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Solan News: कंस वध और रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया
Mon, 27 May 2024 11:45 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Mon, 27 May 2024 11:45 PM IST
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गुल्लरवाला में आयोजित भागवत कथा का श्रवण करते हुए भक्त गण। संवाद
गुल्लरवाला दुर्गा मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। दुर्गा मंदिर परिसर गुल्लरवाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन व्यासपीठ आचार्य हरबंस लाल शास्त्री ने कंस वध और कृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि कंस ने अक्रूर को भेज कर बलराम और कृष्ण को मथुरा बुला लिया और उन्हें मारने के विभिन्न उपाय किए किंतु अंत में कृष्ण ने कंस का वध कर दिया। उसके बाद भगवान ने अपने नाना उग्रसेन और अपने माता-पिता को कारागार से मुक्त किया।
रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि राजा भीष्मक ने अपने पुत्र रुक्म के कहने पर रुक्मिणी का विवाह चेदीराज शिशुपाल से तय कर दिया था। रुक्म शिशुपाल का खास मित्र था। दूसरी ओर रुक्मिणी मन से श्रीकृष्ण को अपना पति मान चुकी थीं। रुक्मिणी और शिशुपाल के विवाह की तारीख तय हो गई। रुक्मिणी ने कृष्ण को संदेश भेज कर उसे ले जाने का आग्रह किया। संदेश मिलते ही श्रीकृष्ण विदर्भ पहुंच गए। जब शिशुपाल विवाह के लिए द्वार पर आया तभी कृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर लिया। जब रुक्मिणी के भाई रुक्म को पता चला तो वह अपने सैनिकों के साथ कृष्ण के पीछे गया। फिर श्रीकृष्ण और रुक्म के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें द्वारिकाधीश विजयी हुए। इसके बाद श्रीकृष्ण रुक्मिणी को लेकर द्वारिका आ गए और दोनों ने विवाह कर लिया।
इस मौके पर दून के पूर्व विधायक परमजीत सिंह पम्मी, इंस्पेक्टर हरभजन सिंह, बाजिंद्र सिंह, रोशन लाल, परमजीत सिंह, ज्ञान चंद, सीता राम,भाग सिंह चौधरी, राजिंद्र झल्ला सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। दुर्गा मंदिर परिसर गुल्लरवाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन व्यासपीठ आचार्य हरबंस लाल शास्त्री ने कंस वध और कृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि कंस ने अक्रूर को भेज कर बलराम और कृष्ण को मथुरा बुला लिया और उन्हें मारने के विभिन्न उपाय किए किंतु अंत में कृष्ण ने कंस का वध कर दिया। उसके बाद भगवान ने अपने नाना उग्रसेन और अपने माता-पिता को कारागार से मुक्त किया।
रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि राजा भीष्मक ने अपने पुत्र रुक्म के कहने पर रुक्मिणी का विवाह चेदीराज शिशुपाल से तय कर दिया था। रुक्म शिशुपाल का खास मित्र था। दूसरी ओर रुक्मिणी मन से श्रीकृष्ण को अपना पति मान चुकी थीं। रुक्मिणी और शिशुपाल के विवाह की तारीख तय हो गई। रुक्मिणी ने कृष्ण को संदेश भेज कर उसे ले जाने का आग्रह किया। संदेश मिलते ही श्रीकृष्ण विदर्भ पहुंच गए। जब शिशुपाल विवाह के लिए द्वार पर आया तभी कृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर लिया। जब रुक्मिणी के भाई रुक्म को पता चला तो वह अपने सैनिकों के साथ कृष्ण के पीछे गया। फिर श्रीकृष्ण और रुक्म के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें द्वारिकाधीश विजयी हुए। इसके बाद श्रीकृष्ण रुक्मिणी को लेकर द्वारिका आ गए और दोनों ने विवाह कर लिया।
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इस मौके पर दून के पूर्व विधायक परमजीत सिंह पम्मी, इंस्पेक्टर हरभजन सिंह, बाजिंद्र सिंह, रोशन लाल, परमजीत सिंह, ज्ञान चंद, सीता राम,भाग सिंह चौधरी, राजिंद्र झल्ला सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।
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