{"_id":"63695190d7d0ab286459df5e","slug":"solan-gurudwara-decorated-with-flowers-for-guru-nanakdev-s-birth-day-celebration-solan-news-sml4270724132","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज धूमधाम से मनाया जाएगा गुरुनानक देव का जयंती पर्व","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आज धूमधाम से मनाया जाएगा गुरुनानक देव का जयंती पर्व
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। दिवाली के 15 दिनों बाद मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरु नानक जयंती मनाई जाएगी। इसके लिए जिला भर के गुरुद्वारों को फूलों से सजा दिया है। गुरु पर्व पर होने वाले भव्य कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
इससे पहले ढोल मंजीरों के साथ प्रभात फेरियां निकाली जा चुकी हैं। गुरु नानक देव का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही हुआ था, इसलिए इस दिन को सिख धर्म के लोग मुख्य त्योहार की तरह मनाते हैं।
बता दें कि गुरु नानक देव 1469 में तलवंडी में जन्म हुआ। इन्हें सिख समुदाय के पहले गुरु और इस धर्म के संस्थापक माना जाता है। उन्होंने कई देशों में भी अपने उपदेश दिए थे इसलिए उन्हें नानक लामा नाम से भी जाना जाता है।
विज्ञापन
गुरु नानक देव जी ने अपनी जिंदगी को मानव समाज के कल्याण और उनकी भलाई के लिए समर्पित कर दिया था। गुरु नानक देव ने मृत्यु से पहले अपने शिष्य भाई लहना को उत्तराधिकारी घोषित किया था जो बाद में गुरु अंगद देव नाम से जाने गए।
फिर गुरु अंगद देव ही सिख धर्म के दूसरे गुरु बने। वहीं, सपरून गुरुद्वारा साहिब के चेयरमैन अमरप्रीत सिंह ने कहा कि गुरु नानक देव जयंती पर सुबह से शाम तक गुरुद्वारों में प्रार्थना और दर्शन का दौर चलेगा। गुरु नानक जयंती पर अखंड पाठ होगा। इसके बाद गुरुद्वारे में लंगर भी लगाया जाएगा।
विज्ञापन
सोलन। दिवाली के 15 दिनों बाद मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरु नानक जयंती मनाई जाएगी। इसके लिए जिला भर के गुरुद्वारों को फूलों से सजा दिया है। गुरु पर्व पर होने वाले भव्य कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
इससे पहले ढोल मंजीरों के साथ प्रभात फेरियां निकाली जा चुकी हैं। गुरु नानक देव का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही हुआ था, इसलिए इस दिन को सिख धर्म के लोग मुख्य त्योहार की तरह मनाते हैं।
विज्ञापन
बता दें कि गुरु नानक देव 1469 में तलवंडी में जन्म हुआ। इन्हें सिख समुदाय के पहले गुरु और इस धर्म के संस्थापक माना जाता है। उन्होंने कई देशों में भी अपने उपदेश दिए थे इसलिए उन्हें नानक लामा नाम से भी जाना जाता है।
विज्ञापन
गुरु नानक देव जी ने अपनी जिंदगी को मानव समाज के कल्याण और उनकी भलाई के लिए समर्पित कर दिया था। गुरु नानक देव ने मृत्यु से पहले अपने शिष्य भाई लहना को उत्तराधिकारी घोषित किया था जो बाद में गुरु अंगद देव नाम से जाने गए।
फिर गुरु अंगद देव ही सिख धर्म के दूसरे गुरु बने। वहीं, सपरून गुरुद्वारा साहिब के चेयरमैन अमरप्रीत सिंह ने कहा कि गुरु नानक देव जयंती पर सुबह से शाम तक गुरुद्वारों में प्रार्थना और दर्शन का दौर चलेगा। गुरु नानक जयंती पर अखंड पाठ होगा। इसके बाद गुरुद्वारे में लंगर भी लगाया जाएगा।