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Solan News: नौणी यूनिवर्सिटी में वीसी-रजिस्ट्रार विवाद, सरकार के दखल से बची कुर्सी, लेकिन शर्तों के चक्रव्यूह में उलझे सिद्धार्थ आचार्य
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नौणी विवि में उपकुलपति और रजिस्ट्रार के बीच छिड़ा प्रशासनिक विवाद नया मोड़ ले चुका है। प्रदेश सरकार और बागवानी विभाग के हस्तक्षेप के बाद वीसी के उस आदेश को पलट दिया गया है, जिसके तहत रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां छीन ली गई थीं।
हस्तक्षेप के बाद रजिस्ट्रार की कुर्सी तो बहाल हो गई है, लेकिन वीसी कार्यालय की ओर से जारी बहाली आदेश में ऐसी कड़ी शर्तें थोप दी गई हैं, जिससे उनकी राह आसान नजर नहीं आ रही। जानकारी के अनुसार, बीते 5 अक्तूबर को कैंपस में हुए छात्र आंदोलन के दौरान वीसी कार्यालय में स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी और नौबत हाथापाई तक पहुंच गई थी। आरोप है कि वीसी द्वारा फोन पर पुलिस बुलाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद रजिस्ट्रार ने उनकी बात नहीं मानी। इसके बाद ही वीसी ने शक्तियां वापस लेने का फरमान जारी किया था। अब बहाली के साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि कैंपस में दोबारा असंतोष फैला तो सीधी कार्रवाई होगी। यूनिवर्सिटी इस समय करीब 150 करोड़ रुपये के भीषण वित्तीय संकट से जूझ रही है, जिससे कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन-पेंशन पर तलवार लटकी हुई है। बहाली आदेश में रजिस्ट्रार को निर्देश दिया गया है कि वे 3 दिनों के भीतर पूरी वित्तीय स्थिति की समीक्षा रिपोर्ट और सरकार से ग्रांट लाने की ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करें।
इनसेट
मकाऊ-थाईलैंड दौरों की जांच रिपोर्ट पर सख्त रुख
सरकारी खर्चे पर किए गए मकाऊ और थाईलैंड दौरों की जांच रिपोर्ट बीते 4 महीनों से दबी पड़ी थी। महामहिम राज्यपाल के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद यह रिपोर्ट सरकार को नहीं भेजी गई थी। अब रजिस्ट्रार को आदेश दिया गया है कि इस जांच रिपोर्ट को तुरंत अंतिम रूप देकर सरकार को सौंपा जाए।
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इनसेट
पावर काम के लिए, मनमानी के लिए नहीं
बहाली आदेश में दो टूक शब्दों में कहा गया है कि पावर काम करने के लिए दी गई है, मनमानी के लिए नहीं। आगामी दिनों में राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश के प्रस्तावित दौरों के प्रबंधन, कोर्ट केसों की पैरवी और वीआईपी प्रोटोकॉल की पूरी जिम्मेदारी रजिस्ट्रार के सिर रखी गई है। साफ ताकीद की गई है कि किसी भी तरह की चूक होने पर यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।
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सोलन। नौणी विवि में उपकुलपति और रजिस्ट्रार के बीच छिड़ा प्रशासनिक विवाद नया मोड़ ले चुका है। प्रदेश सरकार और बागवानी विभाग के हस्तक्षेप के बाद वीसी के उस आदेश को पलट दिया गया है, जिसके तहत रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां छीन ली गई थीं।
हस्तक्षेप के बाद रजिस्ट्रार की कुर्सी तो बहाल हो गई है, लेकिन वीसी कार्यालय की ओर से जारी बहाली आदेश में ऐसी कड़ी शर्तें थोप दी गई हैं, जिससे उनकी राह आसान नजर नहीं आ रही। जानकारी के अनुसार, बीते 5 अक्तूबर को कैंपस में हुए छात्र आंदोलन के दौरान वीसी कार्यालय में स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी और नौबत हाथापाई तक पहुंच गई थी। आरोप है कि वीसी द्वारा फोन पर पुलिस बुलाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद रजिस्ट्रार ने उनकी बात नहीं मानी। इसके बाद ही वीसी ने शक्तियां वापस लेने का फरमान जारी किया था। अब बहाली के साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि कैंपस में दोबारा असंतोष फैला तो सीधी कार्रवाई होगी। यूनिवर्सिटी इस समय करीब 150 करोड़ रुपये के भीषण वित्तीय संकट से जूझ रही है, जिससे कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन-पेंशन पर तलवार लटकी हुई है। बहाली आदेश में रजिस्ट्रार को निर्देश दिया गया है कि वे 3 दिनों के भीतर पूरी वित्तीय स्थिति की समीक्षा रिपोर्ट और सरकार से ग्रांट लाने की ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करें।
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मकाऊ-थाईलैंड दौरों की जांच रिपोर्ट पर सख्त रुख
सरकारी खर्चे पर किए गए मकाऊ और थाईलैंड दौरों की जांच रिपोर्ट बीते 4 महीनों से दबी पड़ी थी। महामहिम राज्यपाल के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद यह रिपोर्ट सरकार को नहीं भेजी गई थी। अब रजिस्ट्रार को आदेश दिया गया है कि इस जांच रिपोर्ट को तुरंत अंतिम रूप देकर सरकार को सौंपा जाए।
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पावर काम के लिए, मनमानी के लिए नहीं
बहाली आदेश में दो टूक शब्दों में कहा गया है कि पावर काम करने के लिए दी गई है, मनमानी के लिए नहीं। आगामी दिनों में राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश के प्रस्तावित दौरों के प्रबंधन, कोर्ट केसों की पैरवी और वीआईपी प्रोटोकॉल की पूरी जिम्मेदारी रजिस्ट्रार के सिर रखी गई है। साफ ताकीद की गई है कि किसी भी तरह की चूक होने पर यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।