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Solan News: सस्ता तो बहुत है इश्क मगर, हर दिल की कीमत होती नहीं
Sat, 23 Mar 2024 11:24 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sat, 23 Mar 2024 11:24 PM IST
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नालागढ़ में होली के उपलक्ष्य में हुई काव्य गोष्ठी
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। नालागढ़ में साहित्य कला मंच ने होली के उपलक्ष्य में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें साहित्यकारों ने काव्य पाठ किया। अध्यक्षता नालागढ़ साहित्य कला मंच के अध्यक्ष यादव किशोर गौतम ने की।
कवि गोष्ठी की शुरुआत मंच की संरक्षक एवं वरिष्ठ साहित्यकार कृष्णा बंसल की कविता मौसम ने करवट ली, फागुन ने दस्तक दी से हुई...। इसके बाद सुमति सिंघल ने बचपन में बड़े होने की चाह, जवानी में बचपन छूटने का दर्द... से जीवन की पहेली का वर्णन किया। विजय लक्ष्मी ने फागुन... कविता प्रस्तुत की। प्रमोद हर्ष के श्रृंगार गीत सस्ता तो बहुत है इश्क मगर हर दिल की कीमत होती नहीं... ने खूब तालियां बटोरीं। अदित कंसल ने अपनी गजल बुजुर्ग की आवाज नहीं आती, घर में अखबार नहीं आती, के माध्यम से आज की परिस्थिति को बयां किया। हरिराम धीमान ने आज के राजनैतिक हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अब के होली सब से न्यारी है, कीचड़ से खेलने की तैयारी है...। यादव किशोर गौतम ने धार्मिक रचना आजा आजा रे बनवारी...सुनाकर समा बांध दिया। इस अवसर पर सदस्यों एक दूसरे को रंग लगाकर होली खेली और मुंह मीछा कराया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। नालागढ़ में साहित्य कला मंच ने होली के उपलक्ष्य में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें साहित्यकारों ने काव्य पाठ किया। अध्यक्षता नालागढ़ साहित्य कला मंच के अध्यक्ष यादव किशोर गौतम ने की।
कवि गोष्ठी की शुरुआत मंच की संरक्षक एवं वरिष्ठ साहित्यकार कृष्णा बंसल की कविता मौसम ने करवट ली, फागुन ने दस्तक दी से हुई...। इसके बाद सुमति सिंघल ने बचपन में बड़े होने की चाह, जवानी में बचपन छूटने का दर्द... से जीवन की पहेली का वर्णन किया। विजय लक्ष्मी ने फागुन... कविता प्रस्तुत की। प्रमोद हर्ष के श्रृंगार गीत सस्ता तो बहुत है इश्क मगर हर दिल की कीमत होती नहीं... ने खूब तालियां बटोरीं। अदित कंसल ने अपनी गजल बुजुर्ग की आवाज नहीं आती, घर में अखबार नहीं आती, के माध्यम से आज की परिस्थिति को बयां किया। हरिराम धीमान ने आज के राजनैतिक हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अब के होली सब से न्यारी है, कीचड़ से खेलने की तैयारी है...। यादव किशोर गौतम ने धार्मिक रचना आजा आजा रे बनवारी...सुनाकर समा बांध दिया। इस अवसर पर सदस्यों एक दूसरे को रंग लगाकर होली खेली और मुंह मीछा कराया।
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