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Solan News: धान की फसल पककर तैयार, कटाई के लिए नहीं मिल रहे मजदूर
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दोगुना दिहाड़ी देने के बाद भी फसल की कटाई नहीं हो पा रही शुरू
उत्तर प्रदेश और बिहार में नए प्रोजेक्ट आने से नहीं आ रहे मजदूर
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। बीबीएन में मजदूर न मिलने के कारण धान की कटाई का कार्य रूक गया है। किसानों की फसल पककर तैयार है, लेकिन मजदूर नहीं मिल रहे हैं। दिहाड़ी पर धान की कटाई का कार्य काफी महंगा पड़ रहा है, जो पिछले साल से दोगुना है। अभी तक मात्र पांच फीसदी ही धान की कटाई हो पाई है। उत्तर प्रदेश और बिहार में केंद्र सरकार की ओर से बड़े प्रोजेक्ट लगाने से मजदूर वहीं पर ही रुक गए हैं जिससे यहां पर मजदूर नहीं मिल रहे।
बीबीएन में इस बार चार हजार हेक्टेयर जमीन पर धान लगाया गया है। लोगों ने धान तो लगा दिया है लेकिन कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। पराली के लालच में लोग कंबाईन से धान की कटाई का कार्य नहीं कराते हैं। पिछले साल छह हजार रुपये एकड़ रेट थे, लेकिन इस बार दस हजार रुपये देने के बाद भी मजदूर नहीं आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यूपी व बिहार में बड़े प्रोजेक्ट आने के बाद मजदूर यहां पर नहीं आ रहे हैं जिससे अब धान खेतों में खराब हो रहा है। नंदपुर पंचायत के किसान अमर चंद, मुकेश कुमार, सोढ़ी राम, भोपाल ठाकुर, मस्त महोम्मद ने बताया कि पंचायत में 40 हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती हुई है, लेकिन इस वर्ष धान परकर गिरना शुरू हो गया है लेकिन कटाई के लिए लेबर नहीं मिल रही है। कुछ लोग दिहाड़ी पर धान कटा रहे हैं। जिसमें सुबह 9 से पांच बजे तक मजदूर धान की कटाई करने के साढ़े पांच रुपये ले रहे हैं। इस हिसाब से एक एकड़ धान की कटाई का कार्य 13 हजार में पड़ रहा है जो पिछले साल से दोगुना दाम है।
उधर, कृषि विभाग के विषय वाद विशेषज्ञ डॉ. संदीप गौतम ने बताया कि यूपी व बिहार से धान की कटाई करने वाली लेबर नहीं आई है। इससे लोगों को अब धान की कटाई करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। दोगुना पैसा देने के बाद भी मजदूर कटाई करने के लिए नहीं मिल रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश और बिहार में नए प्रोजेक्ट आने से नहीं आ रहे मजदूर
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। बीबीएन में मजदूर न मिलने के कारण धान की कटाई का कार्य रूक गया है। किसानों की फसल पककर तैयार है, लेकिन मजदूर नहीं मिल रहे हैं। दिहाड़ी पर धान की कटाई का कार्य काफी महंगा पड़ रहा है, जो पिछले साल से दोगुना है। अभी तक मात्र पांच फीसदी ही धान की कटाई हो पाई है। उत्तर प्रदेश और बिहार में केंद्र सरकार की ओर से बड़े प्रोजेक्ट लगाने से मजदूर वहीं पर ही रुक गए हैं जिससे यहां पर मजदूर नहीं मिल रहे।
बीबीएन में इस बार चार हजार हेक्टेयर जमीन पर धान लगाया गया है। लोगों ने धान तो लगा दिया है लेकिन कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। पराली के लालच में लोग कंबाईन से धान की कटाई का कार्य नहीं कराते हैं। पिछले साल छह हजार रुपये एकड़ रेट थे, लेकिन इस बार दस हजार रुपये देने के बाद भी मजदूर नहीं आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यूपी व बिहार में बड़े प्रोजेक्ट आने के बाद मजदूर यहां पर नहीं आ रहे हैं जिससे अब धान खेतों में खराब हो रहा है। नंदपुर पंचायत के किसान अमर चंद, मुकेश कुमार, सोढ़ी राम, भोपाल ठाकुर, मस्त महोम्मद ने बताया कि पंचायत में 40 हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती हुई है, लेकिन इस वर्ष धान परकर गिरना शुरू हो गया है लेकिन कटाई के लिए लेबर नहीं मिल रही है। कुछ लोग दिहाड़ी पर धान कटा रहे हैं। जिसमें सुबह 9 से पांच बजे तक मजदूर धान की कटाई करने के साढ़े पांच रुपये ले रहे हैं। इस हिसाब से एक एकड़ धान की कटाई का कार्य 13 हजार में पड़ रहा है जो पिछले साल से दोगुना दाम है।
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उधर, कृषि विभाग के विषय वाद विशेषज्ञ डॉ. संदीप गौतम ने बताया कि यूपी व बिहार से धान की कटाई करने वाली लेबर नहीं आई है। इससे लोगों को अब धान की कटाई करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। दोगुना पैसा देने के बाद भी मजदूर कटाई करने के लिए नहीं मिल रहे हैं।
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