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Solan News: कृष्ण और सुदामा की मित्रता का किया वर्णन
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फ्रेंड्स काॅलोनी में श्रीमद्भागवत कथा संपन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ की फ्रेंड्स कॉलोनी में श्रीमद्भागवत कथा को पूर्णाहुति के साथ विराम दिया गया। व्यासपीठ डॉ. दीपराज खजूरिया ने कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मित्रता करो, तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी। सच्चा मित्र वही है, जो अपने मित्र की परेशानी को समझे और बिना बताए ही मदद कर दे। सुदामा गरीब अवश्य था किंतु दरिद्र नहीं था।
वे पत्नी के कहने पर मित्र कृष्ण से मिलने द्वारकापुरी जाते हैं। जब वे महल के द्वार पर पहुंचते हैं, तब प्रहरियों से कृष्ण को अपना मित्र बताते हैं और अंदर जाने की बात कहते हैं। सुदामा की यह बात सुनकर प्रहरी उपहास उड़ाते हैं और कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण का मित्र एक दरिद्र कैसे हो सकता है। प्रहरियों की बात सुनकर सुदामा मित्र से बिना मिले ही लौटने लगते हैं। तभी एक प्रहरी महल के अंदर जाकर भगवान श्रीकृष्ण को बताता है कि महल के द्वार पर एक सुदामा नाम का दरिद्र व्यक्ति खड़ा है। वह अपने आप को आपका मित्र बता रहा है। द्वारपाल की बात सुनकर भगवान कृष्ण नंगे पांव ही दौड़े चले आते हैं और अपने मित्र सुदामा को रोककर गले लगा लिया। कहने लगे कि तुम अपने मित्र से बिना मिले ही वापस जा रहे थे।
भगवान श्रीकृष्ण को सुदामा के गले लगा देखकर प्रहरी और नगरवासी अचंभित हो गए। इस अवसर पर नरेंद्र पुरी, संतोष शर्मा, हर्ष गुलाटी, रवींद्र ठाकुर, रमेश भारद्वाज, डीके शर्मा, संजीव भारद्वाज समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ की फ्रेंड्स कॉलोनी में श्रीमद्भागवत कथा को पूर्णाहुति के साथ विराम दिया गया। व्यासपीठ डॉ. दीपराज खजूरिया ने कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मित्रता करो, तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी। सच्चा मित्र वही है, जो अपने मित्र की परेशानी को समझे और बिना बताए ही मदद कर दे। सुदामा गरीब अवश्य था किंतु दरिद्र नहीं था।
वे पत्नी के कहने पर मित्र कृष्ण से मिलने द्वारकापुरी जाते हैं। जब वे महल के द्वार पर पहुंचते हैं, तब प्रहरियों से कृष्ण को अपना मित्र बताते हैं और अंदर जाने की बात कहते हैं। सुदामा की यह बात सुनकर प्रहरी उपहास उड़ाते हैं और कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण का मित्र एक दरिद्र कैसे हो सकता है। प्रहरियों की बात सुनकर सुदामा मित्र से बिना मिले ही लौटने लगते हैं। तभी एक प्रहरी महल के अंदर जाकर भगवान श्रीकृष्ण को बताता है कि महल के द्वार पर एक सुदामा नाम का दरिद्र व्यक्ति खड़ा है। वह अपने आप को आपका मित्र बता रहा है। द्वारपाल की बात सुनकर भगवान कृष्ण नंगे पांव ही दौड़े चले आते हैं और अपने मित्र सुदामा को रोककर गले लगा लिया। कहने लगे कि तुम अपने मित्र से बिना मिले ही वापस जा रहे थे।
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भगवान श्रीकृष्ण को सुदामा के गले लगा देखकर प्रहरी और नगरवासी अचंभित हो गए। इस अवसर पर नरेंद्र पुरी, संतोष शर्मा, हर्ष गुलाटी, रवींद्र ठाकुर, रमेश भारद्वाज, डीके शर्मा, संजीव भारद्वाज समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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