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Solan News: स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के उत्पाद बने सैलानियों की पसंद
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चायल में पर्यटकों को उत्पाद बेचती स्वयं सहायता समूह संतोषी की महिला सदस्य। संवाद
चायल में पर्यटकों को भा रहे चीड़ की पत्तियों के उत्पाद,आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रहीं समूह की महिलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
चायल (सोलन)। पर्यटन नगरी चायल में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत कार्यरत संतोषी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का हुनर पर्यटकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कला के मेल से तैयार किए गए हस्तनिर्मित उत्पाद इन दिनों सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। समूह की महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए चीड़ की गिरी हुई पत्तियों से कई नायाब उत्पाद तैयार किए हैं। इनमें रोटी रखने की टोकरियां, सुंदर पेन स्टैंड और आकर्षक लैंप शेड शामिल हैं। इन ईको-फ्रेंडली वस्तुओं को देखने के बाद सैलानी खासे प्रभावित हो रहे हैं और इनकी खूब खरीदारी कर रहे हैं। संतोषी स्वयं सहायता समूह की प्रधान शांता ठाकुर ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। इन प्रयासों से उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है। आने वाले समय में बाजार की मांग को देखते हुए और भी नए व आधुनिक उत्पाद तैयार करने की योजना है।
हाथ से बुने गर्म कपड़ों की भी भारी मांग
चायल घूमने आने वाले पर्यटक न केवल चीड़ के उत्पादों, बल्कि महिलाओं के हाथ से बुनी गई ऊनी टोपियों, जुराबों और मफलरों को भी बेहद पसंद कर रहे हैं। हस्तशिल्प की ये वस्तुएं न केवल गुणवत्ता में बेहतर हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति की झलक भी पेश करती हैं। इससे जहां महिलाओं के हुनर को सराहना मिल रही है, वहीं उनकी आर्थिकी भी मजबूत हो रही है।
सं
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संवाद न्यूज एजेंसी
चायल (सोलन)। पर्यटन नगरी चायल में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत कार्यरत संतोषी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का हुनर पर्यटकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कला के मेल से तैयार किए गए हस्तनिर्मित उत्पाद इन दिनों सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। समूह की महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए चीड़ की गिरी हुई पत्तियों से कई नायाब उत्पाद तैयार किए हैं। इनमें रोटी रखने की टोकरियां, सुंदर पेन स्टैंड और आकर्षक लैंप शेड शामिल हैं। इन ईको-फ्रेंडली वस्तुओं को देखने के बाद सैलानी खासे प्रभावित हो रहे हैं और इनकी खूब खरीदारी कर रहे हैं। संतोषी स्वयं सहायता समूह की प्रधान शांता ठाकुर ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। इन प्रयासों से उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है। आने वाले समय में बाजार की मांग को देखते हुए और भी नए व आधुनिक उत्पाद तैयार करने की योजना है।
हाथ से बुने गर्म कपड़ों की भी भारी मांग
चायल घूमने आने वाले पर्यटक न केवल चीड़ के उत्पादों, बल्कि महिलाओं के हाथ से बुनी गई ऊनी टोपियों, जुराबों और मफलरों को भी बेहद पसंद कर रहे हैं। हस्तशिल्प की ये वस्तुएं न केवल गुणवत्ता में बेहतर हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति की झलक भी पेश करती हैं। इससे जहां महिलाओं के हुनर को सराहना मिल रही है, वहीं उनकी आर्थिकी भी मजबूत हो रही है।
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