{"_id":"613b9c5a8ebc3ef2c0713d66","slug":"people-in-solan-celebrate-ganesh-chaturthi-with-full-pomp-and-show-solan-news-sml38334528","type":"story","status":"publish","title_hn":"गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से गूंजे बाजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से गूंजे बाजार
विज्ञापन
सोलन में श्री गणेश चतुर्थी के शुभारंभ पर मंदिर में मूर्ति लेकर आए श्रद्वालु पूजा करते हुए। अजय
- फोटो : SOLAN
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोलन। शहर में श्री गणेश चतुर्थी को लेकर चौक बाजार से लक्कड़ बाजार तक शोभायात्रा का आयोजन किया गया। कोविड के चलते 20 से ज्यादा लोगों को इसमें शामिल नहीं किया गया। आठ दिनों तक श्रीगणेश की मंदिर में पूजा-अर्चना की जाएगी।
कोरोना से पहले यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता था। बाजारों में सभी दुकानदार भंडारे का आयोजन करते थे। कोविड को लेकर जारी बंदिशें लोगों की आस्था को तोड़ रही हैं। नौ दिनों तक पूजा-अर्चना के बाद श्रीगणेश की मूर्ति का विसर्जन गिरि नदी में किया जाएगा।
शुक्रवार को शहर में निकाली शोभायात्रा में बच्चे ढोल की थाप पर नाचते दिखाई दिए। गणेश चतुर्थी के अंतिम दिन लक्कड़ बाजार में मंदिर कमेटी ने कार्यक्रम और प्रसाद बांटा जाएगा।
विज्ञापन
मां दुर्गा सेवा समिति लक्कड़ बाजार के प्रधान डीएन गुप्ता ने कहा कि कोविड के चलते शोभायात्रा में ज्यादा लोगों को शामिल नहीं किया गया। अगले आठ दिनों तक मंदिर में श्रीगणेश पूजा की जाएगी। अंतिम दिन मूर्ति का विसर्जन गिरि नदी में किया जाएगा।
विज्ञापन
कोरोना से पहले यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता था। बाजारों में सभी दुकानदार भंडारे का आयोजन करते थे। कोविड को लेकर जारी बंदिशें लोगों की आस्था को तोड़ रही हैं। नौ दिनों तक पूजा-अर्चना के बाद श्रीगणेश की मूर्ति का विसर्जन गिरि नदी में किया जाएगा।
विज्ञापन
शुक्रवार को शहर में निकाली शोभायात्रा में बच्चे ढोल की थाप पर नाचते दिखाई दिए। गणेश चतुर्थी के अंतिम दिन लक्कड़ बाजार में मंदिर कमेटी ने कार्यक्रम और प्रसाद बांटा जाएगा।
विज्ञापन
मां दुर्गा सेवा समिति लक्कड़ बाजार के प्रधान डीएन गुप्ता ने कहा कि कोविड के चलते शोभायात्रा में ज्यादा लोगों को शामिल नहीं किया गया। अगले आठ दिनों तक मंदिर में श्रीगणेश पूजा की जाएगी। अंतिम दिन मूर्ति का विसर्जन गिरि नदी में किया जाएगा।