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स्कूल प्रबंधन वार्षिक फीस पर अड़ा, अभिभावक नहीं देने को तैयार
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बद्दी (सोलन)। बद्दी के एक निजी स्कूल में वार्षिक फीस को लेकर अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही। स्कूल प्रबंधन पूरी वार्षिक फीस लेने पर अड़ा रहा, अभिभावक इसके लिए तैयार नहीं। अभिभावकों ने कहा कि अगर उनसे जबरन फीस ली जाएगी तो वे ग्रुप से अपने बच्चों को हटाकर ऑनलाइन पढ़ाई नहीं करवाएंगे। अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन को कहा कि पूरा साल स्कूल नहीं लगे तो वे वार्षिक शुल्क क्यों दें जबकि ट्यूशन फीस वे लगातार दे रहे हैं।
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि फीस देनी ही पड़ेगी। अगर कोई फीस नहीं देगा तो वे अपने बच्चों को स्कूल से हटा सकता है। अभिभावक संदीप कुमार, जयेश पाटिल, दिनेश चौहान, रजनी बाला, सुम्मी राय, नितिन चौहान, आरपी सिंह, रमेश महर्षि, राजीव गर्ग व राघव के नेतृत्व में चार दर्जन अभिभावक स्कूल गए थे। स्कूल प्रबंधकों ने अभिभावकों को बातचीत के लिए बुलाया था। अभिभावकों ने कहा कि वह ट्यूशन फीस देने को तैयार हैं। वर्तमान में स्कूल नहीं लग रहे हैं। ऐसे में पहले जहां आठ घंटे पढ़ाई होती थी, अब मात्र दो घंटे पढ़ाई हो रही है। स्टाफ को आधे से भी कम वेतन दे रहे हैं। बस खड़ी है और बस चालक दूसरी जगह कार्य कर रहे हैं। ऐसे में उनसे वार्षिक फीस न वसूली जाए। अगर स्कूल प्रबंधक ने अपनी तानाशाही दिखाई तो वे अपने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई से हटा देंगे लेकिन फीस नहीं देंगे।
फीस नहीं भरी तो बच्चे का ट्रांसफर सर्टिफिकेट ले जाएं : वाणी
स्कूल प्रिंसिपल वाणी ने दोटूक कहा कि कोरोना के चलते नप ने उनसे टैक्स लेना बंद नहीं किया है। बसों की मेंटेनेंस भी करवानी है। स्टाफ को सैलरी दे रहे हैं। अभिभावकों को लिखित में देने के लिए भी स्कूल प्रबंधन तैयार है लेकिन वार्षिक फीस देनी ही पड़ेगी। अगर किसी अभिभावक को फीस देने में दिक्कत है तो वे अपने बच्चे का ट्रांसफर सर्टिफिकेट ले जा सकता है।
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स्कूल प्रबंधन का कहना है कि फीस देनी ही पड़ेगी। अगर कोई फीस नहीं देगा तो वे अपने बच्चों को स्कूल से हटा सकता है। अभिभावक संदीप कुमार, जयेश पाटिल, दिनेश चौहान, रजनी बाला, सुम्मी राय, नितिन चौहान, आरपी सिंह, रमेश महर्षि, राजीव गर्ग व राघव के नेतृत्व में चार दर्जन अभिभावक स्कूल गए थे। स्कूल प्रबंधकों ने अभिभावकों को बातचीत के लिए बुलाया था। अभिभावकों ने कहा कि वह ट्यूशन फीस देने को तैयार हैं। वर्तमान में स्कूल नहीं लग रहे हैं। ऐसे में पहले जहां आठ घंटे पढ़ाई होती थी, अब मात्र दो घंटे पढ़ाई हो रही है। स्टाफ को आधे से भी कम वेतन दे रहे हैं। बस खड़ी है और बस चालक दूसरी जगह कार्य कर रहे हैं। ऐसे में उनसे वार्षिक फीस न वसूली जाए। अगर स्कूल प्रबंधक ने अपनी तानाशाही दिखाई तो वे अपने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई से हटा देंगे लेकिन फीस नहीं देंगे।
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फीस नहीं भरी तो बच्चे का ट्रांसफर सर्टिफिकेट ले जाएं : वाणी
स्कूल प्रिंसिपल वाणी ने दोटूक कहा कि कोरोना के चलते नप ने उनसे टैक्स लेना बंद नहीं किया है। बसों की मेंटेनेंस भी करवानी है। स्टाफ को सैलरी दे रहे हैं। अभिभावकों को लिखित में देने के लिए भी स्कूल प्रबंधन तैयार है लेकिन वार्षिक फीस देनी ही पड़ेगी। अगर किसी अभिभावक को फीस देने में दिक्कत है तो वे अपने बच्चे का ट्रांसफर सर्टिफिकेट ले जा सकता है।
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