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Solan News: टकसाल में बावड़ी का सैंपल फेल, फिर भी प्रवासी पी रहे पानी
Sat, 27 Apr 2024 11:56 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sat, 27 Apr 2024 11:56 PM IST
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टकसाल पंचायत में प्रतिबंधित किए गए प्राकृतिक जल स्रोत से पानी भरते हुए। संवाद
बावड़ी के पानी में पाया गया था खतरनाक कॉलिफार्म बैक्टीरिया
स्थानीय पंचायत की ओर से बावड़ी में लगाया गया है चेतावनी बोर्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
परवाणू(सोलन)। औद्योगिक क्षेत्र परवाणू के साथ सटे टकसाल गांव में एक बावड़ी का सैंपल फेल होने के बाद भी लोग इससे पानी भर रहे हैं और इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बावड़ी के आसपास झुग्गी-झोपडी वाले प्रवासी रहते हैं, जो इसी के पानी का इस्तेमाल करते हैं। इनके पास पीने के पानी का कोई साधन नहीं है और न ही यहां पर टैंकर आ रहा है। हालांकि स्थानीय पंचायत की ओर से इस बावड़ी में चेतावनी बोर्ड लगा दिया गया है। बोर्ड में लिखा है कि यहां का पानी पीने योग्य नहीं हैं। बावजूद इसके प्रवासी इसी बावड़ी से पानी भर रहे हैं। जिससे डायरिया के मामले अब कम होना मुश्किल है।
गौर रहे कि परवाणू शहर में पिछले तीन सप्ताह से डायरिया फैला है। रोजाना 20 से 25 मामले डायरिया के ईएसआई अस्पताल में पहुंच रहे हैं और इसमें टकसाल गांव से भी कई मामले आ रहे हैं। जिसके चलते गांव में बनी इस बावड़ी के पानी के सैंपल भी लिए गए। वहीं रिपोर्ट में यह सैंपल फेल पाए गए और इसमें खतरनाक कॉलिफार्म बैक्टीरिया पाया गया। जिस पर स्थानीय प्रशासन ने पंचायत को यहां पर चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए थे।
उधर, इस बारे में टकसाल पंचायत के उपप्रधान नीरज शर्मा ने बताया कि टकसाल पंचायत की बावड़ी का सैंपल फेल होने पर प्रशासन के आदेशानुसार चेतावनी बोर्ड लगा दिया गया है। उन्होंने कहा कि यहां का पानी कोई नहीं पीता, लोग कपड़े धोने और नहाने के लिए पानी का उपयोग कर रहे हैं।
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स्थानीय पंचायत की ओर से बावड़ी में लगाया गया है चेतावनी बोर्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
परवाणू(सोलन)। औद्योगिक क्षेत्र परवाणू के साथ सटे टकसाल गांव में एक बावड़ी का सैंपल फेल होने के बाद भी लोग इससे पानी भर रहे हैं और इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बावड़ी के आसपास झुग्गी-झोपडी वाले प्रवासी रहते हैं, जो इसी के पानी का इस्तेमाल करते हैं। इनके पास पीने के पानी का कोई साधन नहीं है और न ही यहां पर टैंकर आ रहा है। हालांकि स्थानीय पंचायत की ओर से इस बावड़ी में चेतावनी बोर्ड लगा दिया गया है। बोर्ड में लिखा है कि यहां का पानी पीने योग्य नहीं हैं। बावजूद इसके प्रवासी इसी बावड़ी से पानी भर रहे हैं। जिससे डायरिया के मामले अब कम होना मुश्किल है।
गौर रहे कि परवाणू शहर में पिछले तीन सप्ताह से डायरिया फैला है। रोजाना 20 से 25 मामले डायरिया के ईएसआई अस्पताल में पहुंच रहे हैं और इसमें टकसाल गांव से भी कई मामले आ रहे हैं। जिसके चलते गांव में बनी इस बावड़ी के पानी के सैंपल भी लिए गए। वहीं रिपोर्ट में यह सैंपल फेल पाए गए और इसमें खतरनाक कॉलिफार्म बैक्टीरिया पाया गया। जिस पर स्थानीय प्रशासन ने पंचायत को यहां पर चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए थे।
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उधर, इस बारे में टकसाल पंचायत के उपप्रधान नीरज शर्मा ने बताया कि टकसाल पंचायत की बावड़ी का सैंपल फेल होने पर प्रशासन के आदेशानुसार चेतावनी बोर्ड लगा दिया गया है। उन्होंने कहा कि यहां का पानी कोई नहीं पीता, लोग कपड़े धोने और नहाने के लिए पानी का उपयोग कर रहे हैं।
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