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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   School buses in Solan city and district running without speed governors and GPS

बिना स्पीड गवर्नर और जीपीएस के चल रहीं स्कूल बसें

Sat, 30 Apr 2022 12:18 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 30 Apr 2022 12:18 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सोलन। जिले में नियमों को ताक पर रखकर कई स्कूल बसें बिना स्पीड गवर्नर के दौड़ रही हैं। छोटी स्कूल बसों में जीपीएस और सीसीटीवी भी नहीं लगे हैं। स्कूल प्रबंधकों की हायर की गईं गाड़ियां बिना पीले रंग के पेंट से चल रही हैं। टैक्सियों और ऑटो में तो ऐसे इंतजाम दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रहे हैं।

जानकारी के अनुसार जिले में चलने वाले निजी स्कूलों को अपनी बसें चलाने से पहले इसकी पासिंग करवानी पड़ती है। पासिंग और फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही निजी स्कूलों को बस चलाने की अनुमति परिवहन विभाग से दी जाती है। शिक्षा हब सोलन के 50 फीसदी छोटे-बड़े निजी स्कूल प्रबंधन बच्चों को ट्रांसपोर्ट की सुविधा दे रहे हैं। 345 स्कूलों में 137 छोटी बड़ी गाड़ियां पंजीकृत की गई हैं।
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अमर उजाला की परिवहन अधिकारी नरेंद्र चौहान से सीधी बात :
सवाल : जिला मुख्यालय में कितने स्कूली वाहनों के पास फिटनेस प्रमाण पत्र है?
अधिकारी: मुख्यालय में 76 स्कूली बसें पंजीकृत हैं जिसमें सभी के पास फिटनेस प्रमाण पत्र है। हर साल बसों की फिटनेस जांच की जाती है।
सवाल: कितने स्कूली वाहनों में अग्निशमन किट, फर्स्ट एड बॉक्स जैसे जरूरी उपकरण है?
अधिकारी: स्कूली बसों को फिटनेस प्रमाण पत्र तभी जारी किया जाता है, जब निरीक्षण के दौरान सभी जरूरी सुविधाएं हों।
टैक्सियों और ऑटो के लिए नियम क्या हैं?
अधिकारी : ऑटो और टैक्सियों में सिर्फ वाहनों की क्षमता के अनुसार ही बच्चों को ढोया जा सकता है। ओवरलोडिंग करने पर कार्रवाई की जाती है।
स्कूल बसों के लिए ये हैं नियम :
- बस में सीसीटीवी, स्पीड गवर्नर और जीपीएस लगा होना चाहिए।
- बस चालक-परिचालक वर्दी में ड्यूटी पर होने चाहिए।
- बस चालक के पास पांच साल पुराना हैवी लाइसेंस होना चाहिए।
- पीले रंग की बस पर स्कूल बस और स्कूल का नाम लिखा होना चाहिए।
- फास्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र होने के अलावा आपातकालीन द्वार होना चाहिए।
- स्कूल बस का परमिट, लाइसेंस, पंजीकरण सही होना चाहिए।
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