in Himachal

एजीटी से महंगा हुआ लोहा, प्लास्टिक, धागा और मार्बल

Sun, 26 Dec 2021 12:45 AM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 26 Dec 2021 12:45 AM IST
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ओमपाल सिंह
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बद्दी (सोलन)। हिमाचल में एडिशनल गुड्स टैक्स (एजीटी) लगने से अन्य राज्यों की तुलना में सामान मंहगा मिल रहा है। एजीटी प्रदेश से बाहर माल भेजने और लाने दोनों पर लगता है। यह टैक्स अन्य राज्यों में नहीं है।
व्यापारियों का कहना है कि जब सरकार ने जीएसटी लगा दिया है तो प्रदेश में एजीटी लगाने की क्यों जरूरत पड़ी। क्या हिमाचल में जीएसटी के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। अगर ऐसा नहीं है तो इसे लगाने के पीछे क्या कारण है। एजीटी लगने से यहां के व्यापारी प्रतिस्पर्धा की दौड़ में अन्य राज्यों को व्यापारियों से पिछड़ रहे हैं। यहां से बाहरी राज्यों में जाने वाले तैयार माल पर एजीटी लगने से उसकी उत्पादन लागत बढ़ जाती है।
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प्रदेश सरकार ने स्क्रैप, धागा, प्लास्टिक और मार्बल (ग्रेनाइट पत्थर) पर एजीटी लगाया है। यह टैक्स माल लाने और बाहर भेजने दोनों पर लगता है। प्लास्टिक पर सबसे ज्यादा 56 रुपये 25 पैसे प्रति टन व धागा व सक्रैप पर 37 रुपये 50 पैसे व मार्बल पर साढ़े सात रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से यह टैक्स लगता है।
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व्यापारियों का कहना है कि अगर वह बाहर से माल लाते हैं तो भी उन्हें यह टैक्स देना पड़ता है और यह माल किसी दूसरे राज्य में सप्लाई करना हो तो भी वहां पर यही टैक्स लगता है। लघु उद्योग भारती के प्रदेश महासचिव संजीव शर्मा ने बताया कि प्रदेश में लोह उद्योग में बाहर से स्क्रैप आता है। पहले स्क्रैप पर टैक्स लगता है और बाद में इसका सरिया बना कर सप्लाई करते हैं तो उस पर भी यह उतना ही टैक्स लगता है।
केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू कर वन नेशन वन टैक्स करने की बात कही थी लेकिन प्रदेश में एजीटी भी लिया जा रहा है। ऐसा लगता है कि हिमाचल देश का हिस्सा नहीं है। जब कोई भी राज्य इस टैक्स को नहीं ले रहा है तो हिमाचल पर इसका बोझ क्यों डाला जा रहा है।

लोहा उद्योग संचालक 75 रुपये प्रति टन कच्चा माल और तैयार माल पर टैक्स दे रहे हैं। बीबीएन में प्लास्टिक, लोहा, धागा मिल, मार्बल का काम करने वाले कारोबारियों ने सरकार से एजीटी समाप्त करने की मांग की है।
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