{"_id":"64e79a1acd8a92c6af09e386","slug":"research-on-coffee-will-start-from-neri-college-prof-chandel-solan-news-c-176-1-ssml1040-5990-2023-08-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"कॉफी पर होंगे अनुसंधान, नेरी काॅलेज से होगी शुरूआत : प्रो चंदेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कॉफी पर होंगे अनुसंधान, नेरी काॅलेज से होगी शुरूआत : प्रो चंदेल
Thu, 24 Aug 2023 11:27 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Thu, 24 Aug 2023 11:27 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोलन। हिमाचल के उपर्युक्त क्षेत्रों के लिए कॉफी को नकदी फसल बनाने के लिए विभिन्न मुद्दों और अपनाई जाने वाली रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए नौणी विवि में एक दिवसीय सेमीनार हुआ। यह सेमीनार राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना की संस्थागत विकास योजना के समर्थन से आयोजित किया गया।
घुमारवीं के विधायक राजेश धर्माणी मुख्यातिथि रहे। उन्होंने राज्य में बड़े स्तर पर कॉफी की खेती की संभावना पर विभिन्न हितधारकों के बीच चर्चा की। धर्माणी ने विभिन्न कॉफी पर किस्में जो अनुकूल वातावरण वाले क्षेत्रों में खेती के लिए उपयुक्त हो सकती हैं, पर शोध करने के लिए विवि से तकनीकी सहयोग मांगा है। धर्माणी ने कहा कि बिलासपुर जिले के कुछ हिस्सों में किसानों द्वारा कॉफी उगाई जा रही है। इसकी संभावना पर आगे शोध अध्ययन करने की जरूरत है ताकि हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खेती की संभावना खोजी जा सके। कर्नाटक के कॉफी विशेषज्ञों और उद्यमियों ने भी कॉफी की खेती के विभिन्न पहलुओं पर विचार प्रस्तुत किए।
कुलपति प्रोफेसर राजेश्वर सिंह चंदेल ने उन क्षेत्रों में कॉफी पर अनुसंधान परीक्षण आयोजित करने में विवि के सभी समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट छात्रों को अनुसंधान समस्याएं सौंपने के साथ-साथ विवि और नेरी कॉलेज में परीक्षण शुरू किए जाएंगे। कहा कि विवि राज्य में कॉफी की खेती पर पहले से किए गए काम को आगे बढ़ाएगा। कॉफी में हिमाचल के लिए एक नई नकदी फसल बनने की गुंजाइश है। इससे फसल विविधीकरण में मदद मिलेगी और एक ही फसल पर निर्भरता कम होगी।
विज्ञापन
एनएएचईपी आईडीपी के प्रधान अंवेषक डॉ. केके रैना ने इस परियोजना के तहत विवि द्वारा किए गए कौशल उन्नयन और उद्यमिता गतिविधियों के बारे में बताया। इस दौरान कृषि विभाग के वैधानिक अधिकारी, विभागाध्यक्ष और वैज्ञानिक, अधिकारी शामिल हुए।
विज्ञापन
घुमारवीं के विधायक राजेश धर्माणी मुख्यातिथि रहे। उन्होंने राज्य में बड़े स्तर पर कॉफी की खेती की संभावना पर विभिन्न हितधारकों के बीच चर्चा की। धर्माणी ने विभिन्न कॉफी पर किस्में जो अनुकूल वातावरण वाले क्षेत्रों में खेती के लिए उपयुक्त हो सकती हैं, पर शोध करने के लिए विवि से तकनीकी सहयोग मांगा है। धर्माणी ने कहा कि बिलासपुर जिले के कुछ हिस्सों में किसानों द्वारा कॉफी उगाई जा रही है। इसकी संभावना पर आगे शोध अध्ययन करने की जरूरत है ताकि हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खेती की संभावना खोजी जा सके। कर्नाटक के कॉफी विशेषज्ञों और उद्यमियों ने भी कॉफी की खेती के विभिन्न पहलुओं पर विचार प्रस्तुत किए।
विज्ञापन
कुलपति प्रोफेसर राजेश्वर सिंह चंदेल ने उन क्षेत्रों में कॉफी पर अनुसंधान परीक्षण आयोजित करने में विवि के सभी समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट छात्रों को अनुसंधान समस्याएं सौंपने के साथ-साथ विवि और नेरी कॉलेज में परीक्षण शुरू किए जाएंगे। कहा कि विवि राज्य में कॉफी की खेती पर पहले से किए गए काम को आगे बढ़ाएगा। कॉफी में हिमाचल के लिए एक नई नकदी फसल बनने की गुंजाइश है। इससे फसल विविधीकरण में मदद मिलेगी और एक ही फसल पर निर्भरता कम होगी।
विज्ञापन
एनएएचईपी आईडीपी के प्रधान अंवेषक डॉ. केके रैना ने इस परियोजना के तहत विवि द्वारा किए गए कौशल उन्नयन और उद्यमिता गतिविधियों के बारे में बताया। इस दौरान कृषि विभाग के वैधानिक अधिकारी, विभागाध्यक्ष और वैज्ञानिक, अधिकारी शामिल हुए।