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गेहूं की कटाई के लिए नहीं मिल रहे मजदूर
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नालागढ़(सोलन)। नालागढ़ उपमंडल में किसानों को गेहूं की फसल की कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। कारण यह है कि दो साल पहले कोरोना महामारी के दौरान घर गए श्रमिक वापस नहीं आए हैं। अब बीमारी का प्रभाव कम होने के बावजूद भी किसानों को मजदूरों की कमी से जूझना पड़ रहा है, जो थोड़े बहुत मजदूर यहां पर हैं वे कटाई के लिए ज्यादा पैसों की मांग कर रहे हैं। इससे किसानों की परेशानियां कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं।
बीबीएन में 12 हजार हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की खेती होती है। यहां के किसान गेहूं का बीज भी तैयार करते हैं। यहां पर 40 फीसदी जमीन पर सिंचाई की सुविधा है और 60 फीसदी खेती बारिश पर निर्भर है। इस वर्ष समय पर बारिश होने से गेहूं की अच्छी फसल थी, लेकिन मार्च माह में पड़ी रिकॉर्ड गर्मी ने फसल को समय से पहले ही सुखा दिया। जिन स्थानों पर सिंचाई के लिए पानी नहीं है, वहां पर गेहूं का दाना छोटा पड़ गया है। इसके अलावा उत्पादन पर भी असर पड़ा है। खेड़ा के किसान अवतार सिंह, मंझौली के सुच्चा सिंह, ढांग निहली के साध राम, नंगल के टेकचंद, बरुणा से विनोद ठाकुर, जगजीत सिंह जगा, बेरछा से जोगिंद्रपाल जिंदू, गुल्लरवाला से विजय भल्ला, पंजैहरा से हरमेश चौधरी, भोगपुर से नराता राम, किरपालपुर से गुरप्रताप सिंह और संजीव कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष मजदूर एक किला (पांच बीघा) गेहूं काटने के 4500 रुपये लेते थे, लेकिन इस वर्ष मजदूरों की कमी होने के चलते एक किला कटाई के लिए सात हजार रुपये मांग रहे हैं। किसान बढ़ी हुई मजदूरी देने को भी तैयार हैं, लेकिन उसके बावजूद किसानों की मजदूर नहीं मिल रहे हैं। इससे किसानों की फसल खराब होने के कगार पर है। उधर, कृषि विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ राजेश धीमान ने बताया कि बीबीएन में गेहूं की फसल पककर तैयार है। किसान समय रहते फसल कटाई का कार्य पूरा करें। नालागढ़ अनाज मंडी में गेहूं की खरीद का कार्य शुरू हो चुका है। किसान समय पर अपनी फसल को बेचने के लिए मंडी में पहुंचाएं।
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बीबीएन में 12 हजार हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की खेती होती है। यहां के किसान गेहूं का बीज भी तैयार करते हैं। यहां पर 40 फीसदी जमीन पर सिंचाई की सुविधा है और 60 फीसदी खेती बारिश पर निर्भर है। इस वर्ष समय पर बारिश होने से गेहूं की अच्छी फसल थी, लेकिन मार्च माह में पड़ी रिकॉर्ड गर्मी ने फसल को समय से पहले ही सुखा दिया। जिन स्थानों पर सिंचाई के लिए पानी नहीं है, वहां पर गेहूं का दाना छोटा पड़ गया है। इसके अलावा उत्पादन पर भी असर पड़ा है। खेड़ा के किसान अवतार सिंह, मंझौली के सुच्चा सिंह, ढांग निहली के साध राम, नंगल के टेकचंद, बरुणा से विनोद ठाकुर, जगजीत सिंह जगा, बेरछा से जोगिंद्रपाल जिंदू, गुल्लरवाला से विजय भल्ला, पंजैहरा से हरमेश चौधरी, भोगपुर से नराता राम, किरपालपुर से गुरप्रताप सिंह और संजीव कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष मजदूर एक किला (पांच बीघा) गेहूं काटने के 4500 रुपये लेते थे, लेकिन इस वर्ष मजदूरों की कमी होने के चलते एक किला कटाई के लिए सात हजार रुपये मांग रहे हैं। किसान बढ़ी हुई मजदूरी देने को भी तैयार हैं, लेकिन उसके बावजूद किसानों की मजदूर नहीं मिल रहे हैं। इससे किसानों की फसल खराब होने के कगार पर है। उधर, कृषि विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ राजेश धीमान ने बताया कि बीबीएन में गेहूं की फसल पककर तैयार है। किसान समय रहते फसल कटाई का कार्य पूरा करें। नालागढ़ अनाज मंडी में गेहूं की खरीद का कार्य शुरू हो चुका है। किसान समय पर अपनी फसल को बेचने के लिए मंडी में पहुंचाएं।
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